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छत्तीसगढ़ के युवाओं का हाल, पैसे गिनने, वेट जोड़ने और वक्त बताने में भी परेशानी

ये चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं असर की वार्षिक रिपोर्ट में।

Dainik Bhaskar

Jan 17, 2018, 05:32 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

रायपुर. राज्य के युवाओं के बारे में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। 25 फीसदी युवा अपनी भाषा के सरल पाठ को धारा प्रवाह नहीं पढ़ सकते। अंग्रेजी के वाक्य पढ़ने में भी कमजोर हैं। बुनियादी पढ़ाई में इतने पीछे हैं कि पैसे गिनने, वजन जोड़ने और समय बताने में परेशानी होती है। 76 प्रतिशत युवा ही रुपयों की सही गिनती कर जोड़ पाए, जबकि 56 फीसदी ही किलोग्राम का सही वजन जोड़कर बता सके। समय बताने में 83 फीसदी दक्ष हैं, लेकिन मिनट व सेकंड के बारे में पूछने यह प्रतिशत 60 ही है। ये चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं असर की वार्षिक रिपोर्ट में।

टीम ने छत्तीसगढ़ के धमतरी में भी 60 गांवों में सर्वे किया था। इस दौरान करीब 1200 युवाओं से बात कर उनकी गतिविधियां जानी गईं। एनुअल स्टेटस आफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) की वार्षिक रिपोर्ट इस बार कुछ नई है। उसने इस साल 14 से 18 साल के स्कूली बच्चों जो युवा बनने की दहलीज पर खड़े हैं, अपना सर्वे उनकी स्किल्ड पर केंद्रित किया।

ये ऐसे किशोर हैं जाे प्रारंभिक पढ़ाई कर चुके हैं। देश के 24 राज्यों के 28 ग्रामीण जिलों के 1641 गांवों के 25 हजार 726 घरों के 30 532 युवक-युवतियों से बातचीत की गई। वे सामान्य सवालों के जवाब भी नहीं दे सके। जैसे रूलर की मदद से लंबाई नापने को कहा गया तो 86 फीसदी ने सही नापी, जबकि रूलर को शून्य से हटा दिया तो 40 प्रतिशत ही सही नाप कर सके। सैंपल निर्देश 75 फीसदी ही पढ़ सके। बजट, खरीददारी के वक्त निर्णय, बैंकों से ब्याज लेना, टी शर्ट खरीदने में छूट जैसे रोचक व जीवन उपयोगी सवालों का जवाब देने वाले युवा भी 38 से 70 फीसदी ही रहे।

छत्तीसगढ़ में धमतरी जिले में सर्वे :
छत्तीसगढ़ में असर का सर्वे धमतरी जिले के 60 गांवों के 956 घरों में हुआ। इस दौरान 14 से 18 साल के 1198 युवक-युवतियों से गतिविधियों, आधुनिक तकनीकों, स्किल इंडिया के प्रति जागरूकता और उनकी आकांक्षाओं पर बात की गई। युवाओं के अंग्रेजी व गणित पढ़ने और दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली गणितीय हिसाब-किताब की क्षमता को आंका गया है। पता चला कि धमतरी जिले के 82.9 प्रतिशत युवा स्कूल या काॅलेज जाते हैं, जबकि युवतियों का प्रतिशत 84.1 है। यानी नामांकन में युवकों की तुलना में युवतियां आगे हैं। जबकि जिले के 17.2 फीसदी युवाओं ने स्कूल कालेज का मुंह तक नहीं देखा। इसमें अनामांकित युवकों का प्रतिशत 18.5 व युवतियों का 15.9 है। जिले के 17-18 साल के 29.6 प्रतिशत युवा आज भी स्कूल या काॅलेज नहीं जाते। उनकी उम्र बढ़ने के साथ ही ड्राॅप आउट का प्रतिशत बढ़ता जा रहा है। धमतरी जिले में सिर्फ 1.6 फीसदी युवा कौशल विकास की ट्रेनिंग ले रहे हैं। रिपोर्ट में सरकार को सलाह दी गई है कि वह युवाओं को जागरूक करे।

दिल्ली में जारी हुई रिपोर्ट :
असर के छत्तीसगढ़ प्रभारी भूपेंद्र जांगड़े ने बताया कि देश के 14 से 18 साल के औसतन 86 प्रतिशत स्कूली युवा स्कूल या कालेजों में पढ़ रहे हैं। असर की ताजी बारहवीं रिपोर्ट मंगलवार को दिल्ली में जारी की गई। केंद्र के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम और कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्रालय के सचिव आईएएस डॉ. केपी कृष्णन ने रिपोर्ट का विमोचन किया। इसे ग्रामीण भारत में स्कूली शिक्षा और बुनियादी पढ़ाई पर केंद्रित देश का सबसे बड़ा परिवार आधारित वार्षिक सर्वे कहा जा रहा है। प्रथम संस्था ने ग्रामीण जिलों में संगठनों, विश्वविद्यालय, कालेज, डाइट व आम लोगों व संस्थाओं के प्रशिक्षित लोगों की मदद इसमें ली है। छत्तीसगढ़ में यह रिपोर्ट 20 जनवरी को शिक्षामंत्री केदार कश्यप जारी करेंगे।

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