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3 महीने से ताक में थे नक्सली, दोपहर में लौटते जवानों के लिए लगाया अपॉरच्युनिटी एंबुश

कोर एरिया पलौदी में कैंप खुलने से बेचैन नक्सलियों ने पहले जवानों को घेरा लेकिन वे बच निकले थे।

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 06:36 AM IST
बारुदी विस्फोट के बाद एमपीव्ह बारुदी विस्फोट के बाद एमपीव्ह

जगदलपुर(छत्तीसगढ़). सुकमा में हुआ हमला नक्सलियों की अचानक प्लानिंग का नतीजा नहीं है। दरअसल, वे पिछले तीन महीने से इस हमले की तैयारी में थे। फोर्स ने किस्टाराम के बाद पलौदी में हाल ही में नया कैंप खोला है। छत्तीसगढ़ बॉर्डर का यह इलाका नक्सलियों का कोर एरिया माना जाता है। इस कैंप के शुरू होने के बाद नक्सलियों की बेचैनी बढ़ गई थी, क्योंकि इसके बाद फोर्स आगे नया कैंप खोलती। ऐसे में फोर्स को बैकफुट पर लाने के लिए नक्सली हमले की ताक पर थे। मंगलवार को माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल लेकर लौटते जवान उनके निशाने पर आ गए।

पता चला जवान दोबारा कैंप से निकले हैं तो नक्सलियों ने अपॉरव्युनिटी एंबुश लगाया

किस्टारम के निकट नक्सली हमले के बाद सोशल मीडिया में कई खबरों ने ट्रेंड किया। कुछ ने इस घटना को बीजापुर में ग्रे-हाउंड द्वारा नक्सलियों को मारने का बदला बताया तो कुछ ने इसे इंजरम में सीएम डॉ. रमन सिंह के बाइक से घूमने का जवाब बताया। हमले का सच जानने के लिए भास्कर टीम ने घटनास्थल और आसपास 4 घंटे तक जायजा लिया, वहां के लोगों से बातचीत की। पता चला कि इस इलाके में नक्सली सुगबुगाहट पिछले कुछ दिनों से बढ़ गई थी। जंगल से निकली खबरों को मानें तो यह हमला किसी भी घटना या एनकाउंटर के जवाब में नहीं किया गया, बल्कि यह नक्सलियों का सुनियोजित हमला था। मंगलवार को छुट्टी पर आए जवानों को कैंप तक छोड़ने निकले जवान नक्सलियों के अपॉरच्युनिटी एंबुश के तहत टारगेट में आकर शहीद हो गए।

बालोदी में कैंप खुलने के बाद से नक्सली बेचैन थे
कोर एरिया में फोर्स ने कैंप खोला था, डर था कि फोर्स आगे बढ़ेगी तो जमीन खिसक जाएगी इसलिए ताक में थे हमले के किस्टारम में कैंप खोलने के बाद जिला पुलिस बल ने पलोदी में भी एक कैंप की स्थापना करवाई थी। इस कैंप को शुरू हुए ज्यादा समय नहीं हुआ है। जिस स्थान पर कैंप खोला गया है वह नक्सलियों का कोर एरिया माना जाता है। यहां कैंप स्थापित होने के बाद से ही नक्सलियों में बेचैनी बढ़ गई थी और उन्हें लग रहा था कि फोर्स अब आगे भी नए कैंप खोलेगी। ऐसे में नक्सली यहां बड़ी वारदात कर जवानों को बैकफुट पर डालना चाहते थे और वह इसके लिए मौके की तलाश में थे।

पहले जवानों को घेरा पर जवान बच निकले, फिर छुट्‌टी से लौटने वाले जवानों के लिए लगाया अपॉरच्युनिटी एंबुश
पालोदी में कैंप स्थापित होने के बाद से नक्सली जवानों को मुंहतोड़ जवाब देना चाह रहे थे। मंगलवार की सुबह भी नक्सलियों ने जवानों को नदी किनारे घेरने की कोशिश की लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो पाए। यहां से भागने के बाद नक्सलियों ने इस इलाके को नहीं छोड़ा था। इसी बीच नक्सलियों को पता चला कि जवान दोबारा कैंप से निकले हैं तो इन्होंने आॅपर्चुनिटी एंबुश लगाया और छुट्‌टी से लौटने वाले जवानों की एमपीव्ही को विस्फोट कर उड़ा दिया।

डीआरजी जवानों को हटाकर सीआरपीएफ की हुई तैनाती

बीते साल दिसंबर में ही किस्टारम से लगभग साढ़े चार किमी दूर पुलिस ने पालोड़ी में नया कैंप स्थापित किया था। इस कैंप को खोलने में डीआरजी जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शुरुआत में यहां डीआरजी के जवानों की तैनाती थी। बाद में कैंप से डीआरजी जवानों को हटाकर सीआरपीएफ 212 बटालियन की कंपनी तैनात कर दी गई।

बस्तर से लाल गलियारा खत्म नहीं हो रहा बल्कि 12 जिलों में फैल गया

- बस्तर में नक्सलवाद पिछले तीन दशकों से पैर जमाए हुए है। इन तीन दशकों में कई ऐसे मौके आए जब लगा कि नक्सलवाद अपने अंतिम दौर में है लेकिन हर बार यह बड़ी ताकत के साथ वापस आया। अभी सरकार दावा कर रही है कि बस्तर में नक्सली बैकफुट पर हैं लेकिन सरकार के इस दावे के उलट नक्सली न सिर्फ बस्तर में मजबूत हुए हैं बल्कि उन्होंने अपना दायरा प्रदेश के दूसरे जिलों में बढ़ाया है।

- बस्तर सहित प्रदेश के 12 जिलों में नक्सली अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। हाल ही में सीएम सहित बस्तर में तैनात कई पुलिस अफसरों ने 2023 में नक्सलवाद को खत्म करने का दावा किया था लेकिन पिछले एक साल में सिर्फ सुकमा में ही नक्सली हमलों में 50 जवान शहीद हो चुके हैं बस्तर 2017 में शहीद होने वाले जवानों की संख्या करीब 130 थी।

- इसके अलावा नक्सलियों ने हाल ही में धमतरी इलाके में एक मुठभेड़ को अंजाम दिया था। इसके पूर्व सरगुजा में नक्सली छिटपुट घटनाओं को अंजाम दे ही रहे हैं। हालांकि यहां फोर्स इन्हें कंट्रोल करने में लगी हुई है। यहां नक्सली झारखंड के रास्ते आ रहे हैं और बार्डर वाले इलाके में वारदात को अंजाम देकर वापस झारखंड लौट रहे हैं।

- राजनांदगांव में तो बस्तर से कई नक्सलियों को भेजे जाने की खबरें हैं यहां भी नक्सली महाराष्ट्र की सीमा से आना-जाना कर रहे हैं। वहीं महासमुंद इलाके में भी नक्सलियों की मौजूदगी का इनपुट खुफिया रिपोर्ट में मिलता है। ऐसे में अब नक्सलवाद बस्तर से बाहर निकल रहा है।