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सरेंडर कर चुके 21 नक्सलियों ने खुलवाई नसबंदी, 5 के घर में गूंजीं किलकारियां

सरेंडर करने वालों में से अधिकांश की यही थी ख्वाहिश- मेरा अपना परिवार हो।

मोहम्मद इमरान नेवी | Last Modified - Dec 30, 2017, 07:22 AM IST

सरेंडर कर चुके 21 नक्सलियों ने खुलवाई नसबंदी, 5 के घर में गूंजीं किलकारियां

जगदलपुर(छत्तीसगढ़). देश में एक अनूठा प्रयोग सफल हो गया है। बस्तर पुलिस ने 21 आत्मसमर्पित नक्सलियों का रिवर्स वैसेक्टॉमी (नसबंदी खुलवाने का) ऑपरेशन कराया, इनमें से 5 के घर में किलकारियां गूंजने लगी हैं। सुरक्षा की मद्देनजर उनके नाम प्रकाशित नहीं किए जा रहे, भास्कर के पास इसके प्रमाण मौजूद हैं। माता-पिता बने इन पूर्व नक्सलियों की उम्र 22 से 29 के बीच है। सभी कमांडर से लेकर एलओएस तक के पद पर रह चुके हैं। ऑपरेशन सरकारी खर्च पर प्रदेश में ही हुए हैं।

ऐसा पहली बार है

अब तक इन आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए घर-नौकरी आदि की ही कवायद की जा रही थी। बस्तर आईजी विवेकानंद सिन्हा के अनुसार ऐसा पहली बार है जब आत्मसमर्पित नक्सली रिवर्स वैसेक्टॉमी ऑपरेशन के बाद माता-पिता बने हों।

2001 में हुआ पहला ऑपरेशन

आईजी विवेकानंद सिन्हा के मुताबिक, "2001 में मैं दंतेवाड़ा में बतौर एसपी पदस्थ था। तब एक नक्सली ने सरेंडर किया, उसने बताया कि वह इसलिए सरेंडर कर रहा है कि वह परिवार बढ़ाना चाहता है। लेकिन नक्सलियों ने उसकी नसबंदी की हुई थी। छत्तीसगढ़ में उस समय सरेंडर पॉलिसी भी नहीं थी। हमने सरकार से अनुरोध किया और हमें विशेष अनुमति मिल गई। इसके बाद पहली बार किसी आत्मसमर्पित नक्सली का रिवर्स वैसेक्टॉमी ऑपरेशन हुआ। पिछले 2 वर्ष में सरेंडर पॉलिसी के द्वारा ऑपरेशन कराने में बड़ी सफलता मिल रही है। नसबंदी खुलवाना भी पुनर्वास नीति का हिस्सा है। अब तक 21 नक्सलियों की नसबंदी खुलवाई गई है।’’

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