--Advertisement--

हर साल पढ़ाई ठप होने से परेशान शासन का आदेश- अब हड़ताल नहीं कर सकेंगे शिक्षाकर्मी

हड़ताल और धरना-प्रदर्शन रोकने के लिए नई नियुक्ति के साथ एक कड़ी शर्त जोड़ दी है।

Dainik Bhaskar

Dec 13, 2017, 08:57 AM IST
सिम्बॉलिक इमेज। सिम्बॉलिक इमेज।

रायपुर. शासन ने शिक्षाकर्मियों की हड़ताल और धरना-प्रदर्शन रोकने के लिए नई नियुक्ति के साथ एक कड़ी शर्त जोड़ दी है। अब नए भर्ती होने वाले शिक्षाकर्मियों को ज्वाइन करने के पहले शपथ-पत्र लिखकर देना होगा कि अपनी किसी भी मांग को लेकर हड़ताल या धरना-प्रदर्शन नहीं करेंगे। शपथ-पत्र लेने के बाद ही शिक्षाकर्मियों को ज्वाइनिंग दी जाएगी। जशपुर में 298 शिक्षाकर्मियों की भर्ती के आदेश के साथ इस नई शर्त का खुलासा हुआ। उसके बाद से बवाल मच गया है। शिक्षाकर्मी संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है।

शासन के इस फैसले के बाद अब नौकरी ज्वाइन करने वाले शिक्षाकर्मी शपथ-पत्र की शर्तों में बंधे रहेंगे। वे किसी भी मांग को लेकर हड़ताल नहीं कर सकेंगे। शासन के आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि वे अपनी और किसी दूसरे की मांग के लिए हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे। इतना ही नहीं किसी को हड़ताल के लिए प्रेरित करना भी शर्तों का उल्लंघन माना जाएगा। पंचायत संचालनालय से 25 नवंबर को जारी निर्देश पर अमल भी शुरू हो गया है। शेष|पेज 7

जशपुर में 298 पदों पर शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति आदेश निकाला गया जिसमें नए ज्वाइन करने वाले शिक्षाकर्मियों से शपथ पत्र मांगा गया है कि वे कभी हड़ताल पर नहीं जाएंगे।

ये लिखा है आदेश में
कंडिका 4 में स्पष्ट लिखा गया है कि छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम 1998 के नियम 5 (दो) में प्रावधान अनुसार, ‘कोई भी पंचायत सेवक अपनी सेवा या किसी अन्य पंचायत सेवक की सेवा से संबंधित किसी मामले के संबंध में ना तो किसी तरह की हड़ताल का सहारा लेगा और ना ही किसी प्रकार से उसे अभिप्रेरित करेगा। नए शिक्षाकर्मियों को इन 11 बिंदुओं की शर्तों पर 10 रुपए के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र बीईओ कार्यालय में 25 दिसंबर तक जमा करना होगा।

क्यों किया ऐसा

शिक्षाकर्मियों की हड़ताल से राज्य की 54 हजार स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो जाती है। यहां 1.80 लाख शिक्षाकर्मी हैं। शिक्षकों से ज्यादा संख्या शिक्षाकर्मियों की है। कई जिलों में बच्चों की पढ़ाई का पूरा जिम्मा इन्हीं पर है। इन्हें हड़ताल पर जाने से रोकने के लिए यह शर्त जोड़ी गई है।

आदेश तुगलकी, कोर्ट की शरण में जाएंगे : शिक्षाकर्मी
शिक्षाकर्मी नेताओं ने इसे तुगलकी आदेश बताते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो कोर्ट की शरण में जाएंगे। शिक्षाकर्मी नेता संजय शर्मा और वीरेंद्र दुबे ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोकने की साजिश बताया है। शिक्षाकर्मी अपनी जायज मांगों को लेकर कई बार आग्रह करते हैं। मांग पूरी नहीं होने पर ही हड़ताल या आंदोलन का सहारा लिया जाता है। इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाएंगे।

X
सिम्बॉलिक इमेज।सिम्बॉलिक इमेज।
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..