Hindi News »Chhatisgarh »Raipur »News» Traditions Have Been Going On For Years.

होली के लिए तरसते हैं यहां के लोग, सालों से चली आ रही है ये परंपरा

प्रदेश के गांव मुढ़ेगा ही एक ऐसा गांव है जहां होली नहीं जलाई जाती, और न तो और हटरीबाजार भी यहां नहीं लगता।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 02, 2018, 07:14 AM IST

होली के लिए तरसते हैं यहां के लोग, सालों से चली आ रही है ये परंपरा

महासमुंद(छत्तीसगढ़).प्रदेश के गांव मुढ़ेगा ही एक ऐसा गांव है जहां होली नहीं जलाई जाती, और न तो और हटरीबाजार भी यहां नहीं लगता। जिला मुख्यालय से करीब 9 किलोमीटर की दूरी पर बने इस गांव में होली के मौके पर न तो कोई फाग के गीत गाता है और न ही कोई उत्सव होता है। कुंवारी गांव धारणा के कारण आज भी यहां होलिका दहन नहीं की जाती है। बुजुर्गों ने बताया...

- गांव के बुजुर्गों के मुताबिक, शौकिया तौर पर बच्चे गांव से बाहर जरूर नगाड़ा बजा लेते है लेकिन फुहड़ता का प्रदर्शन नहीं होता। इससे जुड़े मामले में गांव के बड़े बुजुर्गों का कहना है कि यह परंपरा हमारे पुरखों ने चला रखी है, जिनका पालन अभी तक यहां किया जा रहा है। संभव है कि इसके पीछे उनकी भावना कुछ और रही होगी लेकिन हमें सिर्फ यह बताया गया है कि गांव का ब्याह नहीं हुआ है, इसलिए यहां इनका चलन नहीं है।

- वहीं शहर से महज 5 किमी दूर भलेसर में चिकनपॉक्स से 80 लोग ग्रसित थे। 7 माह की बच्ची से 35 साल तक के लोगों को चिकन पॉक्स हो रहा है। हालात यह है कि बच्चे कई दिनों से स्कूल नहीं जा पा रहे थे।

- गुरुवार को गांव में पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिर्फ खाना पूर्ति की और लौट आई। ग्राम विकास समिति ने बीमारी के प्रभाव को देखते हुए इस साल होनी नहीं मनाने का निर्णय लिया है।

अंधविश्वास से नहीं जोड़ना चाहिए
- अंधविश्वास पर दिनेश शर्मा का कहना है कि इसे अंधविश्वास से गांव के लोगों को नहीं जोड़ना चाहिए, इस मौसम में ठंड जाने लगती है गर्मी आने लगती है, इस मौसम में इंफेक्शन की संभावना होती है।

होली में हुए नाच के बाद गांव में फैली थी महामारी

- गांव के राजेंद्र साहू बताते है कि कुंवारी गांव की मान्यता के कारण यहां बाजार भी नहीं लगता। घोड़ारी या आसपास के गांवों में लगने वाले हाट बाजार से गांव के लोग चलाते है।

- उन्होंने यह भी बताया कि उनकी उम्र 10-12 साल रही होगी तब यहां मालगुजार की होली के मौके पर नाच का आयोजन कराया गया था। उस समय गांव में भयंकर बीमारी फैल गई थी, उसके बाद से तो तौबा कर ली।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Raipur News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: holi ke liye trste hain yaha ke loga, saalon se chali aa rhi hai ye parnparaa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×