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प्रेग्नेंट महिलाओं को सोनोग्राफी से पहले देना होगा आधार कार्ड, भरना होगा फाॅर्म

2 बेटियां हैं और तीसरी प्रेग्नेंसी के बाद सोनोग्राफी करवाने आती हैं, तो इसके पीछे बेटे की चाहत होती है।

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:24 AM IST
सोनोग्राफी सेंटर पहुंची महिल सोनोग्राफी सेंटर पहुंची महिल

धमतरी. अब गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी के लिए आधार कार्ड जरूरी कर दिया गया है। आधार कार्ड या एड्रेस प्रूफ नहीं होने पर उनकी सोनोग्राफी नहीं होगी। जिला स्वास्थ्य विभाग ने सख्त निर्देश दिए हैं कि कोई भी रेडियोलॉजिस्ट या स्त्रीरोग विशेषज्ञ ऐसा करते हैं, तो उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीएमएचओ डॉ. डीके तुर्रे ने कहा कि आधार कार्ड अनिवार्य होने से भ्रूण हत्या पर अंकुश लगेगा। यह नियम लागू होने के बाद सोनोग्राफी जांच कराने वाली गर्भवती महिलाओं की संख्या में भी कमी आई है।

महिलाओं से भरवाया जा रहा 27 बिंदुओं वाला फाॅर्म
जिले में 11 सोनोग्राफी सेंटर संचालित है, जहां प्रतिदिन 20 से 30 गर्भवती महिलाएं सोनोग्राफी कराने पहुंचती हैं। अब आधार की अनिवार्यता से भ्रूण हत्या के अपराधियों को दबोचा जा सकेगा, क्योंकि विभाग के पास नाम, पता सब कुछ रहेगा। यदि महिला अलग-अलग सोनोग्राफी सेंटर में भी जांच करवा रही है, तो उसके पास एक ही आधार कार्ड होगा, जिसका वह इस्तेमाल करेगी। जिनकी 2 बेटियां हैं और तीसरी बार गर्भधारण के बाद सोनोग्राफी करवाने आती हैं, तो कहीं न कहीं वह और उसके परिवार वाले लड़का चाहते हैं। ऐसी स्थिति में भी अपराध होने से रोका जा सकेगा। अब सोनोग्राफी के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं से 27 बिंदुओं वाला एफ फार्म भराया जा रहा है, ताकि भ्रूण हत्या पर रोक लगाई जा सके।

एक्ट में बदलाव से ये फायदे

- सोनोग्राफी कराने पहुंचने वाली गर्भवती महिला का एड्रेस एंट्री होगा, जिससे बार-बार वह सोनोग्राफी नहीं करा पाएगी। साथ ही कन्या भ्रूण हत्या पर भी रोक लगेगी।
- सेंटरों में सेवाएं देने वाले सोनोलॉजिस्ट के नौकरी छोड़ने या उन्हें हटाने की एक माह पहले सूचना देनी होगी।
- सोनोग्राफी मशीन में बदलाव करने की जानकारी एक माह पहले सीएमएचओ कार्यालय में देनी होगी। पहले यह नियम नहीं था।
- लाइसेंस अवधि समाप्त होने के एक माह के भीतर रिनुअल कराना अनिवार्य किया गया है।
- आयुर्वेदिक या होम्योपैथी के डॉक्टर सोनोग्राफी की जांच नहीं कर सकते।

हर माह 5 तारीख को देनी होगी अाॅनलाइन जानकारी
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी रेडियोलॉजिस्ट, स्त्रीरोग विशेषज्ञों को महीने की 5 तारीख को अनिवार्य रूप से सोनोग्राफी मरीजों की जानकारी ऑनलाइन सबमिट करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले यह प्रक्रिया फाइलों में होती थी, जिससे फाइल संचालनालय में जाकर डंप हो जाती थीं और मॉनीटरिंग आसान नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सभी जिलों में संचालनालय के पीसी-पीएनडीटी शाखा के अफसर जाकर इस संबंध में सोनोग्राफी सेंटर संचालकों की बैठकें ले रहे हैं।

11 सेंटर्स को सूचना जारी की जा चुकी
सीएमएचओ डॉ. डीके तुर्रे ने कहा कि जिले के सभी 11 सेंटर्स को सूचना जारी की जा चुकी है कि आधार कार्ड लें। नहीं लेने वालों पर कार्रवाई का भी प्रावधान है। उन्होंने बताया कि जिले में संचालित सभी 11 सोनोग्राफी सेंटरों में यह नियम लागू होने के बाद से औसत सोनोग्राफी में कमी आई है। पहले 1300 से 1500 सोनोग्राफी जिले में हर महीने होती थी, लेकिन अब नियम लागू होने के बाद प्रतिमाह 900 हो रही है। यह नियम दो महीने पहले ही लागू हुआ है।

सजा का भी प्रावधान
पीएनडीटी एक्ट में हाल के संशोधनों के बाद सोनोग्राफी सेंटरों के संचालक और गायनेकोलॉजिस्ट जांच के लिए आने वाली गर्भवती महिलाअों से उनका एड्रेस प्रूफ नहीं लेते हैं, या आधार व दूसरे आईडी प्रूफ न होने पर भी सोनोग्राफी करते हैं, तो उनका लाइसेंस कैंसिल करने के साथ ही उन्हें जेल की सजा का भी प्रावधान है।

27 बिंदुओं पर भरवा रहे फाॅर्म
खंडेलवाल सोनोग्राफी सेंटर के संचालक डॉ. रमेश खंडेलवाल ने बताया कि आधार कार्ड के बगैर किसी भी गर्भवती महिला की सोनाेग्राफी नहीं की जा रही है। उनसे 27 बिंदुओं पर पूरा डिटेल भी भराया जा रहा है। एफ फार्म में यह भी उल्लेख है कि लिंग परीक्षण नहीं कराना चाहते। फार्म में उनसे हस्ताक्षर भी कराया जा रहा है। एक फार्म की ऑनलाइन एंट्री करने में लगभग 15 मिनट लग रहे हैं।

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