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झीरम कांड पर उमेश पटेल बोले- मदद नहीं कर सकते तो अपमान न करें

क्या सदन में इसका मजाक उड़ाया जाएगा। 2 साल पहले 24 मई को दिन भर एक सरेंडर नक्सली का इंटरव्यू चलता है।

Danik Bhaskar | Dec 23, 2017, 08:30 AM IST

रायपुर. अविश्वास प्रस्ताव के दौरान विधायक उमेश पटेल झीरम कांड के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए भावुक हुए। पटेल ने झीरम घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि आप लोग सच्चाई जानते हैं बताते क्यों नहीं। क्या सदन में इसका मजाक उड़ाया जाएगा। 2 साल पहले 24 मई को दिन भर एक सरेंडर नक्सली का इंटरव्यू चलता है। वह नंदकुमार पटेल, और महेंद्र कर्मा क्रास फायरिंग में मारे गए। या तो वह नक्सली नहीं है या अगर वह उपस्थित थे तो उससे झूठ बुलवाया जा रहा है। एक दिन में सीबीआई की घोषणा हो जाती है। क्या नक्सल समस्या पंजाब से बड़ी है।

आपने गिल को लाया सीएम उनसे कहते हैं खाओ पियो यहां रहो। आप नक्सलवाद खत्म नहीं करना चाहते, आप फायदा ले रहे हैं। हम सीएम से मिलने गए थे,उन्होंने कहा राजनाथ सिंह से मिलेंगे उनसे जांच की मांग करते हैं। मैं जानना चाहता हूं कि क्या सीएम यह घोषणा करेंगे कि क्या उस बात को निकालने जांच करेंगे। वे मजाक उड़ाते हैं । यह बेहद अशोभनीय है। मैंने भावनाओं को दबाना सिख लिया है। जब इस बात को कुरेदा जाता है तब मैं कहता हूं में सभी सदस्यों से हाथ जोड़कर कहता हूं यदि आप हमारी मदद नहीं कर सकते तो हमारा अपमान भी न किया करें।

पहले भी 5 प्रस्ताव गिर चुके हैं, सबसे लंबी अवधि तक चर्चा का पिछला रिकार्ड नहीं टूटा

17 साल के छत्तीसगढ़ राज्य में अब तक निर्वाचित चार विधानसभा में सरकारों के खिलाफ 5 अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जा चुके हैं। सभी में सरकार की जीत हुई। इसी चौथी विधानसभा में सरकार के खिलाफ यह दूसरा अविश्वास प्रस्ताव है। पहली विधानसभा में अजीत जोगी सरकार के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष नंदकुमार साय 30 सितंबर 2002 को पहला प्रस्ताव लाए थे। 12 घंटे 8 मिनट चली चर्चा के बाद 22 के मुकाबले 61 मतों से सरकार की जीत हुई थी। उसके बाद 29 जुलाई 2003 को दूसरा प्रस्ताव आया। 17 घंटे 8 मिनट चली चर्चा के बाद प्रस्ताव 23 के मुकाबले 54 मत से गिरा।

द्वितीय विधानसभा में डॉ. रमन सिंह की पहली सरकार के खिलाफ तत्कालीन दिवंगत नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा ने 3 सितंबर 2007 को प्रस्ताव लाए। इसके खिलाफ 52 और पक्ष में 26 मत पड़े थे। 17 घंटे 56 मिनट चली चर्चा के बाद सरकार की जीत हुई। तीसरी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे रविंद्र चौबे ने रमन सरकार पर अविश्वास जताया। 16, 19 और 20 दिसंबर 2011 को 23 घंटे 25 मिनट चली चर्चा के बाद प्रस्ताव के पक्ष में 37 और विपक्ष में 48 मत पड़े थे। इस चौथी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने इसके पहले 24 जुलाई 2015 को पहला प्रस्ताव पेश किया था। 24 घंटे 25 मिनट के रिकॉर्ड समय तक चली चर्चा के बाद 37 के विरुद्ध 50 मतों से सरकार की जीत हुई थी। आज दूसरे प्रस्ताव पर करीब 15 घंटे की चर्चा के बाद सरकार फिर जीत गई।

छोटे भाई,बड़े भाई की सरकार

निर्दलीय विमल चोपड़ा ने कहा कि मैं देख रहा हूं कि छोटे भाई और बड़े भाई की सरकार चल रही है छोटे भाई के बड़े भाई का चेहरा पसंद आता है बड़े भाई को छोटे भाई का चेहरा पसंद आता है। विपक्षी खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आना चाहिए मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि सरकार विपक्ष चला रही है यह सरकार विपक्ष को चला रहे हैं। कोई मंत्री अपने क्षेत्र का छोड़कर प्रदेश में दौरान नहीं करता है। राजस्थानी में लोग नहीं चाहते वह सड़क के विकास गांव में 7 साल से लोग रहते हैं वहां सड़के नहीं है क्योंकि कीचड़ में चलता है। छत्तीसगढ़ के मारे 3 4 विधानसभा उत्तर सीमित हो गए रायपुर में हजारों करोड़ के काम चल रहे हैं जबकि हम एक ओवर ब्रिज के 25 साल तक लड़ते रहे। विधायक अमित जोगी ने कहा कि न मुझको इन पर विश्वास है न उन पर (सत्ता पक्ष)। सरकार पर इसलिए विश्वास नहीं है क्योंकि,प्रदेश में इलाज की व्यवस्था नहीं है। कुपोषण के मामले में देश में हमारा राज्य दूसरे और रेप के मामले में 5वें स्थान पर है।