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कभी ईट भट्ठा में काम करती थी ये लड़की, अब टीआई बन कहलाती है लेडी सिंघम

पढ़ाई के लिए खेतों में मजदूरी करने वाली अब हैं जिले की पहली महिला टीआई।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 15, 2018, 08:16 AM IST

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    पद्मा अपनी जान खतरे में डालकर 6 तस्कारों के कब्जे से लड़कियों को छुड़ा चुकी है ।

    बालोद(छत्तीसगढ़). पद्मा की काबलियत व साहस के कारण जिले के लोग उन्हें अब लेडी सिंघम कहने लगे हैं। हाल ही में देवरी थाना की टीआई बनी पद्मा जगत ने पुलिस की नौकरी सिर्फ इसलिए ज्वाॅइन किया कि वह जिंदगी में दूसरों की मदद करना चाहती थी। गरीबी व अशिक्षा से लड़ाई लड़ते वह इस मुकाम पर पहुंची है। कम समय में अधिक मेहनत कर प्रमोशन पाने वाली पद्मा जिले की पहली महिला टीआई बनी। मूल रूप से महासमुंद जिले के बसना थाना क्षेत्र के ग्राम भैरवपुर की रहने वाली किसान गुलाल जगत व गणेशी बाई की बेटी पद्मा बचपन से होनहार रही।

    ईंट भट्‌ठा में भी काम करने जाती थी: अनिल
    भगतदेवरी हाईस्कूल के खेल शिक्षक अनिल कुमार ने बताया बचपन से पद्मा खेल व पढ़ाई में आगे रही। दौड़ में कई नेशनल जीती है। खुद की पढ़ाई का खर्चा उठाने के लिए वह खेत के साथ ईट भट्ठा में भी काम करने जाती थी। गरीबी हालत में आगे बढ़ने के लिए उसने बहुत मेहनत की है। दल्लीराजहरा के नगर पुलिस अधीक्षक भारतेंदु द्विवेदी, रायपुर के टीआई राजेश चौधरी ने कहा कोई भी टारगेट दो उसे पूरा किए बगैर पद्मा पीछे नहीं हटती। इसी जज्बा के साथ वह काम किया।

    एनसीसी में जीता गोल्ड मेडल
    स्कूल पढ़ाई के दौरान दौड़ में हरियाणा, दिल्ली व जालंधर में नेशनल जीती। एनसीसी में रहकर दिल्ली के राजपथ में शामिल हुई। जहां उन्हें गोल्ड मेडल मिला। उनका छोटा भाई रोहन इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। अभी पद्मा अपने माता पिता के साथ दल्लीराजहरा में रहती है।

    हरी वर्दी फिल्म देख मिली प्रेरणा
    जब पद्मा कक्षा सातवीं में थी तब एक फिल्म हरी वर्दी देखी। जिसमें आर्मी के जवान आतंकवादियों के कब्जे से देश के लोगों को छुड़ाने के लिए संघर्ष करते हैं। इसे देखने के बाद पद्मा ने सोचा कि कैसे एक आर्मी मैन दूसरों के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा देते हैं। इससे वह काफी प्रभावित हुई। उसने भी ठान लिया कि एक दिन आर्मी या पुलिस बनेगी।

    कम समय में ही कठिन मेहनत से पाया प्रमोशन

    रायपुर में पद्मा का चयन 2006 में आरक्षक में हो गया था। वह आगे जाना चाहती थी। आरक्षक रहते सब इंस्पेक्टर की तैयारी की। दो साल बाद सब इंस्पेक्टर के लिए चयनित हुई। लेकिन कुछ कारणों से वह डयूटी ज्वाइन नहीं कर पाई। 2013 में बेसिक ट्रेनिंग लेने के बाद दुर्ग में परिवीक्षा परेड में रही। उनकी पहली पोस्टिंग 13 जून 2016 को बालोद जिले के दल्लीराजहरा थाने में सब इंस्पेक्टर के रूप में हुई। 16 महीने में ही टीआई के पद पर प्रमोशन मिल गया। एएसपी जेआर ठाकुर ने कहा वह जिले की पहली महिला टीआई है। पद्मा कहती है कि अपराधी अपराध क्यों करते हैं, ये जानने व उन्हें सही रास्ते में लाने के उद्देश्य से काम करती हूं।

    पोस्टिंग के 17 दिन बाद मानव तस्करी में फंसी बेटियों को बचाने खुद की जान डाली खतरे में
    जिले में आए उन्हें महज 17 दिन बीते थे। इसी बीच 31 जून 2016 को उन्होंने अपनी जान खतरे में डालकर मानव तस्करी के मामले में छह लड़कियों को छुड़ाया। तस्करी के मास्टर माइंड शेरू उर्फ सुरेन्द्र सोनकर निवासी इलाहाबाद के अड्डे पर जाकर रेकी करना, यूपी पुलिस के सहयोग के बिना उसे पकड़ने में मेहनत की। पद्मा टीआई होने के साथ जिले में रक्षा टीम की भी प्रभारी है। वह स्कूलों में जाकर लड़कियों को आत्मरक्षा के ट्रेनिंग देती है।

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    पद्मा एनसीसी में रहकर दिल्ली के राजपथ में शामिल हुई। जहां उन्हें गोल्ड मेडल मिला।
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    पद्मा स्कूलों में जाकर लड़कियों को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग भी देती हैं।
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Web Title: Village Girl Padma Jagat Became Thana Incharge After Struugle
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