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रायपुर शहर में अप्रैल नहीं, अभी से 12 करोड़ लीटर पानी की जरूरत, मांगा गंगरेल से

औसतन प्रति व्यक्ति 375 लीटर के हिसाब से 3.33 लाख लोगों के लायक ज्यादा पानी की जरूरत अभी से।

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2018, 07:50 AM IST
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रायपुर. कम बारिश और मार्च के पहले हफ्ते से तेज गर्मी का असर अब राजधानी की पानी सप्लाई पर नजर आने लगा है। बारिश थमने के बाद यानी नवंबर से रायपुर नगर निगम जरूरत के अनुसार सिंचाई विभाग से 150 क्यूसेक पानी रोजाना ले रहा था। हर साल अप्रैल के शुरू में इससे कुछ ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है, लेकिन इस बार समय से पहले पड़ रही गर्मी ने राजधानी में पानी की जरूरत तकरीबन 30 फीसदी बढ़ा दी है। इसीलिए निगम ने सिंचाई विभाग को पिछले हफ्ते चिट्ठी लिखकर 50 क्यूसेक (12.5 करोड़ लीटर) और पानी रोजाना मांगा है। रविवार से सिंचाई विभाग ने शहर के लिए 200 क्यूसेक पानी रोजाना देना शुरू कर दिया है। निगम अफसरों के मुताबिक आने वाले दिनों में जरूरत और बढ़ सकती है। ऐसे में रोजाना गंगरेल बांध से शहर के लिए तकरीबन 250 क्यूसेक पानी की जरूरत पड़ने लगेगी।

इस साल मार्च की शुरुआत में ही दोपहर का तापमान 36 डिग्री से ऊपर पहुंच गया है। शहर के तालाब तेजी से सूख रहे हैं। भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है, इसलिए शहर को मार्च के दूसरे हफ्ते से ही अतिरिक्त पानी की जरूरत पड़ने लगी है। हर वार्ड से आ रही मांग को देखते हुए निगम ने पिछले हफ्ते सिंचाई विभाग को ज्यादा पानी के लिए पत्र लिखा था। तब तक शहर के लिए खारुन नदी में 150 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। पत्र के आधार पर रविवार से सिंचाई विभाग ने सप्लाई बढ़ा दी है। निगम अफसरों ने माना कि 11 मार्च से गंगरेल बांध से जितना पानी शहर के लिए लिया जा रहा है, उतनी जरूरत पिछले कई गर्म वर्षों में भी 25 मार्च के बाद ही पड़ी है।

अभी से रोज 2.10 करोड़ लीटर पानी चाहिए
फरवरी से मार्च की शुरुआत तक शहर में पानी की जरूरत लगभग 170 एमएलडी थी। हर साल इतनी ही जरूरत मार्च अंत तक रहती है। लेकिन गर्मी बढ़ने की वजह से शहर में 210 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) यानी 2.10 करोड़ लीटर पानी की जरूरत पड़ रही है। इसलिए गंगरेल से सप्लाई बढ़ाई गई है। यह तो सिर्फ शुरुआत है, अफसरों का अनुमान है कि अप्रैल और मई में इस बार खपत 230 एमएलडी तक बढ़ सकती है। इस वजह से बांध से 50 क्यूसेक तक पानी और लेना पड़ सकता है।

इस बार 20 दिन पहले ही कम पड़ जाएगा खारुन का पानी
फिल्टर प्लांट के प्रभारी अफसर बद्री चंद्राकर ने बताया कि पहले जून से अक्टूबर तक खारुन के पानी से शहर का काम चल जाता था। लेकिन पिछले तीन-चार साल से सिर्फ बारिश के तीन माह में ही नदी का पानी काम आता है। इसके बाद गंगरेल का पानी लेना पड़ता है। इस बार तेज गर्मी अभी से है। शहर में टंकियों की सप्लाई मार्च के पहले हफ्ते से बढ़ानी पड़ी है। इसलिए सीजन में करीब 20 दिन पहले ही गंगरेल से ज्यादा पानी लेने की जरूरत पड़ गई है।

रायपुर को चाहिए एक और वाटर फिल्टर प्लांट

बारिश और ठंड में राजधानी में नगर निगम रोजाना 130-140 एमएलडी पानी सप्लाई करता है। निगम के फिल्टर प्लांट की क्षमता 275 एमएलडी है। इस जरूरत के लिहाज से यह प्लांट पर्याप्त है, लेकिन इस बार जिस तेजी से जरूरत बढ़ी है, उपयोग का पानी प्लांट की क्षमता के बिलकुल नजदीक पहुंच गया है। माना जा रहा है कि तीन-चार साल में जरूरत इसी हिसाब से बढ़ी तो राजधानी के लिए एक और फिल्टर प्लांट जरूरी हो जाएगा।

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