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महिलाओं ने पुरूषों का नहीं लिया सहारा, बुजुर्ग की अर्थी को कंधा दे श्मशान पहुंचाया

बिना किसी पुरुष की मदद के खुद बुजुर्ग की अर्थी को कंधा देकर श्मशान पहुंचा इंसानियत को बचाया।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 01, 2018, 07:43 AM IST

महिलाओं ने पुरूषों का नहीं लिया सहारा, बुजुर्ग की अर्थी को कंधा दे श्मशान पहुंचाया

डोंगरगढ़.मंगलवार को यहां एक बुजुर्ग की मौत हो गई। मौत के बाद मृतक के शरीर को कंधा देने कोई भी सामने नहीं आया, लेकिन इलाके की महिलाओं ने साबित कर दिया कि आज भी इंसानियत जिंदा है। उन्होंने बिना किसी पुरुष की मदद के खुद बुजुर्ग की अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट पहुंचाया और उसका अंतिम संस्कार भी किया।

बॉडी को उतारने वाला कोई भी सामने नहीं आया

- भुरवाटोला वार्ड के रहने वाले भीख मांगकर जीवन-यापन कर रहे हरिराम की तबीयत मंगलवार को सुबह 6 बजे अचानक बिगड़ गई। उसकी पत्नी बबिता धोबी ने वार्ड के युवाओं को मदद मांगी। 108 संजीवनी एंबुलेंस बुलाकर हरिराम को हॉस्पिटल लाया गया। लेकिन सुबह 9 बजे उपचार के दौरान हरिराम ने दम तोड़ दिया। उसकी पत्नी जैसे-तैसे ऑटो में मृतक के बॉडी को घर तक लेकर पहुंची, लेकिन बॉडी को उतारने वाला कोई भी सामने नहीं आया।

- बुजुर्ग के अंतिम यात्रा पूरी करने भी कोई भी पुरुष सामने नहीं आया। अर्थी उठाने के समय दो लड़के मदद करने पहुंचे, लेकिन महिलाओं ने कह दिया कि शुरू में किसी ने मदद नहीं की। अब उन्होंंने बीड़ा उठाया है तो मुक्तिधाम तक वे ही अर्थी को कंधे पर लेकर जाएंगी।

बेटे ने फोन पर कहा- अपने मुताबिक कर दें अंतिम संस्कार

ऑटो से बॉडी उतारने के बाद वार्ड की महिलाओं ने पत्नी बबिता धोबी से चर्चा की। बबिता ने कहा कि मेरा एक बेटा है, लेकिन वह सालों से उनके साथ नहीं रहता। वह आएगा भी की नहीं यह नहीं पता। मोबाइल नंबर लेकर महिलाओं ने हरिराम के बेटे से चर्चा की। बेटा ने कहा कि उसे आने में रात हो जाएगी और लाश को रातभर रखने से परेशानी होगी। वे अपने अनुसार अंतिम संस्कार कर दें। बेटे से सहमति मिलने के बाद महिलाओं ने चंदा किया और अंतिम संस्कार किया। क्षेत्र में महिलाओं का यह नेक काम चर्चा का विषय रहा।

महिलाओं ने गड्‌ढा खुदवाने से लेकर अंतिम संस्कार तक किया

भुरवाटोला से चौथना मुक्तिधाम तक महिलाएं गई। मजदूर को मजदूरी देकर लाश को दफनाने के लिए गड्‌ढा खुदवाया और रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार प्रगति महिला संगठन की महिलाओं ने किया। बेसहारा बुजुर्ग की मदद कर महिलाएं मिसाल बनी और इंसानियत को बरकरार रखा।

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