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27 यंगस्टर्स बने 1 दिन के कलेक्टर, किसी ने कहा-काम ढीला तो कोई बोला- इंजीनियरिंग ही ठीक

नया प्रयोग के तहत 27 युवा एक दिन के लिए 27 जिलों के शैडो कलेक्टर बने।

Danik Bhaskar

Jan 10, 2018, 07:13 AM IST
पूरे दिन कलेक्टर के साथ रहने क पूरे दिन कलेक्टर के साथ रहने क

रायपुर. सरकार चलती कैसे है, कलेक्टर किस तरह कामकाज करते हैं, युवाओं को यह समझाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने नया प्रयोग किया। 27 युवा मंगलवार को एक दिन के लिए 27 जिलों के शैडो कलेक्टर बने। इनका चयन यूथ स्पार्क स्पर्धा के तहत 519 कॉलेजों के 5 लाख युवाओं में से किया गया। बीजेपी सरकार के 14 साल पूरे होने पर इस स्पर्धा को शुरू किया गया है। रायपुर से लेकर नक्सल प्रभावित बस्तर तक के युवाओं को कलेक्टरों ने अपनी कुर्सियों पर बिठाया, कामकाज समझाया और बताया कि वे किस तरह जिला चलाते हैं। पूरे दिन के अनुभव के बाद एक छात्र ने कहा कि प्रशासन ढीला है, तो एक छात्रा बोलीं कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई ही ठीक है। बच्चों ने 3 मिनट का वीडियो बनाया है, जिसके आधार पर 3 युवाओं को 12 जनवरी को सम्मानित किया जाएगा।

काम समझीं, बोलीं- नहीं बनूंगी कलेक्टर
सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहीं सरगुजा की दीप्ति दोस्त की स्कूटी से जगदलपुर कलेक्टोरेट पहुंचीं। कलेक्टर धनंजय देवांगन के साथ राज्य अतिथि महामंडेलश्वर स्वामी अवधेशानंद को रिसीव करने एयरपोर्ट गईं। फाइलें देखीं। क्या वह कलेक्टर बनना चाहती हैं, इसपर बोलीं-‘मैं इंजीनियर बनना चाहती हूं, उसी से संतुष्ट हूं।’

कहा-तंत्र ढीला, कलेक्टर बना तो जागरुकता अभियान में क्रांति लाएंगे

संदीप द्विवेदी के लिए कांकेर कलेक्टर टामन सिंह सोनवानी वाहन भेजने वाले थे, पर समस्या को समझने के लिए वो साइकिल से पहुंचे। पूरे दिन कलेक्टर के साथ रहने के बाद संदीप बोले, ‘प्रशासन तंत्र ढीला है। कलेक्टर बने तो जागरुकता अभियान को क्रांतिकारी रूप से चलाएंगे।’

कहा-अफसर दायरे में काम करते हैं, स्टार्टअप शुरू कर नौकरियां दूंगा

प्रशांत जंघेल रायपुर से ट्रेन के जनरल कोच में जांजगीर-चांपा पहुंचे। ऑटो से किराया टेकर कलेक्टोरेट गए। बैठक में शामिल हुए। बीकाॅम प्रथम वर्ष के छात्र प्रशांत ने कहा, ‘मैं सेवा करना चाहता हूं, लेकिन अफसर बनकर नहीं। अफसर एक दायरे में काम करते हैं, मैं स्टार्टअप शुरू कर नौकरियां दूंगा।’

बिलासपुर में किसी ने रिसीव नहीं किया

चेतना देवांगन का अनुभव अलग रहा। बिलासपुर कलेक्टोरेट में उन्हें किसी ने रिसीव नहीं किया। टीएल मीटिंग में कलेक्टर के बगल वाली बड़ी कुर्सी में बैठने लगीं तो रोक दिया गया। दूसरी कुर्सी में बैठना पड़ा। मीटिंग के बाद कलेक्टर ने उन्हें कामकाज समझाया।

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