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पर्व हमारे अंतर्मन को जागृति का संदेश देते हैं: विजयराज

खरियार रोड| होली चातुर्मास के निमित्त यहां जैन मंदिर में आहूत प्रवचन माला के सप्तम दिवस जैन आचार्य विजयराज मसा ने...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:05 AM IST
खरियार रोड| होली चातुर्मास के निमित्त यहां जैन मंदिर में आहूत प्रवचन माला के सप्तम दिवस जैन आचार्य विजयराज मसा ने भारतीय समाज में पर्वों की महत्ता की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति पर्व प्रधान है और पर्व मानव-मन के उल्लास को प्रकट करते हैं। पर्व की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि पर्व लौकिक व लोकोत्तर होते हैं। ये सभी पर्व एक नया और जागृति का संदेश लेकर आते हैं। मानव-मन जब भी सुसुप्त हो जाता है, उसे उल्लासित व जागृत करने का कार्य ये पर्व करते हैं।

मनमुटाव, वैमनस्य दूर करके ये पर्व हमारी अध्यात्मिक शक्तियों को जागृत करते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि हमारे यहां पर्व आमोद-प्रमोद के साथ खुशियां संजोने का अवसर तो है ही, साथ ही अपनी विशेषताओं के साथ ये पर्व हमारे लिए चिंतन-मनन का अवसर भी है। परस्पर मनमुटाव, वैमनस्य दूर करके ये पर्व हमारी अध्यात्मिक शक्तियों को जागृत करते हैं।

जैसा कर्म करेंगे, वैसी वाणी का उच्चारण करेंगे

आचार्यश्री से पहले युगप्रभजी मसा ने अपने विचार रखते हुए समय को सार्थक बनाने, समय पर पुण्य कार्य करने तथा भूत-भविष्य की चिंता न कर वर्तमान को संवारने पर बल दिया। उन्होंने कहा जैसा कर्म करेंगे, जैसी वाणी का उच्चारण करेंगे, हमें जीवन में वैसा परिणाम मिलेगा। इसलिए पुरूषार्थी बनकर अच्छे विचार व सत्कार्यों में हमें प्रवृत होना चाहिए।