न्यूज़

  • Hindi News
  • Chhattisgarh News
  • Raipur News
  • News
  • अस्पतालों में भेजी ऐसी दवा, खाते ही खुजली शरीर पर हुए लाल चकते, निकली अमानक
--Advertisement--

अस्पतालों में भेजी ऐसी दवा, खाते ही खुजली शरीर पर हुए लाल चकते, निकली अमानक

शहर के दवा बाजार में अमानक और निम्न स्तर की दवा बिकने के बीच सरकारी अस्पताल में भी ऐसी ही दवाओं की सप्लाई का खुलासा...

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2018, 02:15 AM IST
अस्पतालों में भेजी ऐसी दवा, खाते ही खुजली शरीर पर हुए लाल चकते, निकली अमानक
शहर के दवा बाजार में अमानक और निम्न स्तर की दवा बिकने के बीच सरकारी अस्पताल में भी ऐसी ही दवाओं की सप्लाई का खुलासा हुआ है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्वेिसेस काॅर्पोरेशन ने जिला अस्पतालों में ऐसी दर्द निवारक डायक्लोफेनेक टेबलेट सप्लाई कर दी जो मरीजों को देते ही पेट में जलन के अलावा शरीर में तेज खुजली होने लगती थी। मरीजों के शरीर पर लाल रंग के चकते भी हो रहे थे। डाॅक्टरों की शिकायत के बाद आनन-फानन में दवाओं का पूरा स्टॉक अस्पतालों से मंगवाकर सील किया गया। लेबोरेटरी जांच में खुलासा हो गया कि दवाएं निम्न स्तर की हैं। इस वजह से मरीजों को साइड इफेक्ट हो रहा था।

मेडिकल काॅर्पोरेशन की दवा अमानक या सब स्टैंडर्ड निकलने से उनकी दवा खरीदी का पूरा सिस्टम ही सवालों के दायरे में आ गया है। काॅर्पोरेशन की ओर से हर साल दवाओं की टेस्टिंग में ही 40-40 लाख खर्च किए जाते हैं। जिला अस्पतालों में जो दवा मरीजों को साइड इफेक्ट कर रही थी, उसकी गुणवत्ता की भी जांच करवायी गई थी। काॅर्पोरेशन के अफसरों की ओर से दावा किया जाता है कि सभी दवाओं की लेबारेटरी जांच के बाद ही उसे सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए सप्लाई की जाती है। काॅर्पोरेशन की ओर से ये दावा भी किया जाता है कि वे हैदराबाद और कोलकाता की उच्च सुविधा वाली लेबोरेटरी में जांच करवाते हैं। ऐसी दशा में वहां दवाओं की गुणवत्ता की जांच शत-प्रतिशत होती है। मरीजों को साइड इफेक्ट होने के बाद दवाओं का सैंपल लेकर जांच यहां कालीबाड़ी स्थित सरकारी लेबोरेटरी में करवायी गई। उसमें अमानक या मापदंडों के अनुसार नहीं होने का खुलासा हुआ। इससे काॅर्पोरेशन के दावों की हकीकत सामने अा गई।

कंपनियों के खिलाफ होगी कार्रवाई


खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की जांच में हुआ खुलासा

नसबंदी में उपयोग की गई दवाओं को क्लीनचिट

पेंडारी नसबंदी कांड के बाद प्रतिबंधित की गई छह दवाओं को नेशनल ड्रग लेबोरेटरी कोलकाता से क्लीनचिट मिलने के बाद सितंबर 2015 में प्रतिबंध हटा दिया गया था। इन दवाओं व केमिकल का सैंपल सब स्टैंडर्ड होने की आशंका के कारण सीजीएमएससी ने जांच के लिए भेजे थे। इनमें एटोप्राइन सल्फेट इंजेकशन, स्प्रिट, पायोडिन-आयोडिन सोल्यूशन, पेंटाजोसिन लेक्टेड इंजेक्शन, डाइजापॉम इंजेक्शन व इपेनफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड शामिल था। हालांकि महावर कंपनी ने स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों के खिलाफ हाईकोर्ट में परिवाद दायर कर रखा है। इस मामले की सुनवाई चल रही है।

11 और दवाओं के सैंपल फेल

ड्रग विभाग की जांच में 11 और दवाओं के सैंपल फेल हुए और उन दवाओं के अमानक होने की पुष्टि हुई है। इनमें दर्द निवारक डायक्लोफेनेक, सिट्राजिन, जिंक व कैल्शियम की टेबलेट शामिल हैं। ड्रग विभाग ने 2016 से जनवरी 2017 तक कुल 65 दवाओं का सैंपल लिया था। सभी सैंपल कालीबाड़ी स्थित लैब में भेजकर वहां जांच करवायी गई। जांच में फेल दर्द निवारक डायक्लोफेनेक की सप्लाई कार्पोरेशन ने कोरबा के अलावा धमतरी, बालोद व महासमुंद समेत दूसरे जिला अस्पतालाें में की थी। इस टेबलेट के अलावा दवा बाजार से लिए गए सैंपल में सिट्रीजिन में भी निर्धारित मापदंड से घटक कम पाए गए। यही हाल कैल्शियम का निकला। रायपुर से कोरिया भेजी गई जिंक टेबलेट भी अमानक निकली। सप्लाई एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आईवी फ्लूड के लिए सैंपल दस दिन में आएगी रिपोर्ट

ड्रग विभाग ने हाल ही में राजधानी के विभिन्न मेडिकल स्टोर से आईवी फ्लूड एनएस व डीएनएस का सैंपल लिया है। इसे जांच के लिए लैब भेज दिया गया है। आईवी फ्लूड का उपयोग आमतौर पर ऐसे सभी मरीजों के लिए किया जाता है, जो कमजोरी महसूस करते हैं। ड्रग विभाग ने राजधानी के शंकरनगर, समता कॉलोनी, गुढ़ियारी, सुंदरनगर व अन्य क्षेत्रों से सैंपल लिया है। असिस्टेंट कमिश्नर साहू ने बताया कि इसकी जांच की जा रही है। रिपोर्ट 10 दिन में आने की संभावना है। पिछले साल बिना लेवल की शीशी वाली केमिकल ऑक्सीटोसिन था। जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है। एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

अमानक दवा

अमानक दवा वह होती है, जो असर कम करती है। उदाहरण के लिए अगर पैरासिटामॉल टेबलेट 500 मिग्रा का है और इसमें इसकी मात्रा 500 मिग्रा से कम निकली तो यह अमानक कहा जाएगा। ऐसी दवाओं का असर मरीज पर कम होता है, लेकिन नुकसान नहीं पहुंचाता। अमानक दवाआें के सेवन से कई बार इसी तरह की एलर्जी आदि से मरीज पीड़ित हो सकता है।

नकली दवा

नकली दवाइयों में मुख्य रूप से आरा मशीन पर निकलने वाले लकड़ी के बुरादा, चाक पावडर, लैक्टिक पावडर, राख होता है। यह मरीजों पर असर ही नहीं करता और बीमारी बढ़ सकती है। पहले टेबलेट में मेथी, अजवाइन, हल्दी आदि से भी नकली दवाई बनाई जाती थी। यह असली दिखे, इसके लिए विभिन्न तरह के केमिकल का उपयोग किया जाता है। केमिकल का उपयोग किया जाता है।

(डॉ. सूरज अग्रवाल, रिटायर्ड एचओडी फार्माकोलॉजी मेडिकल कॉलेज रायपुर के अनुसार)

पेंडारी कांड के बाद छत्तीसगढ़ में सिर्फ एक दवा कंपनी बची

छग में दवा बनाने वाली एक कंपनी बची है। पेंडारी नसबंदी कांड के बाद महावर फार्मा में ताला लटका हुआ है। प्रदेश में तीन कंपनियां है, जो केवल केमिकल बनाने का काम करती हैं। नसबंदी कांड के बाद ये कंपनियां बंद होने की कगार पर हैं। प्रदेश में उत्तराखंड, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश की कंपनियों से दवा सप्लाई हो रही है। सीजीएमएससी भी इन्हीं राज्यों से दवा मंगवा रही है। कहां से कौन सी दवा मंगवानी है ये टेंडर के माध्यम से तय होता है। नसबंदी कांड के बाद दवा फैक्ट्री संचालकों में दहशत की स्थिति रही। यही कारण है कि लाइसेंस सरेंडर कर दिया गया। सिलतरा में एक कंपनी है, जाे चल रही है।

X
अस्पतालों में भेजी ऐसी दवा, खाते ही खुजली शरीर पर हुए लाल चकते, निकली अमानक
Click to listen..