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300 करोड़ के 25 से ज्यादा प्रोजेक्ट शुरू करने 5 साल में नहीं ढूंढ़ पाए जमीन और एजेंसी, अब 500 करोड़ करने होंगे खर्च

शहर के लोगों को सुविधा देने के नाम पर नगर निगम ने 25 से ज्यादा प्रोजेक्ट 10 साल में बनाए हैं। इन प्रोजेक्ट की कीमत 300...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:45 AM IST

300 करोड़ के 25 से ज्यादा प्रोजेक्ट शुरू करने 5 साल में नहीं ढूंढ़ पाए जमीन और एजेंसी, अब 500 करोड़ करने होंगे खर्च
शहर के लोगों को सुविधा देने के नाम पर नगर निगम ने 25 से ज्यादा प्रोजेक्ट 10 साल में बनाए हैं। इन प्रोजेक्ट की कीमत 300 करोड़ से ज्यादा है। वहीं 70 फीसदी प्रोजेक्ट के सर्वे और टेंडर में पांच साल बीत जाने के बाद भी न टेंडर किया जा सका, न ही जगह चिंहाकित करने के लिए सर्वे किया गया। इसलिए अब इन्हीं प्रोजेक्ट पर 200 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।

city concern

डीबी स्टार. रायपुर

सड़क, पानी, पार्क समेत तमाम सुविधाओं के लिए बड़ी योजनाओं नगर निगम ने बनाई है। इन्हीं प्रोजेक्ट की डीबी स्टार की टीम ने पड़ताल की। इस दौरान खुलासा हुआ कि सड़क चौड़ीकरण करने से लेकर पानी टंकी बनाने के लिए योजना बनाई गई। इसी तरह 25 से ज्यादा बड़े प्रोजेक्ट बनाए गए, लेकिन 70 फीसदी से ज्यादा प्रोजेक्ट का सर्वे कार्य अधूरा है। वहीं जिन प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए स्वीकृति मिली है, उन योजनाओं को शुरु करने के लिए टेंडर भी नहीं किया गया है। ऐसे 300 करोड़ के प्रोजेक्ट जो शहर के लोगों को पांच साल तक नहीं मिल पाए है। लिहाजा अब इन योजनाओं काे धरातल पर लाने में 200 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। यानि सभी सामानों के रेट में बढ़ोत्तरी हाेने निगम को नुकसान होगा।

8 साल से प्रोजेक्ट नहीं हुआ निर्माण

दरअसल जोनवार भी निर्माण के लिए प्रोजेक्ट बनाया गया है। वहीं जनप्रतिनिधि भी प्रोजेक्ट बनाकर देते है। ऐसे में उन प्रस्तावों को मुहर लगाने के बजाय फाइल को डंप कर दिया जाता है, जबकि निगम के पास इन निर्माण कार्याें के लिए बजट भी है। फिर भी निर्माण शुरू नहीं हो पाए।

ज्यादातर योजनाओं की फाइल जिम्मेदार दबा बैठे, जो पब्लिक से जुड़ी हुई है

कई प्रोजेक्ट के 8 साल बाद भी न टेंडर किया जा सका, न ही सर्वे पूरा हुआ

बड़े प्रोजेक्ट जो दो से दस साल में शुरू नहीं कर पाए जिम्मेदार

तात्यापारा से लाखेनगर सड़क चौड़ीकरण

55 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट

01 किलोमीटर से ज्यादा दूरी

10 करोड़ बढ़ी लागत

ये होना था : सड़क चौड़ीकरण के लिए 55 करोड़ रुपए की योजना बनीं थी। ये प्रोजेक्ट 8 साल पहले बनाया गया है।

इसलिए अटका : चौड़ीकरण के लिए घर तोड़े जाएंगे। लोगों को मुआवजा देना होगा।

एम्यूजयूमेंट पार्क

6 पानी टंकी की योजना

02 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट

06 स्थानों पर बनेगी टंकी

02 करोड़ रुपए बढ़ी लागत

ये होना था : 6 नई पानी टंकियों के निर्माण की योजना है। इससे 2 लाख से अधिक लोगों को पानी मिलेगा।

क्यों अटकी : जिन जगहों पर पानी टंकी बनाया जाएगा, वहांं पर पाइपलाइन ही नहीं।

100 करोड़ प्रोजेक्ट 70 एकड़ में बनेगा 05 करोड़ बढ़ी लागत

ये होना था : विधानसभा रोड में सड्‌डू के पास एम्यूजयूमेंट पार्क बनाने का प्रोजेक्ट बनाया। दो साल पहले यह प्रोजेक्ट बना। निगम इसमें आधा खर्च स्वयं वहन करेगा।

मार्केट में शौचालय

01 करोड़ का प्रोजेक्ट

23 स्थानों में शौचालय निर्माण

50 लाख रुपए लागत बढ़ी

ये होना था : प्रमुख बाजारों में शौचालय निर्माण की योजना 2015-16 के बजट में थी।

क्यों अटकी : सिर्फ 5 स्थानों के लिए शौचालय निर्माण कराया जा सका है। बाकी के लिए सर्वे नहीं किया गया है।

हाईजनिक मार्केट

10 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट

02 स्थानों पर होगा निर्माण

05 करोड़ रुपए बढ़ी लागत

ये होना था : शास्त्री मार्केट में 10 करोड़ रुपए का हाईजनिक मार्केट बनाया जाना है।

क्यों अटकी : किसी भी जोन में इस प्रोजेक्ट के लिए सर्वे नहीं कराया है। सिर्फ ब्लू प्रिंट तैयार किया गया है।

4 से ज्यादा गोकुल नगर

25 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट

01 एकड़ से ज्यादा में बनेगा

15 करोड़ रुपए लागत बढ़ी

ये होना था : शहर के चारों तरफ गोकुल नगर बनाने 17 साल में 14 बार प्रोजेक्ट बनाया गया। तीन और भी बनाना है।

क्यों अटकी : इसके लिए निगम ने जमीन का निर्धारण नहीं कर पाया है।

क्यांे अटकी : निगम ने इसके लिए ले आउट डिजाइन ही नहीं बनाया है। एक्सपर्ट राय भी जिम्मेदार नहीं ले पाए है। दो साल पहले फाइल बनी फाइल अब भी निगम में दबी हुई है।

सॉलिड वेस्ट मैंनेजमेंट

125 करोड़ का प्रोजेक्ट

70 वार्डाें में होना है निर्माण

10 करोड़ से लागत बढ़ी

ये होना था : सभी वॉर्डाें में कचरे के लिए मैंनेजमेंट प्लांट बनाया जाना है। कचरे से खाद बनाने 150 मशीनें लगानी हंै।

क्यों अटकी : किसी भी जोन के लिए मशीन नहीं खरीदी गई है। न ही टेंडर किया गया है।

प्रोजेक्ट अटके होने की ये हैं बड़ी वजहें

कुछ प्रोजेक्ट पर एक्सपर्ट की भी राय तीन-तीन साल से नहीं ले पाए है।

बड़े प्रोजेक्ट जो वार्डाें में शुरु किया जाना है, उसके लिए सर्वे नहीं हुआ है।

बजट की स्वीकृति मिलने के बाद भी 30% निर्माण के लिए टेंडर नहीं हुआ।

10 से ज्यादा योजनाओं की फाइल अफसरों के केबिन में ही धूल खा रही है।

सड़क निर्माण समेत कई योजनाओं के लिए मुआवजा नहीं दिया जा सका है।

ये कार्य भी धरातल पर नहीं आए है...

मनोरंजन के लिए वाटर स्पोटर्स

ओपन थियेटर

दो वार्डाें में सेल्फी जोन

रोड डॉक्टर मशीन की खरीदी

कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल

सभी कार्यों को जल्द शुरु किया जाएगा

रजत बंसल, आयुक्त, नगर निगम,रायपुर

जो प्रस्ताव जो अभी रुके हुए हैं,उन सभी में अभी पूरा काम नहीं हो पाया है कि उसे शुरु किया जा सके। सभी प्रोजेक्टों पर अभी काम चल रहा है। काम पूरा होते ही इन सबको शुरु किया जाएगा। लागत तो बढ़ेगी ही ।

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