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20 महिलाएं ग्रुप बनाकर बच्चों को दे रहीं कम्प्यूटर ट्रेनिंग, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने सिखाई सिलाई, कुपोषित बच्चों को पोषित करने न्यूट्रिशन पावडर भी बनाया

राजधानी की अर्पण सेवा संस्था महिलाओं और बच्चों के लिए सबसे बड़ी ताकत बन गई है। संस्था तीन साल के भीतर एक हजार बच्चों...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:45 AM IST

राजधानी की अर्पण सेवा संस्था महिलाओं और बच्चों के लिए सबसे बड़ी ताकत बन गई है। संस्था तीन साल के भीतर एक हजार बच्चों को कम्प्यूटर ट्रेनिंग दे चुकी है। इतना ही नहीं, 100 से ज्यादा महिलाओं और युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई-कड़ाई सीखा चुकी है। अब कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने का बीढ़ा उठाया है। ज्यादातर बच्चों के वजन में एक दिन में ही बढ़ोत्तरी हुई है। एक किलो तक बच्चों के वजन बढ़ गए है। ग्रुप में 20 महिलाएं है, जो हर माह 500-500 रुपए संस्था में दान करती है। इसी राशि से बच्चों और महिलाओं को ट्रेंड किया जा रहा है।

शहर से गांव तक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने काम कर रहा है ग्रुप

साधना दुग्गड़, अध्यक्ष, अर्पण सेवा संस्था

शहर की गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई सीखाने महिलाओं का ग्रुप बनाया गया है। 20 महिलाओं का ग्रुप एक हजार बच्चों को कम्प्यूटर ट्रेनिंग दे चुकी है। महिलाओं को सिलाई का काम सिखाया जा रहा है। कुपोषित बच्चों को भी ठीक करने के लिए सेरेलेक पाउडर दिया जा रहा है।

ग्रुप में सीनियर सिटीजन भी निभा रहीं भागीदारी

इस ग्रुप में सीनियर सिटीजन भी हैं, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने काम कर रही हैं। ग्रुप की महिलाएं हर महीने 500-500 रुपए जोड़ती हैं। इस फंड से सिलाई मशीन, कम्प्यूटर खरीदी के साथ बच्चों की फीस जमा की जाती है। ग्रुप की महिलाएं जरूरतमंदों की मदद करने इसी फंड से सामान खरीदती हैं और लोगों को बांटती हैं।

एक हजार बच्चों को निशुल्क ट्रेनिंग

ग्रुप की महिलाओं ने सबसे पहले बच्चों को हाईटेक बनाने और कम्प्यूटर ज्ञान देने की दिशा में काम किया। तीन साल में एक हजार से ज्यादा बच्चों को कम्प्यूटर ट्रेनिंग दी। रविनगर में संस्था ने दफ्तर बनाया है।

कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने बनाया फूड

संस्था ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के अलावा कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने का कार्य किया है। ग्रुप की महिलाओं ने आंगनबाड़ियों में पहुंचकर 100 बच्चों को चुना, जो कुपोषित है। अब उन कुपोषित बच्चों के लिए खुद घर पर ही न्यूट्रिशन पाउडर बना रही हैं। ग्रुप की महिलाएं अब तक दो क्विंटल से ज्यादा न्यूट्रिशन पाउडर बनाने का काम कर चुकी हैं।

गरीब बच्चों की जमा कर रही फीस

पहले चरण में 6 गरीब बच्चों को महिलाएं अपने खर्चें पर ही पढ़ा रही है। उनके पुस्तक-कॉपी खरीदने का खर्चें भी ग्रुप की महिलाएं ही देती है। इसी तरह कई और बच्चों को पहले भी स्कूल में अपने खर्चें पर पढ़ा चुकी है।

ट्रेनिंग देने गांवों में लगाई सिलाई मशीनें

100 से ज्यादा महिलाओं व युवतियों को सिलाईक ी ट्रेनिंग दी। अब गांवों में ट्रेनिंग देने सिलाई मशीनें लगवाई गई हैं। गोतियारडीह गांव में अभी 24 महिलाएं सिलाई सीख रही हंै। वहीं सोनपैरी गांव में 40 से ज्यादा मशीनें लगवाई गई हैं।

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