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शहर के इंडस्ट्रियल एरिया में लगातार लूट घटना के बाद भी नहीं लगा रहे हैं कैमरे

राजधानी के साथ प्रदेश से सबसे बड़े सिलतरा इंडस्ट्रियल एरिया में पिछले डेढ़ महीने के दौरान दो लूट के सामने आ चुके...

Danik Bhaskar

Apr 02, 2018, 03:00 AM IST
राजधानी के साथ प्रदेश से सबसे बड़े सिलतरा इंडस्ट्रियल एरिया में पिछले डेढ़ महीने के दौरान दो लूट के सामने आ चुके हैं। इस एरिया में लगातार चोरी की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। यहां हो रहे अपराध को रोकने और आरोपियों को पकड़ने को लेकर पुलिस भी नाकाम हो रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण पुलिस के चेताने और समझाईश के बाद भी सिलतरा-उरला इंडस्ट्रियल एरिया के अधिकतर जगह सीसीटीवी कैमरा नहीं लगे हैं। इस कारण इनवेस्टीगेशन में मदद नहीं मिल पा रही है। राजधानी में पिछले एक-डेढ़ साल से मिशन सिक्योर सिटी के तहत चौक-चौराहों और कॉलोनियों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए जा रहे हैं, जो अभियान अब धीमा पड़ रहा है। पुलिस के आलाधिकारी अब कह रहे हैं कि लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद भी इंडस्ट्रियल एरिया में कैमरे नहीं लगे हैं। इसे लेकर यहां के कारोबारियों से दोबारा बात की जाएगी, उन्हें सुरक्षा और पुलिस की मदद से जुड़े अभियान को लेकर समझाईश देंगे।

शहर में पिछले कुछ दिनों के अंदर ही तीन लूट हुई, जिसमें सिलतरा में ही दो घटनाएं हुई थी। तीनों मामलों में पुलिस को कोई क्लू नहीं मिल पाया है, जबकि एक मामले में फुटेज भी है, लेकिन लुटेरों की पहचान नहीं हो पाई। 30 मार्च को ही सिलतरा में बीच रास्ते में रोककर पेटी कांट्रेक्टर नरेंद्र सिंह से डेढ़ लाख लूट लिए गए थे। जब तक पुलिस घटना तक पहुंचती लुटेरे भाग गए। घटना के 72 घंटे बाद भी पुलिस को उनका कोई क्लू नहीं मिल पाया है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि जिस जगह पर घटना हुई थी, वहां लाइट भी नहीं लगी है। इस एरिया में कोई सीसीटीवी कैमरे में नहीं लगाए गए हैं, जबकि आसपास कई फैक्टरी हैं। वहां बहुत अंधेरा है। उस रास्ते में कैमरे तक नहीं लगे हैं। जबकि कई सारे फैक्ट्रियां है। अब पुलिस जांच के नाम पर आसपास के गांव और बस्तियों में पड़ताल कर रही है। बाहर से आने-जाने वालों की सूची जांच रही है। पुलिस संदेह के आधार पर दर्जन लोगों को हिरासत में लिया है। कुछ फैक्ट्रियों में जो कैमरे लगे भी हैं, वे अंदर की तरफ हैं। जबकि बाहरी हिस्से और रोड की तरफ कुछ कैमरे लगाए जाने थे।

रोड- बाहरी एरिया में नहीं लगाए कैमरे, फैक्ट्रियां भी बंद

राजधानी पुलिस के मिशन सिक्योर सिटी अभियान से तीन हजार से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगे चुके हैं। शहर के कारोबारी से लेकर निजी सोसाइटी वालों को भी कैमरा लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके बाद भी अब तक पुलिस औद्योगिक क्षेत्र में कैमरे नहीं लगा पाई। जबकि ज्यादातर फैक्ट्रियों में दूसरे राज्य से आए मजदूर काम कर रहे है। इसके बाद भी पुलिस के पास उनका रिकॉर्ड नहीं है। इसके साथ फैक्ट्रियों में रोजाना लेन-देन के लिए छोटे व्यवसायी भी नगद लेकर आते हैं। यहां तक पुलिस ने उद्योगपतियों की बैठकर लेकर कैमरा लगाने के निर्देश ही दिए थे। डेढ़ साल बाद भी वहां कैमरे नहीं लग पाए है। पुलिस जांच में इसका खुलासा हुआ है कि जिन फैक्ट्रियों में लगे अधिकतर कैमरे खराब पड़े हैं।

राजधानी इंडस्ट्रियल एरिया में छोटी-बड़ी 500 फैक्ट्रियां हैं

भागने के कई रास्ते, कहीं नहीं है निगरानी

पुलिस के अनुसार इंडस्ट्रियल एरिया में लूट की जितनी भी वारदात हुई है, वह आरोपियोे ने पूरी तरह से रेकी करने के बाद की। वे यहां के रास्तों और एरिया में वाकिफ रहे होंगे। औद्योगिक क्षेत्र में भागने के कई रास्ते हैं। सिलतरा, उरला, धरसींवा और बेरला के लिए अंदर से रास्ते है। इसका फायदा लुटेरे उठाते है। इन रास्तों में भी किसी तरह की निगरानी नहीं होती है। इंडस्ट्रियल एरिया में घुसने के जो रास्ते हैं, वहां भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं।

कैमरों से निगरानी जरूरी


डेढ़ महीने पहले ही फैक्ट्री में घुसकर लूट, गार्ड को गोली मारी

डेढ़ महीना पहले सिलतरा स्थित एक फैक्ट्री में घुसकर लूट हुई थी। दो युवक फैक्ट्री में घुसे और कैशियर से बैग छीनकर ले गए थे। भागते समय सुरक्षा गार्ड को गोली मार दी। फैक्ट्री के अंदर लगे कैमरे में लुटेरों का फुटेज मिला था, लेकिन बाहर लगे कैमरे के खराब होने के कारण बाइक का नंबर नहीं मिल पाया। बीते शुक्रवार को पेटी कांट्रेक्टर से हुई डकैती में भी पुलिस को कुछ नहीं मिल पाया है। आसपास या उसे रास्ते में कैमरा भी नहीं लगा है।

लगाने के बाद अधिकतर हो गए बंद, नहीं कराते मेंटेनेंस

पुलिस ने शहर और कॉलोनियों के भीतर भी सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं। घटना के बाद जब उन एरिया में फुटेज के लिए कैमरों की जांच की गई तो कई बंद मिले। जांच में आया है कि अधिकतर जगह कैमरे तो लगा लिए जाते हैं, लेकिन उसका मेंटेनेंस नहीं कराया जाता है। सरकारी दफ्तरों के साथ दुकानों और कर्मशियल कॉम्प्लेक्स के बाहरी हिस्सों में लगे कैमरे भी बंद पड़े हुए है।

पुलिस का अभियान हुआ धीमा अब नहीं लग रहे हैं कैमरे

पिछले डेढ़ साल पुलिस शहर को सिक्योर करने के लिए कैमरा लगवा रही थी, जो अब ठंड बस्ते में चला गया है। शहर के इंट्री पाइंट में हाई रेंज वाले कैमरे लगाने का प्रस्ताव बनाया था। वह भी नहीं लगा है। यहां तक शहर के आउटर में तो अभियान फेल हो गया। वहां पर पुलिस कैमरे नहीं लगा पाई।

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