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सकरी में एक बच्ची क

माता-पिता ने कहा-बेटी को कैंसर है, अब पढ़ नहीं पाएगी; स्कूल परिवार ने कहा-इलाज और पढ़ाई का खर्च हम उठाएंगे, 9वीं की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:10 AM IST

सकरी में एक बच्ची क
माता-पिता ने कहा-बेटी को कैंसर है, अब पढ़ नहीं पाएगी; स्कूल परिवार ने कहा-इलाज और पढ़ाई का खर्च हम उठाएंगे, 9वीं की परीक्षा में हुई शामिल


सकरी में एक बच्ची काफी दिनों तक अपने स्कूल नहीं आई। टीचर ने पूछताछ की और तो पता चला उसे कैंसर है। इलाज न मिलने से उसकी स्थिति बिगड़ती जा रही है। बस, यहीं से ऐसी मुहिम छिड़ी जिसका उद्देश्य था बच्ची के जीवन में फिर से खुशियां लौटाना। बच्ची के गरीब पिता ने स्कूलवालों को बताया कि वह अब आगे नहीं पढ़ पाएगी। स्कूल परिवार ने इसी क्षण तय कर लिया कि वे न सिर्फ बच्ची के इलाज का खर्च उठाएंगे, बल्कि दूसरों से भी मदद की अपील करेंगे। नतीजा, शिक्षा विभाग और अब सरकार ने भी बच्ची की मदद की। इस साल वह वार्षिक परीक्षा में भी शामिल हुई।

यह कहानी है सकरी के स्कूल और यहां पढ़ने वाली लल्ली यादव की। नवंबर 2017 में यहां पता चला कि उसके पेट में कैंसर है। सरकंडा के शिवम् नर्सिंग होम में बीमारी की पहचान होने के बाद उसे रायपुर ले जाने की सलाह दी गई। पिता शिवकुमार गरीब मजदूर हैं। बच्ची के इलाज के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। इस वजह से वे जड़ी-बूटियों से लल्ली का इलाज करा रहे थे। सही इलाज नहीं होने के कारण लल्ली का स्कूल आना बंद हो गया। लल्ली की साइंस टीचर निलीता तिवारी ने पूछताछ की तो पता चला कि छात्रा को कैंसर है और उसकी स्थिति खराब होती जा रही है। शेष|पेज 7





निलीता ने प्राचार्य रजिया परवीन को पूरी बात बताई और स्टाफ मेंबर्स के साथ भी चर्चा की। तय हुआ कि लल्ली के लिए उनसे जो बन पड़ेगा, वे करेंगे। बस यहीं से लल्ली का जीवन बचाने की कोशिशें शुरू हो गईं। स्कूल प्रबंधन ने लल्ली के पिता शिवकुमार यादव को स्कूल बुलाया आैर शासकीय गर्ल्स हाईस्कूल सकरी के नाम से पत्र लिखवाया। पत्र में बच्ची के इलाज के लिए आर्थिक सहायता मांगी गई। स्कूल प्रबंधन ने उसे डीईओ बिलासपुर को भेजकर बच्ची की मदद की अपील की। प्राचार्य और स्टाफ मेंबर ने अपने स्तर पर एक लाख रुपए इकट्ठे कर उसे दिए। सहायक संचालक विधिक संदीप चोपड़े की कोशिशों से 9वीं की छात्रा को रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट रायपुर मेकाहारा भेजा। फिलहाल लल्ली का कीमोथेरेपी चल रही है और वह पहले से बेहतर स्थिति में है। इस बीच संजीवनी कोष से लल्ली के इलाज के लिए 3.50 लाख रुपए भी सरकार ने दिए हैं। उसके इलाज के लिए स्कूल के बच्चों ने अपने जेबखर्च से 10 हजार रुपए इकट्ठे कर लल्ली को दिए। इस साल लल्ली अपने उन्हीं साथियों के साथ परीक्षा में शामिल हुई।

स्टाफ ने इकट्ठे किए एक लाख रुपए, बच्चों ने जेब खर्च से दिए 10 हजार, अभी रायपुर के मेकाहारा में चल रही है कीमोथैरेपी

परीक्षा देती लल्ली।

हम चाहते हैं, लल्ली हमेशा मुस्कराती रहे

जब टीचर निलीता तिवारी मेरे पास आईं और कहा कि बच्ची का मामला हमें हेंडल करना है तो मैं तैयार हो गई। सामूहिक सहयोग से ही उसका इलाज संभव हो पाया। हम सबने प्लानिंग और उसे अमल में लाने के लिए खुद को भी इसके लिए तैयार किया। आगे भी जो बन पड़ेगा, हम अपनी छात्रा के लिए जरूर करेंगे। हम सब चाहते हैं, लल्ली हमेशा मुस्कुराती रहे।'' - रजिया परवीन, प्राचार्य, शा. गर्ल्स हाईस्कूल सकरी

इलाज के लिए 3.5 लाख और चाहिए

डॉक्टरों के मुताबिक, लल्ली के इलाज का अनुमानित खर्च करीब 7 लाख रुपए है। सबसे पहले खर्च भरपाई की शुरुआत स्कूल प्रबंधन ने की। बच्चों ने भी सहयोग किया। संजीवनी कोष से 3.50 लाख रुपए परिवारवालों को मिल चुके हैं। इससे लल्ली के इलाज की आगे की राह आसान हो गई।

स्कूल की छात्राएं भी आगे आईं

लल्ली के साथ पढ़ने वाली छात्राओं को जब यह पता चला कि उनके टीचर उसके सहयोग के लिए राशि दे रहे हैं, तब वे भी खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने सभी कक्षाओं की छात्राओं के साथ बात की और प्राचार्य के पास गईं। प्राचार्य से कहा कि वे भी अपनी पॉकेटमनी से लल्ली के इलाज के लिए मदद करना चाहती हैं। प्राचार्य की मंजूरी के बाद स्कूल की छात्राएं भी इस अभियान में जुट गईं।

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