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होली में मिठाई से ज्यादा दूध के सैंपल 23 दिन में अडानी के तेल की रिपोर्ट नहीं

फूड एंड ड्रग विभाग होली जैसे त्योहार में मिठाई दुकानों अौर पैकेटबंद खाने की चीजों का सैंपल नहीं के बराबर ले रहा...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 03:10 AM IST
फूड एंड ड्रग विभाग होली जैसे त्योहार में मिठाई दुकानों अौर पैकेटबंद खाने की चीजों का सैंपल नहीं के बराबर ले रहा है। होली के दो दिन पहले बुधवार को केवल पांच दुकानों से सैंपल लिया गया। इनमें भी मिठाई के बजाय दूध के सैंपल ज्यादा थे। नियमित सैंपल नहीं लेने से मिलावट वाली मिठाइयां बिकने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर 23 दिन बाद भी अडानी के गोदाम से जब्त फॉर्चून तेल की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है। मिस लीडिंग व मिस ब्रांडिंग के आधार पर तेल के पैकेज व टिन जब्त किया गया था।

होली को लेकर दुकानों में मिठाइयों का बड़ा स्टॉक है। लोग रंगों के त्योहार में जमकर मिठाई की खरीदी ज्यादा होती है। इसके बावजूद फूड एंड ड्रग विभाग ने अब तक गिनती के सैंपल लिए हैं। एक अनुमान के मुताबिक राजधानी में होली के समय एक से डेढ़ करोड़ की मिठाई का कारोबार होता है। दूसरी ओर जिन खाद्य पदार्थ के सैंपल महीनेभर पहले लिए गए थे, उनकी भी अब तक रिपार्ट नहीं आई है। 6 फरवरी को लिए गए फॉर्चून तेल की जांच नहीं हो पाई है। जबकि अधिकारियों का दावा था कि मामला बड़े कारोबारी से जुड़े होने के कारण 10 दिनों में जांच रिपोर्ट आ सकती है। देरी को लेकर अफसर कह रहे हैं कि जरूरत के हिसाब से लैब टेक्नीशियन व जूनियर साइंटिस्ट नहीं होने से जांच प्रभावित हो रही है। खाद्य विभाग भी सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। ताकि जब्त सैंपल के मिलावट होने पर दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। राजधानी के कालीबाड़ी स्थित राज्य स्तरीय लैब में प्रदेशभर के सैंपल की जांच की जाती है। इस हिसाब से स्टाफ को बढ़ाए जाने की जरूरत है। बुधवार को सिद्धि विनायक डेयरी सुंदर नगर, राजघराना पंडरी, शुक्ला डेयरी अभनपुर व साहू डेयरी मंदिर हसौद से दूध का सैंपल लिया गया है। कृष्णा बंगाली स्वीट्स हीरापुर से आरेंज बर्फी व सिबाका स्वीट्स नलघर चौक से मिनी पेड़ा का सैंपल लिया गया।

प्रदेश स्तरीय लैब में टेक्नीशियन और साइंटिस्ट की कमी, इसलिए देर से आती है रिपोर्ट

फूड एंड ड्रग विभाग त्योहारी सीजन में भी नहीं कर रहा जांच

एक्सपर्ट व्यू


दिसंबर में मोबाइल लैब से जांच, 5-10 मिनट में मिल जाती है रिपोर्ट

फूड एंड ड्रग विभाग ने पहली बार दिसंबर में फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी वैन यानी मोबाइल वैन में मौके पर ही खाने वाली चीजें की जांच की थी। 5 से 10 मिनट में रिपोर्ट भी मिल गई। स्टेशन रोड स्थित सागर बिरयानी सेंटर की ग्रेवी, न्यू ए-1 की बिरयानी में प्लास्टिक के रेशे व धूल के कण मिले। वहीं क्वालिटी बेकरी में आइसिंग क्रीम में कलर ज्यादा मिला। अन्य 12 दुकानों व होटलों में बड़ा, टमाटर चटनी, मिक्चर नमकीन, साबूदाना पापड़, पकी हुई दाल, मुर्रा लड्डू, बड़ा, काजू, पान मिठाई की जांच भी की गई। ये सभी मानक निकले।

उल्टी-दस्त व पेट दर्द की समस्या

सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जीबी गुप्ता और डॉ. अब्बास नकवी के मुताबिक मिलावटी मावे से बनी मिठाइयों के सेवन से शरीर का पाचन तंत्र प्रभावित होता है। इससे उल्टी, दस्त, पेट दर्द एवं गैस की समस्या होती है। लंबे समय तक ऐसे मिलावटी पदार्थ का उपयोग करने से लीवर और किडनी पर दुष्प्रभाव पड़ता है। सही उपचार नहीं होने पर लीवर और किडनी खराब भी हो सकती है।

पार्टी व शादी समारोह में जांच नहीं

फूड एंड ड्रग विभाग ने पार्टी व शादी समारोह में खानों का सैंपल नहीं ले रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रात में सैंपल लेने जाने के लिए महिला स्टाफ के लिए गाड़ी नहीं है। सुरक्षा कारणों के कारण से भी रात में सैपलिंग संभव नहीं हो पा रहा है। वहीं दिन में भी सैंपल नहीं लिए जा रहे हैं। डॉ. देवांगन का कहना है कि इसे लेकर फूड इंस्पेक्टरों से जानकारी ली जाएगी।

होली के बाद ही आ पाएगी जांच रिपोर्ट


बुधवार को दूध जांच के लिए सैंपल लेते अिधकारी

बताते हैं कारण: टेक्नीशियन व असिस्टेंट की कमी

राज्य स्तरीय लैब में लैब टेक्नीशियन व असिस्टेंट की कमी है। इसके कारण सैंपल की जांच में देरी होती है। प्रदेश का एकमात्र लैब होने के कारण यहां लैब टेक्नीशियन व असिस्टेंट के 10-10 पद होने चाहिए, लेकिन महज तीन से चार कर्मचारी काम कर रहे हैं। सेटअप में अधिकारियों का पद तो बढ़ाया गया है, लेकिन लैब का सेटअप तैयार करने में लापरवाही बरती गई। उनके पद ही नहीं बढ़ाए गए हैं। लैब में जूनियर साइंटिफिक असिस्टेंट व माइक्रो बायोलॉजिस्ट के पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक काम कर रहा है।

होना चाहिए: मिठाई की की रिपोर्ट 10 दिनों में

अधिकारियों का कहना है कि मिठाइयों व मावा की जांच करने में पांच से 10 दिन लगता हैै। इसमें मिलावट जांच के लिए विभिन्न केमिकल का उपयोग किया जाता है। अधिकारियों के अनुसार सैंपल अधिक होने के कारण इसमें समय ज्यादा लगता है। लैब टेक्नीशियन सैंपल की जांच करते हैं। इसकी मानीटरिंग एनालिस्ट व साइंटिस्ट करते हैं। रिपोर्ट तैयार करने में विशेष सावधानी बरती जाती है, ताकि आगे किसी तरह के सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं।