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कीचड़ में लोहा अपना रूप बदलता है लेकिन सोना नहीं इसलिए सोने की तरह बनो:आचार्य विद्यासागर

कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर लोहे को अगर पारसमणी का साथ मिल जाए तो वह स्वर्ण बन जाता है। लोहा और सोने को अगर एक साथ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 03:15 AM IST

कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

लोहे को अगर पारसमणी का साथ मिल जाए तो वह स्वर्ण बन जाता है। लोहा और सोने को अगर एक साथ कीचड़ में डाला जाए और उसे कुछ दिन बाद कीचड़ से बाहर निकाला जाए तो लोहे में जंग लग जाएगी लेकिन सोना जस का तस रहेगा। ठीक उसी प्रकार मनुष्य भी अगर खुद में सोने के समान आचरण रखे तो वह कभी भी नहीं बदलता।

लोहे की तरह जिन्होंने अपनी जिंदगी जीने की सोची है वे यह नहीं जानते कि इसका परिणाम उनके हक में कभी नहीं होगा। यह बातें लाभांडी में नवनिर्मित चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में 5 फरवरी आयोजित से पंचकल्याणक महोत्सव से पहले आयोजित धर्मसभा में कही। लाभांडी में हर दिन आचार्यश्री का प्रवचन हो रहा है। इसी कड़ी में उन्होंने गुरुवार को आगे कहा कि अगर बनना है तो लोहे की तरह नहीं सोने की तरह बनो क्योंकि सोने को कितना भी तपा लो वह अपना मूल स्वभाव नहीं छोड़ता, बल्कि उसकी चमक और ज्यादा बढ़ जाती है। आचार्यश्री ने ज्ञानी को सोना और अज्ञानी को लोहे के समान बताते हुए कहा कि जैसे विज्ञान ने लोहे को जंग से बचाने के लिए रसायन तैयार किया है, उसी प्रकार आप लोग भी ज्ञान के माध्यम से पापरूपी जंग से खुद को बचा सकते हैं। गुरुवार को आचार्यश्री के आहार का अवसर दिगंबर जैन मंदिर मालवीय रोड के अध्यक्ष नवीन मोदी, राजीव मोदी, राजेश जैन को प्राप्त हुआ।

अष्टधातु से बनी पद्मप्रभु की प्रतिमा की होनी है प्राण प्रतिष्ठा

लाभांडी मेें नवनिर्मित दिगंबर जैन मंदिर में हर दिन हो रही धर्मसभा।

अाचार्य विद्यासागर 38 शिष्यों के साथ विराजे, 11 तक सत्संग

दिगंबर जैन समाज के आचार्य विद्यासागर महाराज लाभांडी स्थित शांति नगर में बने नवनिर्मित मंदिर में अपने 38 शिष्यों के साथ विराजे हुए हैं। उनके दर्शन के लिए गुरुवार को कार्यक्रम स्थल में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। प्रवचन-सत्संग का यह क्रम 11 फरवरी तक जारी रहेगा। शांति नगर में अष्टधातु से निर्मित स्वामी पद्मप्रभु के साथ प्रतिमाएं प्राण-प्रतिष्ठित की जाएंगी। इस मौके पर विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन भी होगा। मंदिर निर्माण के लाभार्थी विनोद बड़जात्या ने बताया कि पंच कल्याणक महोत्सव की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। महाराज के दर्शन के लिए हर दिन सैकड़ों लोग पहुंच रहे हैं। पंच कल्याणक महोत्सव में देश और प्रदेश के शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।

5 से 11 तारीख तक मंदिर में होंगे कई धार्मिक अनुष्ठान

शांति नगर में मकराना के पत्थरों से भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है। मंदिर में अष्टधातु से बनी स्वामी पद्मप्रभु की प्रतिमा प्रतिष्ठित की जाएगी। 5 फरवरी को मंगल ध्वजारोहण के साथ अनुष्ठान की शुरुआत होगी। इसी दिन देव दर्शन, देवाज्ञा, सकलीकरण, घटयात्रा, गुरु आज्ञा से जुड़े कार्यक्रम होंगे। इसी तरह 6 फरवरी को जिनाभिषेक, शाम को महाआरती होगी। 8,9,10 और 11 फरवरी को भगवान के जन्मकल्याणक, तप कल्याणक, ज्ञान कल्याणक और मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया जाएगा।

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