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100 से ज्यादा बच्चों को बोलने-सुनने का इंतजार, फंड न होने से सर्जरी टली

News - मूक-बधिर बच्चों को बोलने और सुनने योग्य बनाने के लिए कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी फंड की कमी के कारण नहीं हो पा रही है।...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 03:25 AM IST
100 से ज्यादा बच्चों को बोलने-सुनने का इंतजार, फंड न होने से सर्जरी टली
मूक-बधिर बच्चों को बोलने और सुनने योग्य बनाने के लिए कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी फंड की कमी के कारण नहीं हो पा रही है। इस वजह से बच्चों के ऑपरेशन टाले जा रहे हैं। वर्तमान में 100 से ज्यादा बच्चे हैं, जिनका ऑपरेशन किया जाना है। पिछले सालभर से अंबेडकर व निजी अस्पतालों का भुगतान भी नहीं किया गया है। इससे मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना से मूक-बधिर बच्चों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

राजधानी में कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी अंबेडकर अस्पताल के अलावा एम्स और दो निजी अस्पतालों में की जा रही है। मूक-बधिर बच्चों को ज्यादा इंतजार न करना पड़े, इसलिए ऑपरेशन के लिए अस्पतालों की संख्या बढ़ाई गई है। जहां बच्चों का ऑपरेशन किया गया है। वहां पिछले सालभर से भुगतान नहीं हुआ है। अब जिन बच्चों का ऑपरेशन होना है, उन्हें परेशानी हो रही है। अंबेडकर अस्पताल में ईएनटी विभाग की एचओडी डॉ. हंसा बंजारा का कहना है कि अब ऑपरेशन के लिए दिल्ली से डॉक्टर बुलाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। निजी अस्पताल के ईएनटी सर्जन डाॅ. अनुज जाऊलकर ने बताया कि शासन से मिलने वाले अनुदान में यह ऑपरेशन किया गया, लेकिन सालभर से भुगतान नहीं हुआ है। मोबाइल यूनिट से बच्चों के घर जाकर स्पीच थैरेपी करवाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऑपरेशन के बाद स्पीच थैरेपी अनिवार्य है। अंबेडकर अस्पताल व एम्स में स्पीच थैरेपी की जाती है। इसके लिए बच्चों को अस्पताल लाना पड़ता है।

अंबेडकर और निजी अस्पतालों में केस अटके

मूक- बधिर बच्चों की नहीं हो पा रही है कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी

काफी महंगी है इसकी सर्जरी

कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी काफी महंगी होती है। इसमें सात से आठ लाख रुपए खर्च होते हैं। महंगी सर्जरी को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार बीपीएल व एपीएल परिवार को अनुदान दे रही है। एपीएल परिवार को बाकी खर्च स्वयं वहन करना होता है। अब तक योजना के तहत 100 से ज्यादा सर्जरी की जा चुकी है। वेटिंग भी घटकर एक महीने तक हो गई है।

ऐसे कराए जाते हैं रजिस्ट्रेशन

मूक-बधिर बच्चों के परिजनों को काॅक्लियर इंप्लांट सर्जरी कराने के लिए अंबेडकर अस्पताल के ईएनटी विभाग में संपर्क किया जा सकता है। आवेदन अब सभी मेडिकल कॉलेजों में जमा किया जा सकता है। पंजीयन करवाने के बाद बच्चों की थैरेपी की जाती है। फिर यहां सूची के अनुसार बच्चों के ऑपरेशन की तैयारी की जाती है। सामान्यत: एक बार में तीन से चार बच्चों की सर्जरी की जाती है।

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2010 से चल रही है योजना

प्रदेश सरकार ने मूक-बधिर बच्चों को बोलने व सुनने योग्य बनाने के लिए 2010 में मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना शुरू की थी। इसमें बीपीएल परिवार को 4.70 लाख रुपए व एपीएल को 3.70 लाख रुपए अनुदान दिया जाता है। स्पीच थैरेपी पूरी होने के बाद 30-30 हजार रुपए और दिए जाते हैं। सर्जरी के बाद मरीज को जीवनभर उपकरण लगाना पड़ता है। यही नहीं साल से डेढ़ साल तक स्पीच थैरेपी की जरूरत पड़ती है। इस थैरेपी से बच्चों में बोलने व सुनने की क्षमता विकसित होती है। इसके अभाव में सर्जरी का कोई मतलब नहीं रह जाता।

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