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डैम, केनाल, एनीकट और तालाबों की खंगाली जाएगी हिस्ट्री, फिर सबको दी जाएगी ग्रेडिंग

राज्य के तीन हजार तालाबों, 750 एनीकट व स्टाप डैम, 43 बांधों व नहरों का इतिहास खंगाला जाएगा। इनमें 100 साल से अधिक पुराने...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:25 AM IST
राज्य के तीन हजार तालाबों, 750 एनीकट व स्टाप डैम, 43 बांधों व नहरों का इतिहास खंगाला जाएगा। इनमें 100 साल से अधिक पुराने और व ब्रिटिशकालीन डैम-तालाब भी शामिल हैं। इसके लिए इरीगेशन डिपार्टमेंट की टीमें दस दिनों तक प्रदेश का कोना-कोना छानेंगी। इसमें जियो टेक्निक का इस्तेमाल होगा। जो वास्तविक तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर वर्क प्लान बनेगा। बारिश से पहले इन सभी को जरूरत के मुताबिक नया रूप दे दिया जाएगा।

इसके बाद सभी बांधों, तालाबों, नहरों व एनीकटों को उनकी उपयोगिता व क्षमता के आधार पर ग्रेडिंग दी जाएगी। इस स्पेशल मिशन को मार्च में शुरू किया जाएगा। इसके पहले विभाग के इंजीनियरों से लेकर निचले स्टाफ को ट्रेंड किया जाएगा। हर टीम का नेतृत्व एक सब इंजीनियर करेगा। दस दिनों तक ये टीमें जानेंगी कि अमुक तालाब, बांध, नगर या एनीकट-स्टापडैम कब बना था। तब इसकी वास्तविक सिंचाई क्षमता कितनी तय की गई और अब इससे कितनी सिंचाई हो पा रही है। पानी की क्षमता कितनी थी और कितना पानी रहता है, कम या ज्यादा। इसकी वजह क्या-क्या हैं। इन सबकी अलग-अलग एंगल से तस्वीरें भी ली जाएंगी। वास्तविक क्षेत्रफल का पता लगाया जाएगा। कब्जे हैं तो उनका उल्लेख किया जाएगा। इनकी लाइफ कितनी थी। कहीं ये भविष्य में खतरनाक साबित तो नहीं होंगे। अभियान में केवल उन सिंचाई साधनों को शामिल किया जाएगा जो इरीगेशन डिपार्टमेंट के हैं। जब सारे तथ्य विभाग के सामने आ जाएंगे तो जरूरत और कमियों के आधार पर तैयार होगा वर्क प्लान। वर्क प्लान बन जाने पर विभाग खुद और पब्लिक पार्टनरशिप करके सबको नया रूप देने में जुट जाएगा। यह मिशन चलेगा अप्रैल और मई में। ताकि बारिश से पहले अभियान पूरा हो सके। स्पेशल मिशन पूरा होते ही एमआईएस पर पूरा डाटा अपलोड कर दिया जाएगा। सिंचाई के ये सभी संसाधन ऑनलाइन हो जाएंगे। इसके बाद इन्हें इनकी उपयोगिता, योग्यता व क्षमता के अनुसार ग्रेडिंग दे दी जाएगी। विभाग फिर एक नए अभियान में ग्रेडिंग के मुताबिक डी ग्रेडिंग के तालाबों, बांधों व एनीकटों को सी में लाने की कोशिशें करना। जो सी ग्रेडिंग वाले हैं उन्हें बी ग्रेडिंग के लाने के प्रयास।

स्कूलों की गुणवत्ता व ग्रेडिंग की तरह अब होगा सिंचाई के साधनों का भी कायाकल्प

इस तरह होगी ग्रेडिंग

ए - वे तालाब, बांध, एनीकट-स्टापडैम, नहरें जिनकी क्षमता 85 फीसदी या अधिक है।

बी - वे तालाब, बांध, एनीकट-स्टापडैम, नहरें जिनकी क्षमता 65 से 85 फीसदी है।

सी - वे तालाब, बांध, एनीकट-स्टापडैम, नहरें जिनकी क्षमता 50 से 65 फीसदी है।

डी - वे तालाब, बांध, एनीकट-स्टापडैम, नहरें जिनकी क्षमता 50 प्रतिशत या कम है।

एक नजर में -

तालाब - 3 हजार, स्टापडेम व एनीकट - 750, बांध - 43

ये काम हो सकेंगे

साफ- सफाई, गहरीकरण, गेट लगाना, जंजीरें लगाना, नहर लाइनिंग, लीकेज रोकना, सौंदर्यीकरण।

टारगेट लाइन - प्रतिबद्धता, समयबद्धता, गुणवत्ता, हर खेत को पानी।

मिशन टूल्स - जियो टैगिंग, ले आउट, इंफर्मेशन, वर्क प्लान, ग्रेडिंग।

ये फायदे होंगे

तालाब, डैम, एनीकट-स्टापडैम व नहरें ऑनलाइन हो जाएंगी।, सिंचाई क्षमता में बढ़ोतरी होगी।, जल संकट कम होगा।

बांधों-तालाबों की लाइफ बढ़ जाएगी।