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संस्कृत सभी भाषाओं की जननी बोलचाल में उपयोग की जरूरत / संस्कृत सभी भाषाओं की जननी बोलचाल में उपयोग की जरूरत

Bhaskar News Network

Feb 19, 2018, 03:25 AM IST

News - रायपुर | संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। वेद, उपनिषद, मंत्र और श्लोक इसी भाषा में उपजे। वैज्ञानिक विकास में भी यह...

संस्कृत सभी भाषाओं की जननी बोलचाल में उपयोग की जरूरत
रायपुर | संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। वेद, उपनिषद, मंत्र और श्लोक इसी भाषा में उपजे। वैज्ञानिक विकास में भी यह भाषा काफी उपयोगी साबित हो सकती है। इसे बचाए रखने के लिए इसका प्रचार करना बेहद जरूरी है। आम बोलचाल की भाषा में उपयोग में लाकर इसके अस्तित्व को कायम रखा जा सकता है। यह बातें रविवार को संस्कृत भारती द्वारा वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर सभागार में आयोजित संस्कृत जनपद सम्मेलन में जगद्गुरु स्वामी घनश्यामाचार्य महाराज ने कही।

उन्होंने आगे कहा कि संस्कृत सीखने-बोलने की शुरुआत घर से करें। रोजमर्रा की जिंदगी में हम काम आने वाले शब्दों को संस्कृत में बोलें। धीरे-धीरे इसे आप आसानी से समझने और सीखने लगेंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर प्रमोद दुबे थे। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारती संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने के लिए काफी प्रयास कर रही है। लोगों को भी संस्था के इस पहल से जुड़ना चाहिए। दैनिक जीवन में संस्कृत का उपयोग न केवल आपका भाषाई ज्ञान बढ़ाता है, बल्कि आपको अपने धर्म और देश से भी जोड़ता है। इस दौरान दादू भाई त्रिपाठी, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, कृष्ण वल्लभ शर्मा, डॉ. बहुरण सिंह पटेल, डॉ. लक्ष्मीकांत पंडा, डॉ. राघवेंद्र शर्मा, प्रवीण कुमार झाड़ी, पं. चंद्रभूषण शुक्ला आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

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