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रायपुर को 19वां स्थान, 5वीं व 8वीं कक्षा के 70% छात्र नहीं हल कर पाते गणित, 60 फीसदी साइंस व सोशल साइंस में भी कमजोर

कृष्णा तिवारी

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 03:30 AM IST

कृष्णा तिवारी रायपुर

स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता जांचने के लिए हाल ही में 189 स्कूलों का नेशनल अचीवमेंट सर्वे किया गया। इसमें बच्चों के विषयों के ज्ञान को परखा गया। अचीवमेंट सर्वे के रिपोर्ट के मुताबिक तीसरी, पांचवीं और आठवीं के 4 हजार से ज्यादा बच्चों के ज्ञान की जांच की गई। इसमें गणित हल करने से लेकर साइंस के संबंध में जानकारी पूछी गई। इसमें रायपुर समेत प्रदेश के ज्यादातर स्कूलों के बच्चे कमजोर रहे है। वहीं गणित हल करने में भी 70 फीसदी बच्चे कमजोर साबित हुए। जशपुर व अंबिकापुर के बच्चों को गणित, सोशल साइंस समेत साइंस में अच्छी ट्रेनिंग दी गई है। वहां के बच्चों की स्थिति रायपुर के बच्चों से अच्छी मिली है।

शहरी क्षेत्रों में स्थिति कमजोर

प्रदेश में रायपुर की स्थिति सबसे कमजोर है। इसके अलावा सरगुजा क्षेत्रों में अचीवमेंट सर्वे में बच्चे सबसे बेहतर रहे हैं। वहीं सुकमा इलाके के बच्चों की स्थिति भी बेहतर रहीं है।

राज्य के 189 स्कूलों का नेशनल अचीवमेंट सर्वे किया गया। इसमें 8वीं और 5वीं के बच्चे सबसे कमजोर पाए गए हंै। जिले के 70 फीसदी बच्चों को गणित हल करना नहीं आता। साइंस और सोशल साइंस में तीसरी और 5वीं के 60% बच्चे कमजोर हैं।



investigation

रिपोर्ट में खुलासा, छोटी क्लास के बच्चों की पढ़ाई पर नहीं दिया जा रहा ध्यान

कक्षा आठवीं

लेंग्वेज

52.49%

गणित

28.92%

साइंस

36.18%

सो. साइंस

39.74%

इन जिलों की स्थिति रायपुर से बेहतर...

वातावरण भी देने की जरूरत

 वर्तमान में स्कूलों में बच्चों के हिसाब से वातावरण नहीं है। सुविधाओं में कमी है। शिक्षा का प्रचार-प्रसार भी ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा है। इमानदारी के साथ जिस दिन शिक्षा का कार्य होगा, उस दिन शिक्षा की स्थिति बेहतर हो जाएगी। वहीं लापरवाही करने पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। बीकेएस रे, शिक्षाविद्

47.51%

71.08%

63.18%

60.26%

फैक्ट

फाइल

189

स्कूलों में अचीवमेंट सर्वे

04

हजार 306 बच्चों की जांच

इन कारणों से कमजोर हैं हमारे बच्चे

टीचर्स में गुणवत्ता नहीं

ज्यादातर स्कूलों के टीचर्स ही पढ़ाई-लिखाई बच्चों को गंभीरता से नहीं कराते। हार्डवर्क के जरिए नहीं, बल्कि स्मार्टवर्क के जरिए समझाएं तो बेहतर रहेगा। टीचर्स को हर साल इसके लिए ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। इस मामले में सरकार और पालकों की जिम्मेदारी भी ऐसी होनी चाहिए कि बच्चे उच्च शिक्षा ग्रहण कर सकें।

अभियान चलाया पर मॉनीटरिंग की कमी

अभियान यानि जिस तरह से बच्चों को ज्ञान दिया जाना है, उसे मिशन के रूप में शिक्षकों को काम करने की जरूरत है। क्योंकि बच्चों में आत्मविश्वास नहीं होगा, तो बच्चे भी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे। बच्चों को टीचर्स मोटीवेट नहीं करेंगे तो उनमें आत्मविश्वास नहीं आएगा। इससे भी गणित से लेकर तमाम विषयों में पीछे रह जाएंगे।

गणित और अंग्रेजी सुधारने किट बांटी

 हमारी पहले से कमजोरियां रही है। जिससे परिणाम अच्छे नहीं आते थे। किताबों में भी काफी बदलाव किया गया है। स्कूलों में छात्र-छात्राओं की गणित और अंग्रेजी को सुधारने के लिए किट दी गई हैं। विकास शील, सचिव शिक्षा विभाग

रिजल्ट के संबंध में स्टेट वाले देंगे जवाब

 नेशनल एचीवमेंट सर्वे की रिपोर्ट में स्कूलाें के परीक्षा परिणाम जैसे भी रहे हैं, इसके जिम्मेदार हम नहीं है। शिक्षा गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रयास करते हैं। रिजल्ट सही क्यों नहीं आ रहा, इसका जवाब स्टेट स्तर पर बैठे अधिकारी ही देंगे। फिलहाल शिक्षकों को मोटीवेट करवाते हैं। एएन बंजारा, जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर



सुधार नहीं हो रहा है तो जिम्मेदार रहेंगे विषयवार शिक्षक

 शासन स्कूल शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए तमाम तरह की योजनाएं चला रही है। इसके बाद भी अगर परिणाम अच्छे नहीं आएंगे तो स्कूल शिक्षक मुख्य रूप से िजम्मेदार रहेंगे। शिक्षकों को चाहिए कि वह स्कूली बच्चों की पढ़ाई करवाने में अच्छी मेहनत करें। जिससे परिणाम अच्छे मिलें। अरुण कुमार शर्मा, सहायक परियोजना समंवयक, सर्व शिक्षा अभियान

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Web Title: रायपुर को 19वां स्थान, 5वीं व 8वीं कक्षा के 70% छात्र नहीं हल कर पाते गणित, 60 फीसदी साइंस व सोशल साइंस में भी कमजोर
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