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पंडरी मार्केट को 1996 के स्वरूप में लाने की तैयारी, त्योहार के बाद बड़ी तोड़फोड़

पंडरी कपड़ा मार्केट में सड़क पर खुली दुकानें, पार्किंग और यूटिलिटी की जगह कब्जे और अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम...

Danik Bhaskar

Mar 01, 2018, 03:35 AM IST
पंडरी कपड़ा मार्केट में सड़क पर खुली दुकानें, पार्किंग और यूटिलिटी की जगह कब्जे और अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम ने होली के बाद बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के बाद नगर निगम को कब्जों पर छह हफ्ते के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट मांगी है। इस पर अमल शुरू करते हुए नगर निगम बुधवार को रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) को चिट्ठी लिखकर पंडरी मार्केट का 30 साल पुराना ड्राइंग-डिजाइन मांग लिया है। पता चला है कि पंडरी में अवैध निर्माण और कब्जे की शिकायतें 1996 से शुरू हुई थीं, इसलिए निगम मानकर चल रहा है कि इससे पहले पंडरी मार्केट मूल स्वरूप में था। इसलिए इसे 1996 के स्वरूप में लाने की कवायद शुरू हो गई। सूत्रों का दावा है कि कागजी प्रक्रिया होली के बाद हफ्तेभर के भीतर पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद मार्केट में किसी भी समय नगर निगम बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

नगर निगम के जोन-2 के अमले ने इस कार्रवाई की प्रक्रिया तय करते हुए आरडीए से ड्राइंग-डिजाइन मांगा है। हाईकोर्ट के आदेश की प्रति भी मांगी जा रही है। गौरतलब है, पंडरी मार्केट में कब्जा और अवैध निर्माण का सिलसिला 1996 में ही शुरू हो गया था। तब मध्यप्रदेश सरकार थी और शिकायतें आरडीए तथा टाउन प्लानिंग के पास की गई थीं। इन शिकायतों पर दो दशक में भी कार्रवाई नहीं हुई थी। तब एक व्यापारी ने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर कार्रवाई की मांग की। हाईकोर्ट ने माना कि शिकायत दो दशक पहले हुई थी तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। यही नहीं, कोर्ट ने बिना समय दिया निगम को अवैध निर्माणों पर कार्रवाई कर छह हफ्ते के भीतर एफिडेविट जमा करने का आदेश दिया है।

दो दशक पुराने डिजाइन पर कार्रवाई शुरू हुई तो व्यापक असर होगा बाजार पर

कार्रवाई जल्दी करेंगे कमिश्नर

निगम कमिश्नर रजत बंसल ने कहा कि होली के बाद इस मामले में सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। इसके बाद कार्रवाई शुरू कर देंगे। निगम जोन-2 के प्रभारी कमिश्नर विनोद देवांगन ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी की प्रतीक्षा है। आरडीए से पुरानी ड्राइंग-डिजाइन मांगी है, जिससे पता चलेगा कि नियमों के विपरीत क्या-क्या हो गया। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई होगी।

क्या कहा था याचिका में

याचिकाकर्ता इंदर छाबड़ा ने कहा कि आरडीए के ड्राइंग-डिजाइन के मुताबिक सभी प्लाट पर सामने की तरफ सात फुट का बरांडा छोड़ा गया था। दुकानदारों ने इस पर भी निर्माण किया है, जिससे दुकानों के सामने सारी सड़कें बहुत संकरी हो गई गई हैं। इसी तरह, दुकानें के पीछे 10 बाई 15 फीट यानी 150 वर्गफीट जगह छोड़नी थी। यह जगह सार्वजनिक उपयोग के लिए थी। इसपर भी निर्माण कर लिया गया। बाजार में निर्माण की मनाही है, फिर भी तीन-चार मंजिला तक निर्माण कर लिए गए हैं। इसी तरह, पूरे बाजार में सभी दुकानों का सिंगल गेट था, जो बाजार के भीतर दिया गया था। सड़क की तरफ किसी को गेट नहीं खोलना था, लेकिन व्यापारियों ने सड़क पर भी गेट खोल लिए। कई कारोबारियों ने तो दुकानों का दो हिस्से किए और एक का गेट सड़क पर दूसरे का भीतर खोल लिया। याचिका में इन सब अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग की गई थी।

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