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सुकमा पलौदी गांव के करीब बड़ा नक्सली हमला

भास्कर न्यूज | जगदलपुर/सुकमा सुकमा जिले के पलौदी गांव के करीब मंगलवार दोपहर नक्सलियों ने बारूदी विस्फोट कर नौ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 14, 2018, 04:25 AM IST

सुकमा पलौदी गांव के करीब बड़ा नक्सली हमला
भास्कर न्यूज | जगदलपुर/सुकमा

सुकमा जिले के पलौदी गांव के करीब मंगलवार दोपहर नक्सलियों ने बारूदी विस्फोट कर नौ जवानों को शहीद कर दिया। दोपहर करीब 12.15 बजे घात लगाए नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट किया और माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल को उड़ा दिया। विस्फोट इतना तेज था कि टनों वजनी एमपीवी के परखच्चे उड़ गए। घटना में दो जवान घायल हो गए। हमलावर नक्सली वही थे जो सुबह करीब 8 बजे फोर्स के साथ मुठभेड़ में इसलिए बच गए, क्योंकि जवानों द्वारा दागे गए यूबीजीएल गोले फट नहीं पाए थे।

सीआरपीएफ अफसरों के मुताबिक सीआरपीएफ के जवान पालोदी कैंप से किस्टाराम बाजार से राशन लेकर लौट रहे थे। छुट्‌टी से लौटकर आए जवान भी किस्टाराम कैंप में थे। इन्हें पलौदी कैंप तक सुरक्षित पहुंचाने रोड ओपनिंग पार्टी लगाई गई थी। सभी जवान एक साथ दो वाहनों में पलौदी कैंप के लिए रवाना हुए। इनमें से माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल बारूदी विस्फोट की चपेट में आ गया। घटनास्थल किस्टारम कैंप से 3 किमी दूर है। किस्टाराम और पलौदी दोनों जगह सीआरपीएफ की 212 बटालियन का कैंप है। शेष|पेज 15









10 नक्सली मारे थे, यह बदले का हमला:

होली के दिन 2 मार्च को तेलंगाना-छत्तीसगढ़ की सीमा पर ग्रेहाउंड और स्टेट पुलिस ने नक्सलियों की शादी के दौरान हमला किया था। इस दौरान फोर्स ने 10 नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें 6 महिला नक्सली भी थीं। माना जा रहा है कि नक्सलियों ने बौखलाहट में यह वारदात की है। 7 मार्च को आईईडी ब्लास्ट में कांकेर में रावघाट थाना के किलेनार इलाके में घात लगाए नक्सलियों ने बीएसएफ जवानों पर हमला कर दिया था। इसमें बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट व एक जवान शहीद हो गए थे।

पलौदी गांव में मौजूद थे 100 से अधिक नक्सली :

सूत्रों के मुताबिक, सीआरपीएफ जवानों के कैंप से निकलने से लेकर वापस लौटने तक पूरे रोडमैप के बारे में नक्सलियों को जानकारी थी। कैंप लौट रहे जवान आसानी से उनका निशाना बन गए। जब यह हमला हुआ, करीब के गांव पलौदी में 100 से अधिक नक्सली मौजूद थे। यानी उनकी तैयारी थी कि अगर विस्फोट से बच गए जवान अगर मोर्चा संभालते हैं तो उन पर हथियारों से हमला किया जाता।







छुट्टी से लौटे जवानों को छोड़ने कैंप जा रहे थे, तभी हमला

सुबह मुठभेड़ के बाद जवान सुरक्षित किस्टारम कैंप पहुंच गए थे, लेकिन दोपहर में वे दोबारा निकले। बताया जा रहा है कि पलौदी कैंप के 12 जवान छुट्‌टी से लौटे थे। इन्हें कैंप तक छोड़ने के लिए दोपहर को एक पार्टी कैंप से निकली और इसी दौरान नक्सलियों ने एमपीवी को उड़ा दिया। जब यह हमला हुआ, तब सुकमा एसपी अभिषेक मीणा और एएसपी नक्सल अॉपरेशन शलभ सिंह किस्टारम कैंप में ही थे। वे भी तत्काल मौके पर पहुंचे।

ट्रैक्टर में डालकर लाए गए शहीदों शव

नक्सली विस्फोट से माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल के परखच्चे उड़े तो इसके बंकर में सवार जवानों के शव क्षत-विक्षत हो गए थे। घायल जवानों को किस्टारम कैंप लाया गया। इसके कुछ देर बाद शहीद जवानों के शव ट्रैक्टर में डालकर किस्टारम कैंप लाया गया। शाम 5.30 बजे हेलीकॉप्टर से शहीदों के शव रायपुर भेजे गए।





अब तक की बड़ी घटनाएं

24 अप्रैल 2017 : सुकमा में सीआरपीएफ के 26 जवान शहीद।

मार्च 2017 : लैंडमाइन ब्लास्ट में 7 जवान शहीद।

11 मार्च 2017: भेज्जी में हमला, 11 जवान शहीद

30 मार्च 2016: दंतेवाड़ा के मालेवाड़ा में 7 जवान शहीद

अप्रैल 2015: बारूदी सुरंग विस्फोट में 4 जवान शहीद हो गए और आठ जवान घायल हो गए थे।

अप्रैल 2014 : बस्तर में एक बड़ा नक्सली हमला हुआ था, जिसमें पांच जवान शहीद हो गए थे, जबकि 20 लोग घायल हो गए थे।

28 फरवरी 2014: दंतेवाड़ा के कुआकोंडा थाना क्षेत्र में रोड ओपनिंग के लिए निकले जवानों पर हमला, 5 शहीद

11 मार्च 2014: टाहकवाड़ा में 20 जवान शहीद

25 मई 2013: झीरम में कांग्रेस के बड़े नेताओं समेत 32 लोगों को मारा

12 मई 2012: सुकमा में दूरदर्शन केंद्र पर हमला, 4 जवान शहीद

जून 2011: दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट, 10 पुलिसकर्मी शहीद

17 मई 2010: दंतेवाड़ा से सुकमा जा रहे जवानों पर हमला, 36 जवान शहीद इसमें 12 एसपीओ।

6 अप्रैल, 2010: सुकमा के ताड़मेटला में 76 सीआरपीएफ जवानों को मौत की नींद सुला दिया

12 जुलाई, 2009 : राजनांदगांव में एंबुश में पुलिस अधीक्षक वीके चौबे सहित 29 जवान शहीद हुए।

अगस्त 2007 : ताड़मेटला में मुठभेड़ में थानेदार सहित 12 जवान शहीद हुए।

जुलाई 2007 : एर्राबोर अंतर्गत उरपलमेटा एंबुश में 23 सुरक्षाकर्मी मारे गए।

सितम्बर 2005 : गंगालूर रोड पर एंटी-लैंडमाइन वाहन के ब्लास्ट 23 जवान शहीद हुए थे।

6 अप्रैल 2010: सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए।

ऐसे चला घटनाक्रम

सीआरपीएफ 212वीं बटालियन के 200 से ज्यादा जवान पांच टीमों में बंटकर किस्टाराम से पलौदी के लिए निकले। चार टीमों ने जंगल का रास्ता अपनाया तो एक टीम बाइक से सड़क पर चलने लगी।

जवान सुबह 7.35 बजे जब किस्टाराम कैंप से 3 किमी दूर नदी किनारे पहुंचे तो नक्सलियों ने जवानों को घेर लिया। इसके बाद नक्सलियों ने फायरिंग की, लेकिन जवानों ने नक्सलियों के एंबुश तोड़ दिया।

यह टीम वापस किस्टाराम कैंप लौट आई। मौके से एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया गया। इसके बाद जवान दोबारा कैंप से पलौदी के लिए निकले। इस बार जवान एमपीवी भी साथ ले गए। कैंप से कुछ दूर 12.15 बजे नक्सलियों ने एमपीवी को बलास्ट कर उड़ा दिया।

नक्सलियों ने वायरलेस पर भेजा था मैसेज-एक बड़ा नेता मारा गया

नक्सलियों ने जवानों पर सुबह 7.35 बजे ही पहला हमला कर दिया था। यहां नक्सलियों का एंबुश तोड़ने के बाद जब जवान वापस किस्टाराम कैंप पहुंचे तो नक्सलियों के चाइना मेड वायरलेस सेट को इंटरसेप्ट किया। इसमें नक्सलियों की ओर से मैसेज चल रहा था कि एक बड़ा नक्सली नेता उन्होंने हमले में खो दिया है और पांच घायल हो गए हैं। इससे माना जा रहा है कि जवानों की जवाबी कार्रवाई में नक्सलियों को भी नुकसान हुआ है।

सुबह मुठभेड़ में जान बचाकर भागे नक्सलियों ने 4 घंटे बाद उड़ाई फोर्स की एंटी लैंडमाइन, 9 शहीद

छुट्‌टी से लौटे साथियों को कैंप छोड़ने जा रहे थे शहीद जवान

सुबह नदी किनारे मुठभेड़ हुई थी, फिर दोपहर 12.15 बजे हमला

गंभीर रूप से घायल 2 जवानों को इलाज के लिए रायपुर लाया गया

11 महीने में दूसरा बड़ा हमला

विस्फोट इतना जबर्दस्त था कि एंटी लैंडमाइन व्हीकल सड़क से दूर जा गिरा। जवानों के शव भी 50 मीटर दूर तक गिरे।

6 राज्यों ने खोया इन बेटों को

आरकेएस तोमर, मुरैना (मप्र)

जितेंद्र सिंह, भिंड (मप्र)

मनोज सिंह, बलिया (यूपी)

आपात बैठक : मुख्यमंत्री रमन ने दिए ऑपरेशन तेज करने के निर्देश

लक्ष्मण अलवर (राजस्थान)

अजय यादव, मुंगेर (बिहार)

धर्मेंद्र यादव, मऊ (यूपी)

नक्सली हमले के बाद मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने लोक सुराज अभियान के कार्यक्रम को रद्द करते हुए सीएम हाउस में राज्य के आला अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। उन्होंने अफसरों को बस्तर में सर्चिंग ऑपरेशन तेज करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना से जवानों का हौसला कम नहीं हुआ है। सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्स और राज्य के पुलिस जवान माओवादियों का पुरजोर तरीके से मुकाबला करेंगे। हम हिम्मत से आगे बढ़ेंगे। इस घटना से निराश होने की जरूरत नहीं है। शेष|पेज 15





बल्कि दोगुनी ताकत से नक्सलियों का मुकाबला करने की हिम्मत जुटाने का वक्त है। लड़ाई सिर्फ छत्तीसगढ़ की नहीं है, बल्कि पूरे देश की है। सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में कब, किसके साथ कौन सी घटना घट जाए यह कोई नहीं जानता। एलईडी कब फट जाए यह कोई नहीं जानता, मेरी गाड़ी के नीचे भी फट सकता है। इसलिए हम हमेशा दिमागी तौर पर तैयार रहते हैं। हम हिम्मत से आगे बढ़ेंगे। इस बीच मंगलवार रात करीब 11 बजे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहिर रायपुर पहुंच गए। वे कल घटना की समीक्षा के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि भी देंगे।

मनोरंजन लंका, पुरी (ओडिशा)

शोभित शर्मा, गाजियाबाद (यूपी)

चंद्रा एचएस, हासन (कर्नाटक)

एंटी लैंडमाइन व्हीकल की क्षमता 40 किलो विस्फोटक झेलने की, नक्सली लगा रहे इससे चार गुना ज्यादा

मोहम्मद इमरान नेवी|जगदलपुर. सरकार ने फोर्स के जवानों को 2005-06 में माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल दिए थे लेकिन ये व्हीकल भी जवानों को नहीं बचा पा रहे हैं। यह पहला मौका नहीं है जब इस वाहन में सवार जवान विस्फोट के बाद शहीद हुए हैं। जवानों को सरकार ने जो माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल उपलब्ध कराया है, वह 40 से 60 किलो तक के आईईडी झेल सकता है लेकिन नक्सलियों ने इसका तोड़ दस साल पहले बस्तर में एमपीव्ही को तैनात किए जाने के सातवें दिन ही निकाल लिया था और इसे विस्फोट कर उड़ा दिया था। सुकमा जिले के किस्टाराम में एमपीव्ही का उड़ जाना पहली घटना नहीं है। इससे पहले नक्सलियों ने बीजापुर में माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल पर शेष|पेज 15



निशाना साधा था, जिसमें सात जवानों की मौत हुई थी। 2013 में बचेली के पास नक्सलियों ने निशाना बनाया था। उस समय गाड़ी में 14 जवान सवार थे। बताया जा रहा है कि उस समय 25 किलो के विस्फोटक के इस्तेमाल होने के कारण गाड़ी को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। इससे पहले वर्ष 2011 में दंतेवाड़ा के गाटम में एमपीव्ही पर नक्सली हमले में दस जवान शहीद हो गए थे, जिसमें 8 एसपीओ शामिल थे।



हर जगह तोड़ निकाल लिया नक्सलियों ने

एमपीव्ही को उड़ाने का तोड़ नक्सलियों ने बस्तर से ही ढूंढा था और फिर इसका प्रयोग करते हुए वर्ष 2012 में झारखंड के गढ़वा एमपीव्ही को उड़ाकर 13 जवानों को शहीद कर दिया था।

अभी 20 एमपीव्ही, जो हमलों को झेलने के लिए कमजोर

छत्तीसगढ़ में नक्सल आपरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो नक्सल प्रभावित जिलों में अभी 20 से ज्यादा माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह गाड़ी पिछले दस साल से नक्सल मोर्चे पर तैनात है। इनका उपयोग जवान नक्सलियों की गोली से बचने के रूप में कर रहे हैं। जवानों को भी पता है कि ज्यादा मात्रा में बारूद का उपयोग कर नक्सली इसे उड़ा सकते हैं लेकिन जवान मजबूरी में इसमें सवार हो रहे है।



क्षमता से ज्यादा विस्फोटक से नुकसान हो जाता है

एमपीव्ही जवानों के लिए कापी मददगार साबित होता है लेकिन कई बार इसकी क्षमता से ज्यादा विस्फोटक का इस्तेमाल होने से इससे नुकसान भी हो जाता है। इसे ऐसे समझें कि एक जवान ने बुलेट प्रूफ जैकेट पहनी है और 200 मीटर दूर से गोली चलेगी तो जवान घायल भी नहीं होगा लेकिन 5 मीटर की दूरी से चलने पर बड़ा बुलेट प्रूफ जैकेट में भी जवान को बड़ा नुकसान होगा।

संजय कुमार अरोरा, आईजी सीआरपीएफ

जब-जब कहा नक्सली खात्मे की ओर, तब-तब बड़े हमले

2 जनवरी 2018 : डीजीपी उपाध्याय, डीजी नक्सल ऑपरेशन डीएम अवस्थी ने कहा कि बहुत जल्द बस्तर नक्सल मुक्त होगा।

हमला 24 जनवरी 2018 (नारायणपुर) : इरपानार में 4 जवान शहीद, 9 घायल 24 जनवरी 2018 (बीजापुर) : बासागुड़ा में आईईडी ब्लास्ट, 2 जवान घायल।

इस वर्ष बजट सत्र में गृहमंत्री पैकरा ने विधानसभा में कहा कि जल्द ही बस्तर नक्सल मुक्त होगा।

हमला 18 फरवरी 2018 :भेज्जी-चिंतागुफा में 2 जवान शहीद, 1 नक्सली ढेर, 2 ग्रामीणों की मौत 1 मार्च 2018 : उसूर व पामेड़ में 10 नक्सली ढेर, जवान शहीद 7 मार्च 2018: रावघाट मेंे 2 जवान शहीद।

सुकमा में नक्सली हमला दुखद है। देश बहादुर जवानों को सैल्यूट करता है। पूरा देश शहीदों के परिजनों के साथ है। -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

11 मार्च 2018 : दंतेवाड़ा से लोक सुराज अभियान शुरू करते हुए मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि 2022 तक बस्तर को नक्सल मुक्त हो जाएगा।

हमला 13 मार्च : नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 9 जवान शहीद 11 मार्च 2017 : हमले में सीआरपीएफ के 11 जवान शहीद।

देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर सरकार की नीतियां त्रुटिपूर्ण है। सुकमा की नक्सली घटना दिखाती है कि देश की आंतरिक सुरक्षा की हालत बिगड़ती जा रही है।''-राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष

रमन सरकार की गलत नीतियों के कारण आंतरिक सुरक्षा के खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। नेतृत्व में इच्छाशक्ति के अभाव, सूचना तंत्र की विफलता और सुरक्षाबलों के पास उचित संसाधनों के अभाव के कारण माओवादी हिंसा बढ़ रहा है।'' - भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ

यूबीजीएल के तीनों गोले फूटे नहीं, वरना मारे जाते नक्सली

जवानों ने किस्टाराम में सुबह-सुबह ही नदी के किनारे नक्सलियों को देख लिया था। जवानों ने तुरंत ही एक के बाद एक तीन यूबीजीएल के गोले नक्सलियों पर दागे लेकिन एक भी नहीं फूटा। यदि इनमें से एक भी गोला फूट गया होता तो आधे नक्सली मौके पर ही मारे जाते। अगर तीनों गोले फूट गए होते तो सौ की संख्या में आए सभी नक्सली मारे जाते। यूबीजीएल 25 सेमी लंबा लांचर है, जो एके 47 और इंसास राइफल से दागा जाता है। इससे एक मिनट में 5 से 7 गोले 400 मीटर की दूरी तक निशाना साधकर दागे जा सकते हैं। करीब डेढ़ किलो वजनी इस गोले से जंगलों में छिपे या पहाड़ियों पर मौजूद दुश्मनों को निशाना बनाया जा सकता है। यह जहां गिरता है, वहां 8 मीटर तक के दायरे को तहस-नहस कर देता है।

निर्णायक कार्रवाई हाेती रहेगी, बातचीत की ठोस पहल तो कर सकते हैं

नक्सली
हिंसा छत्तीसगढ़ के लिए अब आम घटनाओं जैसी हो गई है। पर इनसे होने वाले नुकसान को तो सामान्य नहीं कहा जा सकता। शहादत के आंकड़े अब भयभीत करने वाले हो गए हैं। 2005 के बाद से अब तक 1928 जवानों को हमने नक्सली हिंसा में खो दिया है। जाहिर है, सरकारें लड़ रही हैं। लेकिन क्या यह निर्णायक लड़ाई जैसी है? बड़ा सवाल है। रातों रात बदलाव नहीं आ सकता। सही है। रातों रात समस्या पूरी तरह खत्म भी नहीं हो जाएगी। सामाजिक, आर्थिक और कानूनी मोर्चे पर जो काम हो रहे हैं, वे होते रहेंगे। पर एक बात जो पूरी तरह खटकती है, वह है राजनीतिक पहल की। जब सारे लोगों से बातचीत की पहल हो सकती है तो नक्सलियों से क्यों नहीं? केंद्र हो या राज्य सरकार, एक बार बातचीत का रास्ता अपनाने से उम्मीद बनती है तो क्या बुरा है। इसलिए बातचीत के रास्ते को अपनाने में कोई बुराई नहीं है। वरना, शहादत की संख्या विचलित करती रहेगी।

घायल जवान ने बताया- धमाके के बाद करीब 50 फीट दूर गिरा

नक्सली हमले में गंभीर रूप से जख्मी मदन कुमार ने रायपुर में बताया कि ब्लास्ट के बाद ऐसा लगा कि कान के परदे फट गए। वे गाड़ी से 40 से 50 फीट दूर जा गिरे। वह शायद एक घंटे तक बेहोश रहा। जब होश आया तो लगा कि कान का परदा तो नहीं फट गया है। फिर साथियों ने बातचीत की तो लगा कि उनकी जान बच गई है। पहली गाड़ी आईईईडी की चपेट में आ गई। सभी जवान इसी गाड़ी में बैठे थे। पीछे गाड़ी में बैठे जवानों ने ब्लास्ट के बाद नक्सलियों पर फायरिंग भी की, लेकिन वे भाग निकले।

पढ़ंे छत्तीसगढ़ पेज

कोर एरिया पलौदी में कैंप खुलने से बेचैन नक्सली 3 महीने से ताक में थे, फोर्स को डिगाने के लिए किया यह हमला

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