Hindi News »Chhatisgarh »Raipur »News» पेज 1 के शेष

पेज 1 के शेष

सुबह मुठभेड़ में जान बचाकर भागे नक्सलियों ने 4 घंटे बाद उड़ाई फोर्स की एंटी लैंडमाइन, 9 शहीद 10 नक्सली मारे थे, यह बदले...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 14, 2018, 04:25 AM IST

सुबह मुठभेड़ में जान बचाकर भागे नक्सलियों ने 4 घंटे बाद उड़ाई फोर्स की एंटी लैंडमाइन, 9 शहीद

10 नक्सली मारे थे, यह बदले का हमला: होली के दिन 2 मार्च को तेलंगाना-छत्तीसगढ़ की सीमा पर ग्रेहाउंड और स्टेट पुलिस ने नक्सलियों की शादी के दौरान हमला किया था। इस दौरान फोर्स ने 10 नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें 6 महिला नक्सली भी थीं। माना जा रहा है कि नक्सलियों ने बौखलाहट में यह वारदात की है। 7 मार्च को आईईडी ब्लास्ट में कांकेर में रावघाट थाना के किलेनार इलाके में घात लगाए नक्सलियों ने बीएसएफ जवानों पर हमला कर दिया था। इसमें बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट व एक जवान शहीद हो गए थे।

पलौदी गांव में मौजूद थे 100 से अधिक नक्सली : सूत्रों के मुताबिक, सीआरपीएफ जवानों के कैंप से निकलने से लेकर वापस लौटने तक पूरे रोडमैप के बारे में नक्सलियों को जानकारी थी। कैंप लौट रहे जवान आसानी से उनका निशाना बन गए। जब यह हमला हुआ, करीब के गांव पलौदी में 100 से अधिक नक्सली मौजूद थे। यानी उनकी तैयारी थी कि अगर विस्फोट से बच गए जवान अगर मोर्चा संभालते हैं तो उन पर हथियारों से हमला किया जाता।

छुट्टी से लौटे जवानों को छोड़ने कैंप जा रहे थे, तभी हमला : सुबह मुठभेड़ के बाद जवान सुरक्षित किस्टारम कैंप पहुंच गए थे, लेकिन दोपहर में वे दोबारा निकले। बताया जा रहा है कि पलौदी कैंप के 12 जवान छुट्‌टी से लौटे थे। इन्हें कैंप तक छोड़ने के लिए दोपहर को एक पार्टी कैंप से निकली और इसी दौरान नक्सलियों ने एमपीवी को उड़ा दिया। जब यह हमला हुआ, तब सुकमा एसपी अभिषेक मीणा और एएसपी नक्सल अॉपरेशन शलभ सिंह किस्टारम कैंप में ही थे। वे भी तत्काल मौके पर पहुंचे।

ट्रैक्टर में डालकर लाए गए शहीदों शव : नक्सली विस्फोट से माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल के परखच्चे उड़े तो इसके बंकर में सवार जवानों के शव क्षत-विक्षत हो गए थे। घायल जवानों को किस्टारम कैंप लाया गया। इसके कुछ देर बाद शहीद जवानों के शव ट्रैक्टर में डालकर किस्टारम कैंप लाया गया। शाम 5.30 बजे हेलीकॉप्टर से शहीदों के शव रायपुर भेजे गए।

अब तक की बड़ी घटनाएं

24 अप्रैल 2017 : सुकमा में सीआरपीएफ के 26 जवान शहीद।

मार्च 2017 : लैंडमाइन ब्लास्ट में 7 जवान शहीद।

11 मार्च 2017: भेज्जी में हमला, 11 जवान शहीद

30 मार्च 2016: दंतेवाड़ा के मालेवाड़ा में 7 जवान शहीद

अप्रैल 2015: बारूदी सुरंग विस्फोट में 4 जवान शहीद हो गए और आठ जवान घायल हो गए थे।

अप्रैल 2014 : बस्तर में एक बड़ा नक्सली हमला हुआ था, जिसमें पांच जवान शहीद हो गए थे, जबकि 20 लोग घायल हो गए थे।

28 फरवरी 2014: दंतेवाड़ा के कुआकोंडा थाना क्षेत्र में रोड ओपनिंग के लिए निकले जवानों पर हमला, 5 शहीद

11 मार्च 2014: टाहकवाड़ा में 20 जवान शहीद

25 मई 2013: झीरम में कांग्रेस के बड़े नेताओं समेत 32 लोगों को मारा

12 मई 2012: सुकमा में दूरदर्शन केंद्र पर हमला, 4 जवान शहीद

जून 2011: दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट, 10 पुलिसकर्मी शहीद

17 मई 2010: दंतेवाड़ा से सुकमा जा रहे जवानों पर हमला, 36 जवान शहीद इसमें 12 एसपीओ।

6 अप्रैल, 2010: सुकमा के ताड़मेटला में 76 सीआरपीएफ जवानों को मौत की नींद सुला दिया

12 जुलाई, 2009 : राजनांदगांव में एंबुश में पुलिस अधीक्षक वीके चौबे सहित 29 जवान शहीद हुए।

अगस्त 2007 : ताड़मेटला में मुठभेड़ में थानेदार सहित 12 जवान शहीद हुए।

जुलाई 2007 : एर्राबोर अंतर्गत उरपलमेटा एंबुश में 23 सुरक्षाकर्मी मारे गए।

सितम्बर 2005 : गंगालूर रोड पर एंटी-लैंडमाइन वाहन के ब्लास्ट 23 जवान शहीद हुए थे।

6 अप्रैल 2010: सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हुए।

एंटी लैंडमाइन व्हीकल की क्षमता 40 किलो विस्फोटक झेलने की, नक्सली लगा रहे इससे चार गुना ज्यादा

निशाना साधा था, जिसमें सात जवानों की मौत हुई थी। 2013 में बचेली के पास नक्सलियों ने निशाना बनाया था। उस समय गाड़ी में 14 जवान सवार थे। बताया जा रहा है कि उस समय 25 किलो के विस्फोटक के इस्तेमाल होने के कारण गाड़ी को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। इससे पहले वर्ष 2011 में दंतेवाड़ा के गाटम में एमपीव्ही पर नक्सली हमले में दस जवान शहीद हो गए थे, जिसमें 8 एसपीओ शामिल थे।

हर जगह तोड़ निकाल लिया नक्सलियों ने एमपीव्ही को उड़ाने का तोड़ नक्सलियों ने बस्तर से ही ढूंढा था और फिर इसका प्रयोग करते हुए वर्ष 2012 में झारखंड के गढ़वा एमपीव्ही को उड़ाकर 13 जवानों को शहीद कर दिया था।

अभी 20 एमपीव्ही, जो हमलों को झेलने के लिए कमजोर : छत्तीसगढ़ में नक्सल आपरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो नक्सल प्रभावित जिलों में अभी 20 से ज्यादा माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह गाड़ी पिछले दस साल से नक्सल मोर्चे पर तैनात है। इनका उपयोग जवान नक्सलियों की गोली से बचने के रूप में कर रहे हैं। जवानों को भी पता है कि ज्यादा मात्रा में बारूद का उपयोग कर नक्सली इसे उड़ा सकते हैं लेकिन जवान मजबूरी में इसमें सवार हो रहे है।

क्षमता से ज्यादा विस्फोटक से नुकसान हो जाता है : एमपीव्ही जवानों के लिए कापी मददगार साबित होता है लेकिन कई बार इसकी क्षमता से ज्यादा विस्फोटक का इस्तेमाल होने से इससे नुकसान भी हो जाता है। इसे ऐसे समझें कि एक जवान ने बुलेट प्रूफ जैकेट पहनी है और 200 मीटर दूर से गोली चलेगी तो जवान घायल भी नहीं होगा लेकिन 5 मीटर की दूरी से चलने पर बड़ा बुलेट प्रूफ जैकेट में भी जवान को बड़ा नुकसान होगा।

संजय कुमार अरोरा, आईजी सीआरपीएफ

आपात बैठक : मुख्यमंत्री रमन ने दिए ऑपरेशन तेज करने के निर्देश

बल्कि दोगुनी ताकत से नक्सलियों का मुकाबला करने की हिम्मत जुटाने का वक्त है। लड़ाई सिर्फ छत्तीसगढ़ की नहीं है, बल्कि पूरे देश की है। सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में कब, किसके साथ कौन सी घटना घट जाए यह कोई नहीं जानता। एलईडी कब फट जाए यह कोई नहीं जानता, मेरी गाड़ी के नीचे भी फट सकता है। इसलिए हम हमेशा दिमागी तौर पर तैयार रहते हैं। हम हिम्मत से आगे बढ़ेंगे। इस बीच मंगलवार रात करीब 11 बजे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहिर रायपुर पहुंच गए। वे कल घटना की समीक्षा के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि भी देंगे।

एलओयू के जरिए गारंटी देने पर रिजर्व बैंक ने लगाई रोक

रिजर्व बैंक की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि आयात के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट और बैंक गारंटी की सुविधा जारी रहेगी। निर्यातकों के संगठन फियो के महानिदेशक अजय सहाय के अनुसार बैंक गारंटी और लेटर ऑफ क्रेडिट की सुविधा जारी रहने से निर्यातकों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।

नीरव को 6 साल में 1,213 फर्जी एलओयू जारी हुए : वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि नीरव मोदी ने पीएनबी की ब्रेडी हाउस ब्रांच से पहली बार 10 मार्च 2011 को फर्जी एलओयू लिया था। इसके बाद 6 साल में उसने फर्जी तरीके से 1,212 और एलओयू लिए। आखिरी फर्जी एलओयू 23 मई 2017 को जारी हुआ था। इस दौरान नीरव की कंपनियों को 53 सही एलओयू भी जारी किए गए थे। पहला सही एलओयू 5 मार्च 2011 को और आखिरी 6 नवंबर 2017 को जारी हुआ था।

अल-नीनो के कारण सामान्य से कम रह सकती है मानसून की बारिश

के कुछ इलाकों में सूखे की स्थिति बन जाती है, जबकि दक्षिणी अमेरिका में सामान्य से अधिक बारिश होती है। काइल ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी इलाकों में भी मौसम शुष्क रह सकता है। इसका असर वहां गेहूं की फसलों पर होगा। सूखा झेल रहे अर्जेंटीना में दो हफ्ते में बारिश हो सकती है, लेकिन सोयाबीन की फसल के लिए यह काफी लेट हो चुकी है। गर्म मौसम के कारण पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में गेहूं की पैदावार 30% कम रही थी।

मोबाइल, बैंक खातों कोे 31 मार्च तक आधार लिंक कराना जरूरी नहीं...

आधार नहीं होने पर सेवाएं तो मिलती रहेंगी, लेकिन बिना सब्सिडी के। आधार लिंक की डेडलाइन 4 महीने में दूसरी बार बढ़ी है। पिछले साल आधार लिंक के लिए आखिरी तारीख 31 दिसंबर रखी गई थी। पर सुप्रीम कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 31 मार्च 2018 कर दिया था।

कोर्ट के इन 6 सवालों पर उलझी सरकार

यूजीसी के कुछ प्रोग्राम में इसको अनिवार्य क्यों किया गया है? आयकर रिटर्न्स भरने के लिए क्यों अनिवार्य है?

बैंक अकाउंट, मोबाइल नंबर, सामाजिक योजनाओं के लिए आधार कार्ड अनिवार्य क्यों?

क्या आधार कार्ड रूल ऑफ लॉ के मुताबिक है? आधार कार्ड को मनी बिल की तरह क्यों पेश किया?

क्या लोकतंत्र में कोई व्यक्ति अपना फिंगर प्रिंट या शरीर के किसी हिस्से का निशान देने के लिए बाध्य है?

क्या इस डिजिटल दुनिया में किसी व्यक्ति का निजी डेटा सुरक्षित रखा भी जा सकता है या नहीं?

आधार कार्ड के लिए अपनी जानकारी साझा करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं?

एसबीआई ने खाते में मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाला चार्ज घटाया

41.16 लाख बचत बैंक खाते बंद किए थे।

मंथली एवरेज बैलेंस नियम : एसबीआई ने 1 अक्टूबर 2017 से मेट्रो और शहरी क्षेत्रों की शाखाओं में बैंक खाते में 3,000 रुपए रखना अनिवार्य किया था। अर्धशहरी क्षेत्रों की शाखाओं में यह सीमा 2,000 रु. और गांवों-कस्बों में 1
पेज 1 के शेष

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Raipur News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: पेज 1 के शेष
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×