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कांजी हाउस में 15 की जगह ठूंसे 70 मवेशी, महीनेभर में 100 की हुई मौत

शहर से छोड़े गए मवेशी गांव के कांजी हाउस में पहुंचाए गए, सोमवार को भी पांच की मौत।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 14, 2017, 06:39 AM IST

  • कांजी हाउस में 15 की जगह ठूंसे 70 मवेशी, महीनेभर में 100 की हुई मौत

    महासमुंद।गौशाला के बाद अब कांजी हाउस में लगातार मवेशी मर रहे हैं। दरअसल, शहर के मवेशियों काे गांवों में छोड़ने के कारण जरूरत से ज्यादा मवेशी हो गए हैं। इसके कारण खेतों के फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यही वजह है कि किसान मवेशियों को कांजी हाउस तक पहुंचा रहे हैं। लेकिन कांजी हाउस गांव के हिसाब से बनाई गई है।

    - कांजी हाउस में 10 से 15 मवेशी रखने की जगह है। जबकि यहां 70 से 80 मवेशी रखे गए हैं। मवेशियों के लिए चारा और पानी की भी व्यवस्था लेकिन कम जगह होने के कारण मवेशियों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।

    - सोमवार को कांजी हाउस में पांच मवेशियों की मौत हो गई। ग्रामीणों ने बताया की रोजाना कांजी हाउस में 3 से 4 मवेशी मर रहे हैं, महीनेभर में 100 से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है।
    जानिए ऐसे गांव पहुंचे मवेशी
    - गौशालाकांड के बाद संचालकों ने मवेशियों को गांव और जंगलों में ले जाकर छोड़ दिए। ग्रामीण भरत चंद्राकर ने बताया कि मवेशियों की मौत का सबसे जिम्मेदारी यहां के कुछ लोग हैं, जो मवेशी तो रखे हैं लेकिन उन्हें कांजी हाउस से छुड़ाने नहीं आते।

    - ग्राम पंचायत सचिव चंद्रमणी चंद्राकर ने बताया कि शासन से फंड नहीं मिलने के अलावा लगातार गांव में मवेशियों की संख्या बढ़ गई है।
    पंचायत पर पर्याप्त चारा देेने का आरोप
    - थनवारयादव, नरेश निषाद, इतवारी निर्मलकर, भुपेंद्र निषाद, भरत यादव, टीकम चंद्राकर कुंदन चंद्राकर ने पंचायत पर आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायत द्वारा जानवरों को पर्याप्त चारा नहीं दी जाती, इसके अलावा मवेशियों को कांजी हाउस में ठूंस-ठूंस कर रख दिया गया है।

    - पंचायत और कांजीहाउस भवन लगा हुआ है, इधर बजरंग दल के विजय महतो ने कहा गाय की असामान्य मौत को किसी भी रूप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक महीने में 100 मौत होना भारी लापरवाही है, दोषियों पर एफआईआर किया जाएगा।
    ग्रामीण ही मिलकर चला रहे कांजी हाउस
    - ग्रामीणों ने बताया की कांजी हाउस कई सालों से चल रहा है, लेकिन ऐसी नौबत कभी नहीं आई। गांव के ही कई लोग अपने मवेशी को लावरिस छोड़ दिए है, कांजी हाउस में जाने के बाद वापस लेने नहीं आते। इसके अलावा भारी संख्या में शहरों की ओर से यहां मवेशी छोड़े गए हैं। ग्रामीण ही मिलकर चला रहे हैं।

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