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एक 52 दिन तो दूसरी आठ महीने तक मुुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहीं काबिज / एक 52 दिन तो दूसरी आठ महीने तक मुुख्यमंत्री की कुर्सी पर रहीं काबिज

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 02:36 AM IST

Raipur News - इन्होंने राजनीति विज्ञान और संस्कृत में अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इन्होंने पंजाब...

Kendri News - a 52 day long chief minister39s chair in the second eight months
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इन्होंने राजनीति विज्ञान और संस्कृत में अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की। भाषण प्रतियोगिताओं, वाद विवाद प्रतियोगिताओं, नाटकों और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में कई पुरस्कार भी जीते हैं।











छात्र राजनीति से राजनीतिक सफर शुरू कर सुषमा 1977 में पहली बार चुनाव लड़ीं और इन्हें चौधरी देवीलाल की सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। इन्हें में अटल बिहारी वाजपेयी की में सरकार में ‘सूचना और प्रसारण मंत्री’ बनाया गया था। ये कुछ समय के लिए दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री भी रहीं। 1999 के लोकसभा चुनावों में कर्नाटक के बेल्लारी से कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा था। 15वीं लोकसभा में विपक्ष की नेता रहीं। वे वर्तमान में विदेश मामलों की केंद्रीय मंत्री हैं।

भा रत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज शुरुआत से ही संघ और बीजेपी से जुड़ी रही हैं। वह एक प्रखर वक्ता के रूप में मानी जाती हैं।

शुरुआती जीवन

सुषमा स्वराज का जन्म हरदेव शर्मा और लक्ष्मी देवी के यहां अंबाला छावनी में हुआ था। सुषमा स्वराज ने 13 जुलाई 1975 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एक वरिष्ठ वकील स्वराज कौशल से विवाह किया। स्वराज दम्पत्ति की एक पुत्री है जिसका नाम बांसुरी है। इस समय वह लंदन के इनर टेम्पल में वकालत कर रही है।

2008

और 2010 में दो बार सर्वश्रेष्ठ संसदीय पुरस्कार मिला था। वह उत्कृष्ट संसदीय पुरस्कार को प्राप्त करने वाली पहली और एकमात्र महिला सांसद हैं।

1977

में जब वह 25 साल की थीं

तब वह भारत की सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनी थीं।

बीजेपी की दो कद्दावर नेत्रियां सुषमा स्वराज और उमा भारती ने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का एेलान कर दिया है। हालांकि दोनों ने ये भी कहा है कि इसका मतलब यह नहीं है कि सक्रिय राजनीति से सन्यास ले रही हैं।

जानते हैं सुषमा स्वराज और उमा भारती के जीवन और कॅरिअर से जुड़ी रोचक जानकारी।













उमा भारती का राजनेतिक कार्यकाल ग्वालियर की राजमाता विजयाराजे सिंधिया के सानिध्य में शुरू हुआ। ‘राम जन्मभूमि आन्दोलन’ में प्रमुख भूमिका निभाई थी। 2003 के विधानसभा चुनाव में वे मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री चुनी गईं। लगभग 9 महीने बाद इन्हें त्यागपत्र देना पड़ा। इसके कुछ समय बाद उमा ने बीजेपी छोड़ दी और ‘भारतीय जन शक्ति पार्टी’ नाम से अलग दल बनाया। 6 साल बाद 2011 में उमा की बीजेपी में वापसी हुई। 2014 के लोकसभा चुनाव में झांसी से विजय प्राप्त की और केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुईं।

1989

खजुराहो से अपना पहला लोक

सभा चुनाव जीता। इससे पहले वे 1984 में चुनाव लड़ी थीं, लेकिन हार गई थीं।

2003

मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी। 2005 बीजेपी से निष्काषित किया गया और 7 जून 2011 को इनकी बीजेपी में वापसी हुईं।

राजनीति

उ मा भारती को कट्टर धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। इस समय वह केन्द्र में जल संसाधन और गंगा सफाई मंत्री हैं।

शुरुआती जीवन

उमा भारती का जन्म टीकमगढ़ जिले में डुंडा नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता का नाम गुलाब सिंह और माता का नाम बेटीबाई था। ये अपने 4 भाइयों और 2 बहनों में सबसे छोटी थीं। उमा भारती ने अविवाहित रहकर अपना जीवन धर्म के प्रचार-प्रसार में लगाने का व्रत लिया हुआ है। वह बचपन से ही निडर और बेबाक थीं।

उमा भारती

जन्म - 3 मई, 1959

स्थान - टीकमगढ़, म.प्र.

पढ़ाई

उमा भारती की शिक्षा छठी कक्षा तक हुई। बचपन में ही उन्होंने हिन्दू धर्मग्रन्थ कंठस्थ कर लिए और हिन्दू महाकाव्यों और पौराणिक कथाओं का पठन किया था। उमा ने अपने विचारों को किताबों में भी संग्रहित किया है। उनकी अब तक तीन किताबें आ चुकी हैं।

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