--Advertisement--

नवजात को संक्रमण के खतरे से बचाने डोनेट करते हैं बेबी किट, प्रसूताओं को हाइजीन के लिए करते हैं जगरूक

महावीर इंटरकॉन्टिनेंटल सर्विस ऑर्गनाइजेशन ने की पहल, सरकारी अस्पतालों में रोज 20 से ज्यादा बेबी किट करते हैं डोनेट

Danik Bhaskar | Aug 23, 2018, 04:28 PM IST
बाएं न्यू बॉर्न बेबी का प्रतीक बाएं न्यू बॉर्न बेबी का प्रतीक

रायपुर। नवजात बच्चों को इंफेक्शन के खतरे से बचाने के लिए महावीर इंटरकॉन्टिनेंटल सर्विस ऑर्गनाइजेशन ने पहल की है। इसके तहत ऑर्गनाइजेशन के सदस्य जिला अस्पताल में जन्मे नवजात के लिए बेबी किट देते हैं। साथ ही माताओं को समझाइश देते हैं कि वे साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।

महीनेभर पहले शुरू की गई इस पहल के बारे में सदस्यों ने बताया कि कई अस्पतालों में बच्चे के जन्म के बाद सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता और उसे गंदे या पुराने कपड़ों में लपेट दिया जाता है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए तय किया कि जिला अस्पतालों में नवजात बच्चों को बेबी किट डोनेट करेंगे। बेबी किट में झबला, ओढ़ने और बिछाने वाली चादर, रबर शीट, नैपकिन सहित अन्य जरूरत सामान हैं। इन सामानों के इस्तेमाल करने का तरीका भी बच्चे की मां को बताया जा जाता है।

10 महिलाओं का ग्रुप बनाता है बेबी किट

अस्पतालों में जरूरत के मुताबिक बेबी किट पहुंचाई जाती है। इसके लिए बाकायदा रिकॉर्ड मेंटेन किया जाता है। एक दिन में 20 से ज्यादा बेबी किट बांटी जाती है। संस्था की अनिता खंडेलवाल ने बताया कि किट बनाने के लिए दस महिलाओं का ग्रुप बनाया गया है। इन महिलाओं को कपड़े, धागा सहित अन्य मटेरियल प्रोवाइड किए जाते हैं। किट बनाने में सफाई का खास ध्यान रखा जाता है। ये सभी महिलाएं पहले मजदूरी कर अपना परिवार का गुजर-बसर करती थीं, लेकिन रोजगार मिलने के बाद वे अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं।


500 से ज्यादा बेबी किट कर चुके हैं डोनेट
ऑर्गनाइजेशन से कुछ एक्टिव मेंबर जुड़े हैं, जो बेबी किट के लिए फंड प्रोवाइड करते हैं। इनमें अनिता, लोकेश कावड़िया, अशोक जैन, कमल, नरेंद्र आचार्य, फूलचंद सहित दूसरे सदस्य हैं। अब तक शहर के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में 500 से ज्यादा बेबी किट बांटे जा चुके हैं। अनिता ने बताया कि हमारा मकसद डोनेशन के इस आंकड़े को बढ़ाना है ताकि इंफेक्शन के कारण होने वाली बच्चों की मौतों को रोका जा सके।