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ऐन तत्काल के समय रेलवे सर्वर डाउन तब ट्रेन टिकट बुकिंग एप से ही संभव / ऐन तत्काल के समय रेलवे सर्वर डाउन तब ट्रेन टिकट बुकिंग एप से ही संभव

News - ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर | रायपुर त्योहारी सीजन की वजह से तत्काल कोटे की सीटें के लिए मारामारी बढ़ने के साथ ही ऐन...

Oct 22, 2018, 03:10 AM IST
ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर | रायपुर

त्योहारी सीजन की वजह से तत्काल कोटे की सीटें के लिए मारामारी बढ़ने के साथ ही ऐन बुकिंग के समय रोजाना सुबह 10 से 12 बजे तक रेलवे का सर्वर इस तरह डाउन हो रहा है कि लोग टिकट बुक नहीं करवा पा रहे हैं और तत्काल बंद होने लगा है। लगातार शिकायत के बाद राजधानी के दर्जनभर लोगों ने रेलमंत्री को ट्वीट कर इसकी शिकायत की है। इसके बाद रेलवे ने अपने एप्लीकेशन (एप) के कई फीचर्स एडवांस कर इससे टिकट बुकिंग शुरू कर दी है। मोबाइल एप से टिकट बुकिंग फिलहाल ज्यादा आसान हुई है।

रेलवे ने आरक्षित टिकट बुकिंग के लिए रेल कनेक्ट एप को अपडेट किया है और ई-टिकटिंग के लिए कई फीचर्स जोड़े हैं। एप में यह सिस्टम भी है कि अगर टिकट कंफर्म नहीं हुई तो उसी रूट की दूसरी ट्रेन में सीट मिल सकती है। इसके लिए यात्रियों को शुल्क देना होगा। नए फीचर्स की वजह से अब यात्री एप के जरिये 5 मिनट में रिजर्व टिकट भी बुक कर सकते हैं। दरअसल तत्काल के लिए ठीक वक्त पर हजारों लोग रेलवे की साइट ओपन करते हैं, जिससे सर्वर डाउन हो रहा है। इसीलिए एप को मजबूत किया गया है। अफसरों ने बताया कि एक से टिकट का स्क्रीन शॉट भी ट्रेनों में मान्य किया जा रहा है। इसे ई-मेल से भी सेंड कर सकते हैं।

पेमेंट के कई विकल्प

आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट के एप से पेमेंट करने के लिए सभी तरह के आप्शन दिए गए हैं। डेबिट व क्रेडिट कार्ड के साथ ही वॉलेट और नेट बैंकिंग की सुविधा भी एक ही क्लिक पर हासिल की जा सकती है। जानकारी के मुताबिक टिकट बुकिंग की सुविधा वेबसाइट से अधिक एप में दी गई है। नए बदलाव में विकल्प स्कीम काफी मददगार है। अफसरों ने बताया कि विकल्प योजना ऑनलाइन व ई-टिकट पर ही लागू रहेगी।



क्योंकि ऐसे ही टिकट वेटिंग होने पर सीधे कैंसिल हो जाते हैं इसलिए सफर भी रद्द करना पड़ता है।

सीट भरने की कवायद :

ट्रेनों में खाली बर्थ काे भरने के लिए रेलवे कई तरह की कवायद कर रहा है। साथ ही वेटिंग टिकट रहने से रेलवे को रिफंड करने की मजबूरी है। जानकारी के मुताबिक इस स्कीम के तहत रेलवे को प्रति साल रिफंड के तौर पर दी जाने वाली 7 हजार 500 करोड़ रुपये की राशि बचेगी। रेलवे अफसरों का कहना है कि ट्रेनों में सीटें खाली हैं, तो उससे बेहतर यही होगा कि वेटिंग वाले यात्रियों को उन सीटों का अलॉटमेंट किया जाए।

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