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राजधानी में पीलिया से एक और व्यक्ति की मौत, एक माह में छठवीं जान गई

सीएमओ कार्यालय के नोडल अधिकारी डॉ. आरके चंद्रवंशी ने मौत की पुष्टि की।

Bhaskar News | Last Modified - May 01, 2018, 07:38 AM IST

  • राजधानी में पीलिया से एक और व्यक्ति की मौत, एक माह में छठवीं जान गई

    रायपुर. माेवा-कांपा के बाद अब आमासिवनी निवासी सोमेश मानिकपुरी (36) की मौत पीलिया से हो गई। इसके साथ ही एक माह के भीतर राजधानी में पीलिया से मरने वालों की संख्या बढ़कर 6 हो गई। सोमेश को देवेंद्रनगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया था। सीएमओ कार्यालय के नोडल अधिकारी डॉ. आरके चंद्रवंशी ने मौत की पुष्टि की। प्रभावित इलाके में स्वास्थ्य कैंप लगाया जाएगा।

    राजधानी में पीलिया से छठवीं मौत ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया है। मोवा, कांपा और गुढ़ियारी समेत कई इलाकों में पुरानी और नालियों में डूबी पाइपलाइन से सप्लाई किया जा रहा दूषित पानी इसकी वजह बताया जा चुका है। नगर निगम ने 20 दिन पहले सर्वे के बाद प्रस्ताव बनाया था कि पीलिया को रोकने के लिए पूरे शहर में कुल मिलाकर 50 किमी पाइपलाइनें बदलनी होंगी। इसमें 21 करोड़ रुपए खर्च होंगे, जिसका प्रस्ताव बनाकर 16 तारीख को मंत्रालय में नगरीय प्रशासन विभाग को भेज दिया गया। तकरीबन 15 दिन मंथन के बाद नगरीय प्रशासन विभाग ने यह कहकर फाइल निगम को दो दिन पहले लौटा दी है कि पहले इस बात की डिटेल भेजो कि कहां, कितने पैच में पाइप लाइन बदलोगे?

    अब फाइल लौटने के बाद इस योजना के मंजूर होने के आसार कम हो गए हैं। निगम अफसरों का कहना है कि फाइल जिन निर्देशों के साथ लौटाई गई, उनके आधार पर प्रस्ताव को फिर तैयार किया जा रहा है। इसमें 15 दिन भी लग सकते हैं। उसके बाद ही फाइल दोबारा भेजी जाएगी। फाइल की इस आवाजाही के बीच... राजधानी में मोवा-कांपा और आसपास पीलिया खतरनाक हो रहा है। चार हफ्तों में छह मौतों से प्रभावित इलाके में लोग सकते में आ गए हैं। सोमवार को हुई मौत के पीछे युवक के मल्टीपल आर्गन फैलियर को वजह बताई जा रही है लेकिन उसे पीलिया होने की भी पुष्टि हो चुकी है। नगर निगम के अफसर दावा कर रहे हैं कि मोवा-कांपा और आसपास के क्षेत्रों में पीलिया की शिकायत आने के बाद सारी पाइपलाइनें बदली जा चुकी हैं। इसके अलावा शहर में जहां-जहां पाइपलाइनों की दिक्कतें हैं उसे जोन स्तर पर बदलने की कार्रवाई की जा रही है। पाइपलाइन बदलने के बाद कोई नया केस अब तक नहीं आया है।

    जागरूक करने में भी फेल

    पिछले महीनेभर में स्वास्थ्य विभाग ने जांच कर पीलिया के 200 से ज्यादा मरीजों की पहचान की है। जिन इलाकों में पीलिया फैला है, वहां लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद पीलिया का फैलाव रोका नहीं जा सका है। सूत्रों के अनुसार इस मामले में नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल की कमी भी सामने आ रही है। स्वास्थ्य विभाग तथा नगर निगम का अमला लोगों को अस्पतालों में जाने के लिए प्रेरित ही नहीं कर पाया। ज्यादातर केस में सामने आया है कि मरीज झांड़फूक कराने या देसी इलाज कराने के बाद स्थिति गंभीर होने पर ही अस्पताल पहुंच रहे हैं।

    राजधानी में पीलिया के तीन कारण

    बैक्टीरिया

    ज्यादातर पीलिया एक तरह के रोगाणु की वजह से होती हैं। यह ए से ई तक अलग-अलग प्रकार के रोगाणु होते हैं। लम्बे समय तक यह बीमारी रहने पर यकृत पर प्रभाव पड़ने लगता है। और पीलिया की समस्या सामने आने लगती हैं।

    अल्कोहल

    ज्यादा शराब पीने का प्रभाव यकृत पर पड़ता हैं। ज्यादा दिनों तक शराब पीने से यकृत की बीमारी होती है। यह दो तरह का होता है। अल्कोहलिक हेपेटिटिस और अल्कोहलिक सिरहोसिस। इससे पीलिया की अशंक दोगुनी बढ़ जाती है।

    कोलेस्टासिस

    पित्तस्थिरता में पित्त का प्रवाह रुक जाता है। खुजली की शिकायत होने लगती है। नवजात में भी पीलिया इसी वजह से होती है। दरअसल, बच्चों का यकृत इतना सक्षम नहीं होता है कि वह खून में जमा बिलीरुबिन को कम कर सके।

    पित्त वाहिका में बाधा : यकृत और पित्ताशय से छोटी आंत तक एक तरल पदार्थ पित्त को ले जाने का काम पतली वाहिनियां करती हैं। इन्हें पित्त वाहिका कहते हैं। कई बार गॉल्स्टोन यानी पित्ताशय पथरी तथा वाहिका में सूजन आती है, यह बंद भी हो जाती है।

    रायपुर कमिश्नर रजत बंसल ने बताया कि मंत्रालय से प्रस्ताव डीटेल रिपोर्ट भेजने के लिए लौटा दिया है। डीटेल प्रस्ताव बनाया जा रहा है। मोवा-कांपा या शहर के दूसरे इलाके में नए केसेस नहीं मिल रहे हैं। अपने स्तर पर पाइपलाइन बदल रहे हैं।

    पीलिया के लक्षण

    - आंखों, नाखून और चेहरे में पीलापन।

    - भूख नहीं लगती है, उल्टियां होती है।

    - लगातार बुखार, पेट में भी थोड़ा दर्द।

    - पेशाब का रंग गहरा पीला हो जाता है।

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