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जेल शिफ्ट करते ही गैंगस्टर तपन के खिलाफ वसूली के लिए धमकाने का एक और केस दर्ज

अप्रैल में ही तपन को अंबिकापुर जेल शिफ्टिंग के लिए जारी हुआ था आदेश, जेल प्रबंधन ने दबाए रखा।

Bhaskar News | Last Modified - Jul 13, 2018, 07:09 AM IST

जेल शिफ्ट करते ही गैंगस्टर तपन के खिलाफ वसूली के लिए धमकाने का एक और केस दर्ज

भिलाई.गैंगस्टर तपन सरकार पर जेल वसूली के लिए फोन करने का एक और मामला उजागर हुआ है। माडल टाउन के फ्लोर मिल व्यापारी नीरज अग्रवाल ने मोहन नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है कि उसके बिजनेस पार्टनर रहे ज्ञानचंद गैंगस्टर के साथ मिलकर उससे पैसे उगाही के लगातार फोन पर धमकी दिलवा रहा है। उसका कहना है कि उसने ज्ञानचंद से 85 लाख ब्याज पर लिए थे। लेकिन पिछले 5 साल के अंदर दोगुने से ज्यादा पैसा वापस करने पर भी उसका मूल खत्म नहीं हुआ। बाद में तपन से फोन कराकर और पैसे की मांग कर रहा है। जबकि पिछले दिनों पुलिस जांच में उजागर हुए तपन के कारनामों के बाद जेल प्रबंधन ने दबाव में आकर गैंगस्टर को दुर्ग से अंबिकापुर जेल शिफ्ट कर दिया। पुलिस ने बताया कि, नीरज अग्रवाल ने तपन सरकार और उसके बिजनेस पार्टनर रहे ज्ञानचंद जैन व उसके बेटे सोहन जैन और अंकित जैन के खिलाफ मोहन नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। तपन उसे फोन करके धमकी दे रहा था।

बच्चे को उठवाने और हत्या करने की धमकी देता था तपन

व्यापारी ने पुलिस को बताया है कि, इतनी रकम पहुंचने के बाद भी जब उसके पैसे की पूर्ति नहीं हुई तो उन्होंने रकम वापसी के लिए आनाकानी शुरू दी। इस पर ज्ञानचंद के दोनों बेटे सोहन जैन और अंकित जैन गैंगस्टर तपन के नाम लेकर उसे धमकाने लगे। इस बीच उन्होंने कई दफा अपने फोन से तपन सरकार से बात भी कराई। इसी बीच तपन का सीधे उसके नंबरों पर फोन आना शुरू हो गया। व्यापारी ने बताया कि तपन रकम न देने पर उसके बच्चे उठवाने और उनकी हत्या करने धमकी देता था।

जेल के अंदर से ऑपरेट हो रहे गैंग का खुलासा होने के बाद की शिफ्टिंग
सूत्रों ने बताया कि तीन अप्रैल 2018 को ही तपन सरकार को दुर्ग से अंबिकापुर जेल शिफ्ट करने का आदेश आ गया था। लेकिन महादेव हत्याकांड के मुख्य आरोपी तपन सरकार की सांठगांठ से खूब फलफूल रहे जेल प्रबंधन के अधिकारी आदेश को दबाकर बैठ गए। इस बीच पद्मनाभपुर के जमीन व्यापारी ने दुर्ग कोतवाली और सुपेला थाने में तपन और उसके गुर्गों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया। आईजी जीपी सिंह ने एसआईटी गठन कर जांच में जेल प्रबंधन और गैंगस्टर तपन की सैटिंग उजागर की थी। तूल पकड़ते ही जेल मुख्यालय ने उसके रिलीविंग के आदेश जारी कर दिए।

तपन को डायरिया न हो इसलिए दुर्ग जेल से निकाला नहीं, जबकि विकल्प थे
डीआईजी जेल केके गुप्ता ने कहा, अंबिकापुर जेल में अप्रैल महीने के दौरान कैदियों में डायरिया की महामारी फैल गई थी। इसके चलते करीब 350 कैदी व हवालाती बीमार पड़ गए थे। उस दौरान तीन कैदियों की मौत भी हो गई थी और 9 कैदियों का अभी भी मेकाहारा में इलाज चल रहा था। इसके चलते प्रदेशभर की जेलों से अंबिकापुर जेल में शिफ्ट होने वाले प्रत्येक कैदी के ट्रांसफर को अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी थी। माहौल शांत होने पर उसके रिलीविंग ऑर्डर जारी किए गए हैं। जानकारों का कहना था कि अंबिकापुर जेल में दिक्कत थी तो उसे किसी ओर जेल में शिफ्ट किया जा सकता था।

व्यापारी शिकायत करने सीधे आईजी के पास गया तब रिपोर्ट दर्ज हुई
गैंगस्टर की धमकी व्यापारी नीरज अग्रवाल इतना डर गया कि उसने आईजी जीपी सिंह के पास शिकायत में अपने पार्टनर का जिक्र किया। लेकिन तपन का सीधे-सीधे नाम नहीं लिया। जब पुलिस अधिकारी ने उसकी सुरक्षा और संरक्षण का भरोसा दिया। तब मोहन नगर थाने में जाकर शिकायत दर्ज कराई। इस पुलिस ज्ञानचंद और उसके दोनों बेटों समेत तपन सरकार के खिलाफ 384,506,507 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है।

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