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कचरा महोत्सव की तारीफ पर सफाई में पिछड़े, सबसे बुरा हाल वेस्ट मैनेजमेंट का

नगर निगम ने भारी शोर-शराबे के साथ कचरा महोत्सव भी मनाया, लेकिन फायदा नहीं हुआ।

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 08:05 AM IST
bhaskar investigation on Raipur Swachh Survekshan 2018

रायपुर. स्वच्छता सर्वेक्षण में तीन शहरों की लिस्ट जारी होने के बाद यह भी संकेत मिले हैं कि देशभर की स्वच्छ शहरों की रैंकिंग में रायपुर टॉप-10 में भी जगह नहीं बना पाया है। यही नहीं, शहर को रैंकिंग के अलावा किसी तरह का अवार्ड भी नहीं मिला है। रायपुर क्यों पिछड़ा, इसे लेकर सरकारी एजेंसियां ही नहीं बल्कि शासन के अफसर भी दिनभर वजह तलाशने में लगे रहे। दिनभर के मंथन के बाद जो बातें सामने आई हैं, उनके मुताबिक सड़क से गलियों तक और मोहल्लों से कालोनियों तक, कचरा साफ करने का मामला अब तक किसी एजेंसी के काबू में नहीं है।

नगर निगम ने भारी शोर-शराबे के साथ कचरा महोत्सव भी मनाया, लेकिन फायदा नहीं हुआ। एक और बड़ी खामी यह भी सामने आई है कि नगर निगम राजधानी में लोगों के स्मार्ट फोन पर काफी कम स्वच्छता एप डाउनलोड कर पाया। इसलिए सर्वे एजेंसियों को लोगों का फीडबैक ही बहुत कम मिला, जो पिछड़ने की वजह बना।


सालिड वेस्ट मैनेजमेंट में बड़ी नाकामी

जानकारों ने बताया कि स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए सबसे ज्यादा नंबर सालिड वेस्ट मैनेजमेंट में मिलने थे और बड़ी नाकामी यहीं मिली। सर्वे से पहले जनवरी में रायपुर में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत सफाई और कचरा प्रबंधन के लिए निजी कंपनी को ठेका दिया गया। सामान्य सभा से प्रस्ताव पास होने के बाद कंपनी के साथ अनुबंध करने में ही निगम को तीन महीने लग गए। मार्च अंत में कंपनी के साथ अनुबंध हुआ और अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में कंपनी ने काम शुरू किया। कंपनी अब तक 30 वार्डों में भी ठीक से काम शुरू नहीं कर पाई है।

निगम ने केंद्र के भेजी रिपोर्ट में बताया था कि शहर में रोज 413 टन कचरा जनरेट होता है। महज 300 टन कचरा ट्रांसपोर्ट हो पाता है। 70 में से 20 वार्ड ऐसे हैं, जहां 100 प्रतिशत डोर टू डोर कचरा कलेक्शन हो पाता है। कचरे का डिस्पोज भी जीरो है। इसलिए सालिड वेस्ट मैनेजमेंट में रायपुर को नंबर मिलना मुश्किल था। हो सकता है कि निगम को नेगेटिव मार्किंग भी झेलनी पड़ी हो। क्योंकि, जिन 20 वार्डों को निगम ने सौ फीसदी डोर टू डोर कचरा कलेक्शन वाला वार्ड बताया जांच के दौरान दिल्ली की टीम को वह नहीं मिला।

सिर्फ 4 हजार सक्रिय सदस्य
स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान नगर निगम रायपुर ने पूरे शहर में घूम-घूमकर लोगों से स्वच्छता एप डाउनलोड करवाए। 14 लाखकी आ बादी वाले शहर में आठ से नौ लाख लोगों के पास स्मार्ट फोन हैं। इनमें से महज 14 हजार लोगों ने एप डाउनलोड किए। ज्यादातर लोगों ने इस एप को सिर्फ मोबाइल की शोभा बना ली। क्योंकि एप पर सक्रिय सदस्य बमुश्किल चार हजार है। स्वच्छता सर्वेक्षकों की टीम ने एप डाउनलोड करने वालों से शहर में स्वच्छता और एप को लेकर सवाल पूछे। स्वभाविक है जिन्होंने एप का उपयोग ही नहीं किया वे क्या फीडबैक देंगे। इस वजह से भी रैंकिंग पिछड़ी।


महोत्सव की तारीफ, लाभ नहीं
रायपुर नगर निगम ने कचरा महोत्सव मनाकर इनोवेटिव काम किया, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं मिला। पहली बार शहर में कचरा महोत्सव मनाया गया। इसके जरिए वेस्ट और कबाड़ से उपयोगी चीजें बनाना सिखाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में रायपुर के इस प्रयास की सराहना भी की। रायपुर को देखकर कुछ अन्य राज्यों में भी कचरे से वेस्ट बनाने का प्रयोग शुरू किया गया। रायपुर अपने इस कदम का व्यापक लाभ आम लोगों को नहीं दिला पाया। दूसरी चीज, कचरे से उपयोगी चीज बनाने में टेक्निकल एक्सपर्ट बुलाए गए।
ऐसा तरीका नहीं बताया गया कि आम लोग कैसे यह उपयोग कर पाएंगे।

फोकस स्थायी व्यवस्था के लिए

रायपुर कमिश्नर रजत बंसल ने बताया कि रैकिंग जारी होने का इंतजार है। उम्मीद है कि हमें मेहनत के अनुरूप रैंकिंग मिलेगी। जहां-कहीं चूक हुई उसका विश्लेषण कर उसे दूर करने का प्रयास करेंगे। पूरा फोकस स्थायी व्यवस्था के लिए है।

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