रायपुर

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नक्सली हमला

नक्सली हमला

Danik Bhaskar

Mar 13, 2018, 02:00 PM IST
विस्फोट इतना जबर्दस्त था कि एं विस्फोट इतना जबर्दस्त था कि एं

सुकमा(छत्तीसगढ़). सुकमा जिले के पलौदी गांव के करीब मंगलवार दोपहर नक्सलियों ने बारूदी विस्फोट कर नौ जवानों को शहीद कर दिया। दोपहर करीब 12.15 बजे घात लगाए नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट किया और माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल को उड़ा दिया। विस्फोट इतना तेज था कि टनों वजनी एमपीवी के परखच्चे उड़ गए। घटना में दो जवान घायल हो गए। हमलावर नक्सली वही थे जो सुबह करीब 8 बजे फोर्स के साथ मुठभेड़ में इसलिए बच गए, क्योंकि जवानों द्वारा दागे गए यूबीजीएल गोले फट नहीं पाए थे। इस बीच मंगलवार रात करीब 11 बजे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहिर रायपुर पहुंच गए। वे कल घटना की समीक्षा के साथ शहीदों को श्रद्धांजलि भी देंगे।

छुट्‌टी से लौटे साथियों को कैंप छोड़ने जा रहे थे शहीद जवान

सीआरपीएफ अफसरों के मुताबिक, सीआरपीएफ के जवान पालोदी कैंप से किस्टाराम बाजार से राशन लेकर लौट रहे थे। छुट्‌टी से लौटकर आए जवान भी किस्टाराम कैंप में थे। इन्हें पलौदी कैंप तक सुरक्षित पहुंचाने रोड ओपनिंग पार्टी लगाई गई थी। सभी जवान एक साथ दो वाहनों में पलौदी कैंप के लिए रवाना हुए। इनमें से माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल बारूदी विस्फोट की चपेट में आ गया। घटनास्थल किस्टारम कैंप से 3 किमी दूर है। किस्टाराम और पलौदी दोनों जगह सीआरपीएफ की 212 बटालियन का कैंप है।

घायल जवान ने बताया- धमाके के बाद करीब 50 फीट दूर गिरा
नक्सली हमले में गंभीर रूप से जख्मी मदन कुमार ने रायपुर में बताया कि ब्लास्ट के बाद ऐसा लगा कि कान के परदे फट गए। वे गाड़ी से 40 से 50 फीट दूर जा गिरे। वह शायद एक घंटे तक बेहोश रहा। जब होश आया तो लगा कि कान का परदा तो नहीं फट गया है। फिर साथियों ने बातचीत की तो लगा कि उनकी जान बच गई है। पहली गाड़ी आईईईडी की चपेट में आ गई। सभी जवान इसी गाड़ी में बैठे थे। पीछे गाड़ी में बैठे जवानों ने ब्लास्ट के बाद नक्सलियों पर फायरिंग भी की, लेकिन वे भाग निकले।

10 नक्सली मारे थे, यह बदले का हमला:
होली के दिन 2 मार्च को तेलंगाना-छत्तीसगढ़ की सीमा पर ग्रेहाउंड और स्टेट पुलिस ने नक्सलियों की शादी के दौरान हमला किया था। इस दौरान फोर्स ने 10 नक्सलियों को मार गिराया था। इनमें 6 महिला नक्सली भी थीं। माना जा रहा है कि नक्सलियों ने बौखलाहट में यह वारदात की है। 7 मार्च को आईईडी ब्लास्ट में कांकेर में रावघाट थाना के किलेनार इलाके में घात लगाए नक्सलियों ने बीएसएफ जवानों पर हमला कर दिया था। इसमें बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट व एक जवान शहीद हो गए थे।

यूबीजीएल के तीनों गोले फूटे नहीं, वरना मारे जाते नक्सली
जवानों ने किस्टाराम में सुबह-सुबह ही नदी के किनारे नक्सलियों को देख लिया था। जवानों ने तुरंत ही एक के बाद एक तीन यूबीजीएल के गोले नक्सलियों पर दागे लेकिन एक भी नहीं फूटा। यदि इनमें से एक भी गोला फूट गया होता तो आधे नक्सली मौके पर ही मारे जाते। अगर तीनों गोले फूट गए होते तो सौ की संख्या में आए सभी नक्सली मारे जाते।

क्या होता है यूबीजीएल?

यूबीजीएल 25 सेमी लंबा लांचर है, जो एके 47 और इंसास राइफल से दागा जाता है। इससे एक मिनट में 5 से 7 गोले 400 मीटर की दूरी तक निशाना साधकर दागे जा सकते हैं। करीब डेढ़ किलो वजनी इस गोले से जंगलों में छिपे या पहाड़ियों पर मौजूद दुश्मनों को निशाना बनाया जा सकता है। यह जहां गिरता है, वहां 8 मीटर तक के दायरे को तहस-नहस कर देता है।


पलौदी गांव में मौजूद थे 100 से अधिक नक्सली
सूत्रों के मुताबिक, सीआरपीएफ जवानों के कैंप से निकलने से लेकर वापस लौटने तक पूरे रोडमैप के बारे में नक्सलियों को जानकारी थी। कैंप लौट रहे जवान आसानी से उनका निशाना बन गए। जब यह हमला हुआ, करीब के गांव पलौदी में 100 से अधिक नक्सली मौजूद थे। यानी उनकी तैयारी थी कि अगर विस्फोट से बच गए जवान अगर मोर्चा संभालते हैं तो उन पर हथियारों से हमला किया जाता।

ट्रैक्टर में डालकर लाए गए शहीदों शव

नक्सली विस्फोट से माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल के परखच्चे उड़े तो इसके बंकर में सवार जवानों के शव क्षत-विक्षत हो गए थे। घायल जवानों को किस्टारम कैंप लाया गया। इसके कुछ देर बाद शहीद जवानों के शव ट्रैक्टर में डालकर किस्टारम कैंप लाया गया। शाम 5.30 बजे हेलीकॉप्टर से शहीदों के शव रायपुर भेजे गए।

ऐसे चला घटनाक्रम

- सीआरपीएफ 212वीं बटालियन के 200 से ज्यादा जवान पांच टीमों में बंटकर किस्टाराम से पलौदी के लिए निकले। चार टीमों ने जंगल का रास्ता अपनाया तो एक टीम बाइक से सड़क पर चलने लगी।
- जवान सुबह 7.35 बजे जब किस्टाराम कैंप से 3 किमी दूर नदी किनारे पहुंचे तो नक्सलियों ने जवानों को घेर लिया। इसके बाद नक्सलियों ने फायरिंग की, लेकिन जवानों ने नक्सलियों के एंबुश तोड़ दिया।
- यह टीम वापस किस्टाराम कैंप लौट आई। मौके से एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया गया। इसके बाद जवान दोबारा कैंप से पलौदी के लिए निकले। इस बार जवान एमपीवी भी साथ ले गए। कैंप से कुछ दूर 12.15 बजे नक्सलियों ने एमपीवी को बलास्ट कर उड़ा दिया।

फोर्स की वर्दी पहन दिया जवानों को धोखा
- किस्टारम में सुबह-सुबह नदी के किनारे नक्सली जवानों को घेर नहीं पाए थे। जवानों ने दूर से ही नक्सलियों को देख लिया था, लेकिन नक्सलियों ने फोर्स की वर्दी पहनी हुई थी तो जवानों ने सोचा की यह सीआरपीएफ की ही दूसरी पार्टी है।
- काली डांगरी पहने हुए लोगों को देखने के बाद जवान समझ गए की वे नक्सली ही हैं। जवानों ने तुंंरत ही एक के बाद एक तीन यूबीजीएल के गोले नक्सलियों पर दागे, लेकिन ये फूट ही नहीं पाए और कई नक्सली मौके से भाग निकले।

नक्सलियों ने वायरलेस पर भेजा था मैसेज-एक बड़ा नेता मारा गया
नक्सलियों ने जवानों पर सुबह 7.35 बजे ही पहला हमला कर दिया था। यहां नक्सलियों का एंबुश तोड़ने के बाद जब जवान वापस किस्टाराम कैंप पहुंचे तो नक्सलियों के चाइना मेड वायरलेस सेट को इंटरसेप्ट किया। इसमें नक्सलियों की ओर से मैसेज चल रहा था कि एक बड़ा नक्सली नेता उन्होंने हमले में खो दिया है और पांच घायल हो गए हैं। इससे माना जा रहा है कि जवानों की जवाबी कार्रवाई में नक्सलियों को भी नुकसान हुआ है।

मुख्यमंत्री रमन ने दिए ऑपरेशन तेज करने के निर्देश

नक्सली हमले के बाद मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह ने लोक सुराज अभियान के कार्यक्रम को रद्द करते हुए सीएम हाउस में राज्य के आला अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। उन्होंने अफसरों को बस्तर में सर्चिंग ऑपरेशन तेज करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घटना से जवानों का हौसला कम नहीं हुआ है। सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्स और राज्य के पुलिस जवान माओवादियों का पुरजोर तरीके से मुकाबला करेंगे। हम हिम्मत से आगे बढ़ेंगे। इस घटना से निराश होने की जरूरत नहीं है। बल्कि, दोगुनी ताकत से नक्सलियों का मुकाबला करने की हिम्मत जुटाने का वक्त है। लड़ाई सिर्फ छत्तीसगढ़ की नहीं है, बल्कि पूरे देश की है। सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में कब, किसके साथ कौन सी घटना घट जाए यह कोई नहीं जानता। एलईडी कब फट जाए यह कोई नहीं जानता, मेरी गाड़ी के नीचे भी फट सकता है। इसलिए हम हमेशा दिमागी तौर पर तैयार रहते हैं। हम हिम्मत से आगे बढ़ेंगे।

फोटो : नीरज भदौरिया

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