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सरोज पांडेय हुईं चोटिल, ह्वील चेयर से नामांकन दाखिल करने जाएंगी

सरोज पांडेय हुईं चोटिल, ह्वील चेयर से नामांकन दाखिल करने जाएंगी

Danik Bhaskar | Mar 12, 2018, 11:23 AM IST
सरोज पांडेय के हाथ और पैर में आ सरोज पांडेय के हाथ और पैर में आ

रायपुर. छत्तीसगढ़ में बीजेपी की तरफ से राज्यसभा उम्मीदवार सरोज पांडेय रविवार को घर की सीढ़ियों से गिरकर जख्मी हो गईं। उन्हें हाथ-पैर में फ्रैक्चर हुआ है। इसके बाद भी वे विधानसभा पहुंचीं और अपना नॉमिनेशन दाखिल किया। उनके हाथ और पैर में प्लास्टर लगा हुआ है। सरोज के साथ प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष धरमलाल कौशिक भी मौजूद थे। बीजेपी ने छत्तीसगढ़ से राज्यसभा के लिए राष्ट्रीय महासचिव सरोज का नाम रविवार को ही फाइनल किया था।

फॉर्मूले के तहत तय हुआ सरोज का नाम

- राष्ट्रीय महासचिवों को राज्यसभा भेजे जाने के फार्मूले के तहत सरोज का नाम तय किया गया है।

- राज्यसभा के लिए नाम तय होने के बाद सरोज अपने घर पर लोगों से मिल रही थीं। इसी दौरान भिलाई स्थित घर की सीढ़ियों पर फिसल गईं और उन्हें काफी चोटें आ गईं। उनके एक हाथ और एक पैर में प्लास्टर लगाया गया है।

सप्ताह भर बाद सस्पेंस खत्म हुआ

- सरोज का चयन छत्तीसगढ़ बीजेपी की राजनीति में अपने आप में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में जब मोदी लहर थी तब वे दुर्ग लोकसभा चुनाव हार गई थीं।

- उनकी इस हार के कारण ही छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को एकमात्र सीट पर जीत मिल पाई थी। ऐसा माना जा रहा था कि पार्टी के अंदरुनी विरोध ने उनकी हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

कौशिक को जल्दबाजी भारी पड़ी

- बीजेपी ने यहां से 25 नेताओं के नामों की सूची भेजी थी। इनमें धरमलाल कौशिक और सरोज पांडे के नाम ऊपर रखे गए थे। प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ साथ धरमलाल ओबीसी वर्ग से आते हैं। लिहाजा उनके नाम पर करीब-करीब सहमति थी।

- संभवत: इसी वजह से कौशिक ने 8 मार्च को विधानसभा से नामांकन फार्म खरीदवा लिया। उस समय तक पार्टी ने कोई नाम फाइनल नहीं किया था, लेकिन कौशिक के इस कदम से पार्टी नेतृत्व नाराज हाे गया।

- इस पर बाकायदा जवाब-तलब किया गया। रविवार शाम जब सरोज पांडे का नाम फाइनल हुआ तब यह बात प्रमुखता से चर्चा में आ गई कि कौशिक को उनकी जल्दबाजी भारी पड़ी। सदन में दलीय स्थिति को देखते हुए सरोज का चुना जाना अब औपचारिकता मात्र है।


कांग्रेस चुनाव लड़ने की तैयारी में

- संख्याबल में पीछे होने के बावजूद कांग्रेस ने चुनाव लड़ने का संकेत दिया था। सोमवार को कांग्रेस की ओर से लेखराम साहू का नाम सामने आया है।

एक हार ने बाजी पलटी और लगातार बढ़ता गया सरोज का कद

- सरोज पांडे पहले दुर्ग की महापौर और वैशाली नगर से विधायक भी रह चुकीं है। 2008 में दुर्ग से लोकसभा सांसद चुनी गई थीं। वह महिला मोर्चा की प्रदेश और राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकीं हैं। उसके बाद साल 2014 में वह दुर्ग से लोकसभा चुनाव हार गईं। इस हार के बाद से ही प्रदेश बीजेपी की राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति में सरोज का नाम बहुत ऊपर चला गया।

- दुर्ग हार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने राष्ट्रीय महासचिव बनाकर महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य का प्रभारी बना दिया। पार्टी का यही वह फैसला था जिसने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। वैसे सरोज 4 साल बाद संसद में प्रवेश करेंगी।