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न्यूज ३

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Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 11:19 AM IST
इस मंदिर से शुरु होता है होलिक इस मंदिर से शुरु होता है होलिक

रायपुर। राजधानी के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन महामाया मंदिर में सदियो से परांपरिक तरीके से होलिका जलाई जा रही है। इस मंदिर में नए तरीके से होलिका दहन किया जाता है। माता के गर्भगृह में जलने वाली ज्योति से होलिका जलाई जाती है। इसके बाद ही मंदिर परिसर में स्थित होलिका दहन किया जाता है। दूसरे दिन इसी होलिका का पूजा-पाठ किया जाता है और तिलक लगाया जाता है। इसके बाद ही रंग-गुलाल खेला जाता है। मंदर के आसपास के इलाके में इसी ज्योति से होलिका दहन भी किया जाता है।

- अंग्रेजी शासन के समय से ही महामाया मंदिर परिसर में होलिका दहन किया जा रहा है।

- बसंल पंचमी में अरंडी का पेड़ होलिका दहन वाले स्थान में लगाया जाता है और विधि विधान से पूजा-पाठ की जाती है।

- महामाया माता के गर्भगृह में जलने वाली ज्योति को होलिका दहन स्थान पर लाया जाता है और होलिका दहन किया जाता है।

- इस दौरान आसपास की महिलाएं भी होलिका दहन करने के लिए आती है।

- 50साल पहले मंदिर परिसर में ही मोहल्लेवासी पूजा-पाठ कर होलिका दहन करते थे, लेकिन अब मंदिर के पुजारी परांपरिक तरीके से होलिका दहन करते है।

- इस मंदिर में जब तक होलिका दहन नहीं किया जाता, तब तक आसपास के मोहल्ले में भी होलिका दहन नहीं होता है।

- इसी अग्नि से कुशालपुर, ब्रम्हपुरी, बंधवापारा, मठपारा और आसपास के तमाम जगहों की होलिका जलती है।
- महामाया मंदिर के पुजारी मनोज शुक्ला बतातें है कि बसंत और ग्रीष्म ऋतु में मौसम बदलने के चलते ज्यादातर लोगों की तबियत खराब हो जाती है। इस वजह से अारंडी पेड़ के पत्ते को औषधियों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।