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रविवि रीवेल मामले से आज हटेगा पर्दा, फरवरी में उछला था मामला, पहली जांच के बाद रीवेल प्रभारी हुए थे सस्पेंड

रविवि रीवेल मामले से आज हटेगा पर्दा, फरवरी में उछला था मामला, पहली जांच के बाद रीवेल प्रभारी हुए थे सस्पेंड

Dainik Bhaskar

Dec 27, 2017, 11:41 AM IST
पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी

रायपुर। राज्य के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शुमार पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में रिवैल्यूएशन के मामले में बुधवार को बड़ा फैसला आएगा। आज कार्य परिषद की बैठक में रिवेल फर्जीवाड़े की जांच रिपोर्ट रखी जाएगी। इसके आधार पर निर्णय लिया जाएगा। ध्यान देने वाली बात है कि फरवरी माह में इस मामले के उछलने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जबलपुर के एक ही कॉलेज के 8 टीचर्स को मूल्यांकन के लिए हमेशा के लिए बाहर कर दिया। जानिए पूरा मामला...

- फिर यूनिवर्सिटी ने जांच बैठाई तो पता चला कि यहां के तत्कालीन रिवेल प्रभारी समेत अन्य पर लापरवाही का आरोप लगा।

- मामले में प्रभारी डॉक्टर वीएन दूबे को सस्पेंड कर दिया गया। फिर कार्यपरिषद ने मामले की दोबारा जांच कराई। इसमें वित्तीय अनियमितता समेत अन्य मामलों को रखा गया। यह जांच रिपोर्ट भी दो माह पहले विवि में जमा करा दी है। यह जांच तीन सदस्यीय कमेटी ने किया था।

- इस बीच दो कार्यपरिषद की बैठक हो गई और इस रिपोर्ट सामने नहीं रखी गई। इसपर फिर कैंपस में हंगामा खड़ा हो गया।

ऐसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा

- भिलाई के रहने वाले बीकॉम के एक स्टूडेंट को वार्षिक परीक्षा 2016 में हिंदी और इंग्लिश में कम अंक मिले थे। छात्र ने रिवेल कराया और उसके अंक और कम हो गए।

- उसने आंसर शीट निकलवाई और रि-रिवेल कराया। इस बार फिर उसके अंक कम हो गए जबकि उसको पूरा भरोसा था कि उसके अंक बढ़ने थे।

- ऐसे में यूनिवर्सिटी से मूल्यांकन की मांग की। जब मूल्यांकन किया तो पता चला कि इसे अच्छे अंक मिलने चाहिए थे।

- तब खुलासा हुआ कि रिवेल के नाम फीस तो लगी गई, लेकिन कॉपी जांचने के नाम पर महज खानापूर्ति की गई और कम नंबर चढ़ा दिए गए।

- सा दावा है कि कॉपियां रिवेल के लिए बाहर जाती ही नहीं थी बल्कि सब काम यहीं कर लिया जाता था। जांच रिपोर्ट में इन बिंदुओं पर चर्चा होगी।

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