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महिला दिवस

महिला दिवस

Danik Bhaskar | Mar 08, 2018, 11:37 AM IST
पीएम मोदी ने छू लिए थे इनके पैर पीएम मोदी ने छू लिए थे इनके पैर

रायपुर। धमतरी जिले की कुंवर बाई के काम की चर्चा महिला दिवस पर भी खास रही। पीएम मोदी ने ट्विट कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि मैं हमेशा उस पल को याद करता रहूंगा, जब मुझे छत्तीसगढ़ दौरे में कुंवर बाई से आशीर्वाद लेने का मौका मिला। वे हमारे दिलों में जिंदा हैं। वे हमेशा गांधीजी के स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करने में जुटी रहीं। ध्यान देने वाली बात है कि कुंवर बाई का निधन 106 साल की उम्र में 23 फरवरी को रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में हो गया था। यहां इलाज के दौरान ब्रेन समेत कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।

- महिला दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने उस पल को भी याद किया जब फरवरी, 2016 में श्याम प्रसाद मुखर्जी शहरी मिशन के शुरुआत करने के लिए वे छत्तीसगढ़ गए थे।

- इस प्रोग्राम में कुंवर बाई को सम्मानित किया गया। इस दौरान मोदी उनकी समर्पण को जानकर काफी प्रभावित हुए और मुलाकात के वक्त मंच पर कुंवर बाई के पैर छू लिए।

- #SheInspiresMe नाम से किए ट्वीट में मोदी ने कहा, "कुंवर बाई का 106 साल की उम्र में निधन हो गया था। पूरा छत्तीसगढ़ आपका सम्मान करता है। उन्होंने शौचालय बनवाने के लिए अपनी बकरियां बेच दीं। स्वच्छ भारत के लिए उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उनके काम से मुझे काफी प्रेरणा मिली।"
- "कई महिलाओं ने मानव इतिहास के लिए बहुत योगदान दिया है। उनके इस काम से कई पीढ़ियों को प्रेरणा मिलेगी। मेरी आपसे अपील है कि जिन महिलाओं ने आपको प्रेरणा दी, उनके बारे में लिखें।"

सीएम ने महिला दिवस का लोगो कुंवर बाई को किया समर्पित

- महिला दिवस के अवसर पर राज्य सरकार ने स्वच्छता दूत स्व. कुंवरबाई के स्वच्छ भारत अभियान में अविस्मरणीय योगदान को याद करते हुए राज्य सरकार ने इस वर्ष का महिला दिवस का लोगो उनको समर्पित किया है।
- राज्य सरकार ने यह घोषणा करते हुए कुंवरबाई की तस्वीर के साथ लोगो जारी किया है। लोगो में तस्वीर के साथ लिखा गया है “नारीत्व महोत्सव परिवर्तन की प्रेरणा” और नीचे हैशटैग के साथ लिखा है - आपका शुक्रिया।

- सीएम रमन सिंह ने पीएम मोदी के ट्विट को रि ट्विट करते हुए कुंवर बाई को मां कहकर संबोधित किया।

जानिए कौन हैं कुंवर बाई...

- रायपुर से करीब 90 किमी दूर धमतरी के कोटभर्री गांव में कुंवर बाई का घर है। उनके दोनों बेटों की कुछ साल पहले मौत हो गई थी। इसके बाद घर चलाने के लिए मजबूरी में बहू और नातिन को गाड़ी तक खींचनी पड़ी।

- परिवार की माली हालत कमजोर है। फिर भी कुंवर बाई को ये मंजूर नहीं था कि बहू और नातिन शौच के लिए खुले में जाएं। उन्होंने अपनी 6 बकरियां बेच दीं और 22 हजार रुपए से गांव का पहला टॉयलेट बनवाया।

- इसके बाद गांव के हर परिवार के पास पहुंची और महिलाओं का सम्मान बचाने के लिए टॉयलेट बनवाने के लिए राजी किया। इस काम में उन्होंने दूसरे लोगों की मदद भी की।

- बुजुर्ग महिला की टॉयलेट बनाने की मुहिम की खबर लगने पर कई सरकारी एसेंसियों ने भी टॉयलेट बनाने में उनकी मदद की। आज कोटभर्री के सभी घरों में टॉयलेट है।