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जेल ब्रेक के लिए गार्डों से 10 मिनट तक करते रहे हाथापाई, किसी को भनक तक नहीं लगी

इस घटना को अंजाम देने इन कैदियों ने एक साथ मिलकर लंबी रणनीति जेल के स्कूल में बनाई थी।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 26, 2018, 12:07 PM IST

  • जेल ब्रेक के लिए गार्डों से 10 मिनट तक करते रहे हाथापाई, किसी को भनक तक नहीं लगी
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    स्केच के जरिए समझाया गया दंतेवाड़ा जेल ब्रेक की घटना।

    दंतेवाड़ा। जिला जेल से चार विचाराधीन बंदियों के भागने की कोशिश विफल कर दी गई, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना की सूचना मिलते ही राजधानी से शनिवार की ही रात पहुंचे डीजी (जेल) गिरधारी नायक ने आधी रात को करीब तीन घंटे तक जेल के सुरक्षा की समीक्षा की। घटना के बाद पता चला कि कैदियों ने जेल ब्रेक करने के लिए 3 जवानों के साथ 10 मिनट तक हाथापाई की, लेकिन किसी को कुछ पता तक नहीं चला। ध्यान देने वाली बात है कि भागने की कोशिश करने वाले कैदी नक्सल मामलों में विचाराधीन हैं।


    - इस घटना को अंजाम देने इन कैदियों ने एक साथ मिलकर लंबी रणनीति जेल के स्कूल में बनाई। शनिवार की सुबह मौके का फायदा उठाकर तीन जवानों के साथ करीब 10 मिनट तक हाथापाई करते रहे, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लग सकी। जबकि जेल में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।
    - हालांकि एक प्रहरी की बुद्धिमानी से सायरन बजा और पूरा अमला हरकत में आकर इस बड़ी घटना को होने से रोक दिया। अब इस रणनीति को आखिर कितने कैदियों ने मिलकर बनाया था, कितने दिनों से ये ताक में थे, इनके साथ और कितने कैदी भागने की फिराक में थे, इन तमाम सारे बिंदुओं पर पुलिस अभी जांच करेगी।
    - डीजी (जेल) गिरधारी नायक का कहना है कि सुरक्षा के इंतजाम कड़े थे। जवान सतर्क थे तभी जेल ब्रेक नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी गतिविधियों में कैदी इस तरह की रणनीति बना रहे हैं, ऐसे में इन गतिविधियों पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी।
    - डीजी ने कहा कि दंतेवाड़ा जेल में सुरक्षा ग्रिल, इंटेलीजेंस के माध्यम से सुरक्षा और मजबूत की जाएगी। इसमें तकनीक और मानवीय पहलू दोनों का ध्यान रखा जाएगा। सुबह उन्होंने जवानों को ब्रीफ किया, ऐसी घटनाएं होने पर सतर्कता व बुद्धिमानी से कैसे काम करें।
    - इस संबंध में मॉकड्रिल भी कराई गई। डीजी ने मॉकड्रिल देखने के साथ कैदियों को पकड़ने वाले जवानों को शाबासी देते हुए इनाम देने की घोषणा की।


    कैदियों ने ऐसे दिया घटना को अंजाम


    -दंतेवाड़ा जिला जेल के मुख्य गेट से शनिवार 24 मार्च की सुबह 9 बजे पालिका की गाड़ी जिला जेल के सामने पहुंची थी। चारों बंदी अंदर साजिश के साथ तैयार थे।
    - तीन कर्मचारी कचरा लेने दूसरे नंबर के दरवाजे से अंदर जा रहे थे, तभी चारों कैदियों ने उन्हें गमछे से बांधकर पीटा और चाबी छीन ली। इसी बीच एक कर्मचारी ने अलार्म बजा दिया।
    - इस पर सीएएफ के जवान सतर्क हो गए। जवानों ने करीब 100 मीटर तक चारों कैदियों का पीछा कर उन्हें पकड़ लिया।


    क्षमता से ज्यादा कैदी हैं जेल में


    - बीजापुर, सुकमा उपजेल होने के बाद भी दंतेवाड़ा जिला जेल में कैदियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 250 की क्षमता वाली इस जेल में 720 विचाराधीन बंदी हैं।
    - इनकी संख्या हर दिन घटती बढ़ती रहती है, ऐसे में प्रतिदिन औसतन करीब 700 कैदी इस जेल में रहते हैं। प्रति कैदी पर तीन गार्ड का मापदंड है, लेकिन इन मापदंडों के अनुरूप यहां सुरक्षा बेहद कम मानी जा रही है।
    - ओवर क्राउड पर डीजी का कहना है कि छत्तीसगढ़ की जेलों में ओवर क्राउड की समस्या है, जिसे लगातार दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले दो सालों में इसका योजनाबद्ध तरीके से इसका समाधान कर लिया जाएगा।
    हॉस्पिटल ले जाते समय फरारी अधिक
    - जेल और नगर सेना के पुलिस महानिदेशक गिरधारी नायक ने कहा है कि जेलों में सुरक्षा को अपग्रेड करने बुनियादी इंतजाम दुरुस्त किए जाएंगे। जिला अस्पतालों में भर्ती होने वाले बंदियों के भागने की संभावनाओं को कम करने के लिए एक जेल वार्ड स्थापित करने शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा, जिससे हॉस्पिटल से बंदियों के भागने पर रोक लग सके।
    - दंतेवाड़ा जेल ब्रेक जैसी घटनाएं बहुत कम होती हैं, बावजूद ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण की कोशिश होगी।


    पहले भी हो चुकी है जेल ब्रेक की घटना


    - दंतेवाड़ा जेल से 16 दिसंबर 2007 को 325 में से 299 कैदियों के एक साथ जेल से भागने की सबसे बड़ी घटना हुई थी। जिसमें से अब तक 70 प्रतिशत कैदियों को पुलिस ने गिरफ्तार करने का दावा किया है।

    - 2007 में हुई इस घटना के बाद जिला जेल की सुविधा यहां सुरक्षा और भी ज्यादा बढ़ा दी गई। बाहर सीएएफ की कंपनी का घेरा है। जेल की दीवारों को 20-25 फीट ऊंचा किया गया। सीसीटीवी, वीडियो कान्फ्रेंसिंग की व्यवस्था के साथ संचार व्यवस्थाओं को भी सुदृढ़ किया गया है।

    2011 से 2018 तक देश में जेल ब्रेक की घटनाएं

    राजस्थान - 41

    यूपी - 15

    एमपी- 5

    पंजाब- 4

    छत्तीसगढ़- 2

    देश के सबसे सुरक्षित जेल के रूप में प्रसिद्ध तिहाड़ में पिछले में 50 सालों में 6 कैदी फरार हो चुके हैं।

    जेल ब्रेक की कुछ घटनाएं जिसने सिस्टम को हिला दिया

    - 30 अक्टूबर 2016 को दिवाली की रात भोपाल जेल से सिमी के 8 आतंकी गार्ड की हत्या कर फरार हो गए थे। हालांकि दूसरे ही दिन शहर से 10 किमी दूर खेजड़ी गांव में सभी 8 आतंकियों का एनकाउंटर कर दिया गया था।

    - 1 जनवरी 2018 को यूपी की मथुरा जेल से तीन कैदी फरार हो गए थे। चौथा भागते वक्त ही पकड़ा गया था।

    - 29 जून 2015को तिहाड़ जेल से दो विचाराधीन बंदी सुरंग खोदकर फरार हो गए थे।

    - 1 अक्टूबर 2013खंडवा जेल से सिमी के 6 आतंकी फरार हो गए थे।

    भागने के लिए ट्रेन हाइजैक कर चुका है एक कैदी

    - उपेंद्र सिंह उर्फ कबरा 2013 में एक बार फिर भागा। उसे रायपुर से दुर्ग सुनवाई के लिए लाया जा रहा था। कबरा ने जनशताब्दी एक्सप्रेस को हाइजैक कर लिया था। फिलहाल वह जिला जेल में ही निरुद्ध है।


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    स्केच के जरिए बताया गया है कि कैदियों ने कैसे सुरक्षा गार्डों के साथ हाथापाई की।
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