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नेशनल अचीवमेंट सर्वे : रायपुर से बेहतर हैं सुकमा के छात्र-छात्राएं

रायपुर में 8वीं और 5वीं क्लास के 70% बच्चों को नहीं आता गणित, साइंस व सोशल साइंस में भी 60 फीसदी स्टूडेंट्स कमजोर।

कृष्णा तिवारी | Last Modified - Mar 01, 2018, 03:23 PM IST

नेशनल अचीवमेंट सर्वे : रायपुर से बेहतर हैं सुकमा के छात्र-छात्राएं

रायपुर। राज्य के 189 स्कूलों का नेशनल अचीवमेंट सर्वे किया गया। इसमें आठवीं और पांचवी क्लास के बच्चे सबसे कमजोर पाए गए हैं। रायपुर के 70 फीसदी बच्चों को गणित हल करना नहीं आता है। वहीं साइंस और सोशल साइंस में तीसरी और पांचवीं के 60% से ज्यादा स्टूडेंट्स फिसड्डी पाए गए।

- स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता जांचने के लिए हाल ही में 189 स्कूलों का नेशनल अचीवमेंट सर्वे किया गया।

- इसमें बच्चों के विषयों के ज्ञान को परखा गया। अचीवमेंट सर्वे के रिपोर्ट के मुताबिक तीसरी, पांचवीं और आठवीं के 4 हजार से ज्यादा बच्चों के ज्ञान की जांच की गई।

- इसमें गणित हल करने से लेकर साइंस के संबंध में जानकारी पूछी गई। इसमें रायपुर समेत प्रदेश के ज्यादातर स्कूलों के बच्चे कमजोर रहे है।

- वहीं गणित हल करने में भी 70 फीसदी बच्चे कमजोर साबित हुए। वहीं जशपुर व अंबिकापुर के बच्चों को गणित,सोशल साइंस समेत साइंस में अच्छी ट्रेनिंग दी गई है। वहां के बच्चों की स्थिति रायपुर के बच्चों से अच्छी मिली है।

शहरी क्षेत्रों में स्थिति सबसे कमजोर

- प्रदेश में रायपुर की स्थिति सबसे कमजोर है। सरगुजा क्षेत्र अचीवमेंट सर्वे में सबसे बेहतर रहा है।

- सुकमा इलाके के बच्चों की स्थिति भी बेहतर रही है। उन क्षेत्रों में बच्चों के भविष्य के मद्देनजर टीचर्स मेहनत कर रहे हैं।

इन कारणों से कमजोर है हमारे बच्चे

- ज्यादातर स्कूलों के टीचर्स ही पढ़ाई-लिखाई बच्चों को गंभीरता से नहीं कराते। हार्डवर्क के जरिए नहीं, बल्कि साफ्टवर्क के जरिए समझाए तो बेहतर रहेगा।

- टीचर्स को हर साल इसके लिए ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। इस मामले में सरकार और पालक की जिम्मेदारी भी ऐसी होनी चाहिए कि बच्चे उच्च शिक्षा ग्रहण कर सके।

- अभियान यानि जिस तरह से बच्चों को ज्ञान दी जानी है, उसे मिशन के रूप में शिक्षकों को काम करने की जरूरत है।

- क्योंकि बच्चों में आत्मविश्वास नहीं होगा, तो बच्चे भी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे। बच्चों को टीचर्स मोटीवेट नहीं करेंगे तो उनमें आत्मविश्वास नहीं आएगा।

- इससे भी गणित से लेकर तमाम विषयों में पीछे रह जाएंगे।

- शिक्षाविद बीकेएस रे के मुताबिक वर्तमान में स्कूलों में बच्चों के हिसाब से वातावरण नहीं है। सुविधाओं में कमी है। शिक्षा का प्रचार-प्रसार भी ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा है।

- इमानदारी के साथ जिस दिन शिक्षा का कार्य होगा, उस दिन शिक्षा की स्थिति बेहतर हो जाएगी। वहीं लापरवाही करने पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।

विभाग ने भी माना स्कूलों की कमजोरी को

- हमारी पहले से कमजोरियां रहीं हैं। जिससे परिणाम अच्छे नहीं आते थे। किताबों में भी काफी बदलाव किया गया है। स्कूलों में छात्र-छात्राओं की गणित और अंग्रेजी को सुधारने के लिए किट दी गई हैं।

विकास शील , सचिव शिक्षा विभाग

रिजल्ट के संबंध में स्टेट वाले देंगे जबाब

- नेशनल एचीवमेंट सर्वे की रिपोर्ट में स्कूलाें के परीक्षा परिणाम जैसे भी रहे हैं, इसके जिम्मेदार हम नहीं है। शिक्षा गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रयास करते हैं। रिजल्ट सही क्यों नहीं आ रहा, इसका जबाब स्टेट स्तर पर बैठे अधिकारी ही जबाब देंगे। फिलहाल शिक्षकों को मोटीवेट कराते हैं।

अशोक नारायण बंजारा, जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर

सुधार नहीं हुआ तो जिम्मेदार रहेंगे शिक्षक

शासन स्कूल शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए तमाम तरह की योजनाएं चला रही है। इसके बाद भी अगर परिणाम अच्छे नहीं आएंगे तो स्कूल शिक्षक मुख्य रूप से जिम्मेदार रहेंगे। शिक्षकों को चाहिए कि वह स्कूली बच्चों की पढ़ाई करबाने में अच्छी मेहनत करें। जिससे परिणाम अच्छे मिलें।

अरुण कुमार शर्मा, सहायक परियोजना समंवयक, सर्व शिक्षा अभियान

इन जिलों की स्थिति रायपुर से बेहतर...

जिला- रैंकिंग

रायपुर-

सरगुजा- 68.52%

सूरजपुर- 61.63%

बलरामपुर- 60.51%

सुकमा- 55.52%

दुर्ग- 54.58%

रायपुर जिले के आंकड़े बता रहे कि छोटी क्लास के बच्चे कमजोर है...

कक्षा आठवीं

लेंग्वेज

52.49% पास 47.51% फेल

गणित

28.92% पास 71.08% फेल

साइंस

36.18% पास 63.18%फेल

सोशल साइंस

39.74% पास 60.26% फेल

कक्षा पांचवी

लैंग्वेज

51.63% पास 48.37% फेल

गणित

44.11% पास 55.89% फेल

ईवीएस

47.44% पास 52.56% फेल

कक्षा तीसरी

लैंग्वेज

59.43% पास 40.57% फेल

गणित

55.50% पास 44.50% फेल

ईवीएस

57.35% पास 42.65% फेल

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Web Title: neshnl achivmeint srve : raaypur se behtr hain sukmaa ke chhaatr-chhaatraaen
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