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महिला दिवस २

महिला दिवस २

Dainik Bhaskar

Mar 08, 2018, 03:48 PM IST
यूं ट्रक और ट्रैक्टर के टायर ख यूं ट्रक और ट्रैक्टर के टायर ख

धमतरी। बड़े चार पहिया वाहनों के बोल्ट खोलने में ही पुरूषों के पसीने छूट जाते हैं। ज्यादा मेहनत वाले इस काम को करने में कई युवा भी पीछे हट जाते हैं। वहीं जिला मुख्यालय धमतरी से 35 किमी दूर ग्राम कोलियारी निवासी बीएससी सेकंड ईयर की छात्रा गीतांजली साहू (19) तो रोज यह काम करती है। खुद पिता की आटो पार्ट्स की दुकान संभाल रही है। आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गीतांजली का ये जज्बा एक मिसाल की तरह है।

- गीतांजली रोजाना 8 से 10 पंचर बनाकर हर रोज एक हजार रूपए कमा लेती है। वह महज 30 मिनट में ही ट्रैक्टर, कार सहित अन्य वाहनों का पहिया खोल पंचर बना लेती है।

- गांव के लोग गीतांजलि के इस मेहनती काम से वाकिफ हैं, लेकिन अनजान लोगों की नजर जब गीतांजली पर पड़ती है, तो वे भी सोच में पड़ जाते हैं।

- गीतांजली टायरों का बोल्ट मशीन के बदले हाथ, छेनी हथौड़े की मदद से खोलती है।

पहले हाथ बंटाती थी, अब खुद संभाल रही शॉप


- गीतांजलि के पिता चिंताराम साहू ने कहा कि उनकी तीन संतान हैं। बड़ा पुत्र रेखराज किसानी का काम करता है।

- मंझला पुत्र टोमेन्द्र रायपुर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। सबसे छोटी गीतांजलि है, जो शुरू में आटो पार्ट्स दुकान में मेरा हाथ बंटाती थी।

- इसके बाद पिछले 10 वर्षों से आटो पार्ट्स की दुकान खुद संभाल रही है।


कोई काम कठिन नहीं


- गीतांजलि ने बताया कि वह बीएससी सेकंड ईयर की छात्रा है। वह शिक्षक बनना चाहती है, लेकिन जब तक वह पिता के घर में है, तब तक पंचर बनाने के काम को नहीं छोड़ने की बात कही।

- गीतांजलि ने कहा कि ऐसा कोई काम नहीं, जो महिलाएं नहीं कर सकती। सिर्फ रूचि होनी चाहिए, फिर हर काम आसान हो जाता है।

- पंक्चर बनाना आसान काम तो नहीं, पर महिलाओं के लिए नामुमकिन भी नहीं।

फोटो : अजय देवांगन

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