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1 हजार रुपए में किया था ऑपरेशन, अब 15 लोगों की एक आंख जाने का डर

राजनांदगांव के क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल में जिन 15 मरीजों की एक आंख निकालने का खतरा पैदा हो गया है।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 07, 2018, 11:46 AM IST

1 हजार रुपए में किया था ऑपरेशन, अब 15 लोगों की एक आंख जाने का डर

रायपुर। राजनांदगांव के क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल में जिन 15 मरीजों की एक आंख निकालने का खतरा पैदा हो गया है, उनका मोतियाबिंद का ऑपरेशन एक हजार रुपए के पैकेज में किया गया था। मरीजों के पास स्मार्ट कार्ड नहीं था। इस वजह से सरकारी पैकेज पर प्राइवेट अस्पताल में केवल एक हजार में उनका इलाज किया गया। उनके साथ बाकी मरीजों की सर्जरी भी की गई, लेकिन उनका पैकेज ज्यादा का था। कम पैकेज होने के कारण गुणवत्ता को नजरअंदाज किया गया। उसका खामियाजा अब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। उनकी एक आंख निकालने का खतरा पैदा हो गया है।

- रायपुर में विधानसभा रोड स्थित एमजीएम अस्पताल में उनका इलाज करवाया जा रहा है। इसके बावजूद मोतियाबिंद के ऑपरेशन वाली आंख में मवाद बढ़ता ही जा रहा है। एंटीबायोटिक का हाई डोज दिया जा रहा है, लेकिन आंखों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

- डाक्टरों का कहना है उन्हें यहां रेफर करने में देरी कर दी गई। इससे रिकवरी नहीं हो रही है। मरीजों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन 23 फरवरी को किया गया। इंफेक्शन फैलने के बावजूद उन्हें तुरंत यहां रेफर नहीं किया गया।

- मरीजों को 1 मार्च की रात यहां भर्ती कराया गया। तब तक देरी हो चुकी थी। डाक्टरों के अनुसार आंख का केस बिगड़ने के बाद कम समय में स्पेशल केयर की जरूरत होती है। डा. दीपशिखा अग्रवाल के अनुसार ऑपरेशन कर आंख से मवाद निकाला जा रहा है।

- आंख में फैले कीटाणु का भी पता लगा रहे हैं। इसके बावजूद जिनकी आंखों का संक्रमण ठीक नहीं हो रहा है, उनकी एक आंख निकालना पड़ सकता है। ऐसा नहीं करने पर ब्रेन में संक्रमण की आशंका रहती है। ऐसे में मरीजों की जान के साथ कोई रिस्क नहीं उठाया जा सकता। हमें मरीजों की जान बचाने के लिए आंख निकालनी ही होगी।

जानिए पूरा मामला...

- राजनांदगांव के क्रिश्चियन फेलोशिप अस्पताल से 23 मार्च को शिविर में मरीजों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ। सर्जरी के अगले ही दिन से मरीजों की आंखों में इंफेक्शन फैलना शुरू हो गया। 37 मरीजों को एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया है। इनमें पांच को डिस्चार्ज कर दिया गया है।

- अभी 28 लोग यहां भर्ती हैं। इनमें आधे से ज्यादा यानी 15 लोगों की एक आंख को निकालने की स्थिति है। स्वास्थ्य विभाग पूरे कांड की जांच कर रहा है। प्रारंभिक रिपोर्ट में ही खुलासा हो रहा है कि जिन मरीजों का केवल एक हजार के पैकेज में ऑपरेशन किया गया, उन्हीं की आंखों में इंफेक्शन फैला है। यह पैकेज राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत दिया जाता है। मरीजों की आंखों में इंफेक्शन मामला सामने आने से इस पैकेज पर भी सवाल खड़ा रहा है।


इस एंगल पर भी जांच


- मोतियाबिंद ऑपरेशन में उपयोग की गई ड्राॅप व एंटीबायोटिक की क्वालिटी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मरीजों ने इसकी शिकायत की है। मरीजों ने अपने बयान में अधिकारियों को बताया है कि ड्राॅप डालने के बाद उनकी आंख में समस्या आई।

- स्वास्थ्य विभाग इस एंगल से भी जांच कर रहा है। हालांकि इसकी पुष्टि कोलकाता से जांच रिपोर्ट आने के बाद हो पाएगी। इसमें 10 से 15 दिन लगने की संभावना है। ऑपरेशन में उपयोग की गई दवाओं का सैंपल कोलकाता लेबोरेटरी भेजा गया है।

आंख में दवा डालने के बाद संक्रमण की हुई शिकायत

- संक्रमित आंख निकालने की जरूरत न पड़े, इसका प्रयास किया जा रहा है। अगर संक्रमण बढ़ गया तो आंख निकालने के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा। कुछ मरीजों ने आंख में दवा डालने के बाद संक्रमण की शिकायत की थी। कोलकाता से रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि दवा नकली तो नहीं है।
डॉ. सुभाष मिश्रा, स्टेट नोडल अधिकारी अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम


ऑपरेशन का लक्ष्य खत्म, लेकिन दबाव भी

- बालोद मोतियाबिंद कांड सितंबर 2011 के बाद ऑपरेशन का लक्ष्य खत्म कर दिया है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में इसका दबाव बना हुआ है।

- एक अनुमान के मुताबिक हर साल आबादी के सात फीसदी लोगों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया जाता है। बालोद कांड के बाद स्वास्थ्य विभाग ने केवल जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में मोतियाबिंद ऑपरेशन करने का निर्णय लिया था, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है।

- बालोद के बाद दुर्ग, राजनांदगांव व बागबाहरा में आंखफोड़वा कांड हुआ था। बागबाहरा में एक संस्था ने शिविर का आयोजन किया था। इसमें 13 लोगों की एक आंख की रोशनी चली गई थी। वहीं बालोद में 53 लोगों की रोशनी गई थी।

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Web Title: 1 hazaar rupaye mein kiyaa thaa aupareshn, ab 15 logon ki ek aankh jaane ka dar
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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