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Dainik Bhaskar

Mar 14, 2018, 11:51 AM IST
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दंतेवाड़ा। अरनपुर सीआरपीएफ 111वीं बटालियन के कैंप में हथियार की सफाई करते वक्त यूबीजीएल का ग्रेनेड फट गया। घटना में तीन जवान घायल हो गए। बताया जा रहा है कि किस्टाराम में नक्सलियों के खिलाफ दागे गए यूबीजीएल के नहीं फटने की घटना के बाद जवानों को हथियारों को चेक करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद बटालियन के जवान यूबीजीएल की सफाई में लगे थे और ये हादसा हो गया। घटना के तुरंत बाद तीनों घायलों को पहले जिला अस्पताल लाने के बाद हेलिकाॅप्टर से रायपुर के लिए रेफर कर दिया गया।

- घटना बुधवार सुबह सवा आठ बजे की बताई जा रही है। सीआरपीएफ डीआईजी डीएन लाल ने बताया कि घटना में सोर्नपालन की स्थिति नाजुक बनी हुई है जबकि अन्य दोनों जवान ठीक हैं। तीनों को रायपुर के लिए रेफर कर दिया गया है।
- जवान रोज की तरह ड्यूटी पर निकलने से पहले हथियारों की सफाई से लेकर अन्य तैयारियां कर रहे थे। जवान एस सोर्नपालन भी यूबीजीएल की सफाई कर रहा था, इस बीच यूबीजीएल का ग्रेनेड अचानक फट गया और सोर्नपालन के साथ पास बैठे दो अन्य जवान एम ज्ञान शेखरन व रामसिंह भी ग्रेनेड की चपेट में आ गए।

- विस्फोट की आवाज सुनते ही पूरे कैंप में अफरा-तफरी मच गई। नक्सल घटना होने की आशंका पर जवानों ने मोर्चा लेना शुरू कर दिया, लेकिन जैसे ही यूबीजीएल फटने की बात सामने आई तो जवानों ने राहत की सांस ली। तुरंत ही तीनों जवानों को दंतेवाड़ा जिला अस्पताल लाया गया।

यूबीजीएल की सफाई के थे निर्देश


- जानकारी के मुताबिक किस्टाराम में मंगलवार को हुई घटना में जवानों के यूबीजीएल नहीं फटे थे, ऐसे में सर्चिंग पर निकलने से पहले यूबीजीएल की सफाई करने को कहा गया था।

- अरनपुर कैंप में पदस्थ जवान सर्चिंग पर निकलने से पहले पुख्ता तैयारी कर रहे थे, इसी दौरान जवान की चूक से यह हादसा हो गया।

क्या होता है यूबीजीएल?

- यूबीजीएल 25 सेमी लंबा लांचर है, जो एके 47 और इंसास राइफल से दागा जाता है। इससे एक मिनट में 5 से 7 गोले 400 मीटर की दूरी तक निशाना साधकर दागे जा सकते हैं। करीब डेढ़ किलो वजनी इस गोले से जंगलों में छिपे या पहाड़ियों पर मौजूद दुश्मनों को निशाना बनाया जा सकता है। यह जहां गिरता है, वहां 8 मीटर तक के दायरे को तहस-नहस कर देता है।

पलोदी में मंगलवार को फटा होता यूबीजीएल तो सीन कुछ और होता

- सीआरपीएफ के जवानों ने बताया कि मंगलवार को पलोदी में तीन यूजीबीएल दागे गए और वे तीनोंं ही फुस्स हो गए थे। यदि एक भी फटा जाता तो भारी संख्या में नक्सली मारे गए होते।

- किस्टारम में सुबह-सुबह नदी के किनारे नक्सलियों जवानों को घेर नहीं पाए थे। जवानों ने दूर से ही नक्सलियों को देख लिया था, लेकिन नक्सलियों ने फोर्स की वर्दी पहनी हुई थी तो जवानों ने सोचा की यह सीआरपीएफ की ही दूसरी पार्टी है।
- काली डांगरी पहने हुए लोगों को देखने के बाद जवान समझ गए की वे नक्सली ही हैं। - जवानों ने तुरंत ही एक बाद एक तीन यूजीबीएल के गोले नक्सलियों पर दागे, लेकिन ये फूट ही नहीं पाए।
- यदि इनमें से एक भी गोला फूट गया होता तो आधे नक्सली मौके पर ही साफ जाते और तीनों गोले फुट गए होते तो सौ की संख्या में आए सभी नक्सली मारे जाते।
- एन वक्त पर यूजीबीएल के गोलों ने भी जवानों को धोखा दिया।

नक्सलियों ने उड़ा दिया एंटी लैंड माइन व्हीकल

- सीआरपीएफ कैंप से सूचना के मुताबिक 212वीं बटालियन के दो सौ से ज्याद जवान पांच टीमों में बंटकर मंगलवार को किस्टाराम से पलोदी के लिए निकले थे। चार टीमों ने जंगल का रास्ता अपनाया तो एक टीम बाइक से सड़क पर चलने लगी।

- जवान सुबह 7.35 बजे जब किस्टाराम कैंप से तीन किमी दूर नदी किनारे पहुंचे तो नक्सलियों ने जवानों को घेर लिया। इसके बाद नक्सलियों ने एक-एक कर तीन बड़े विस्फोट यहां किए, लेकिन जवानों ने नक्सलियों के एंबुश तोड़ दिया।
- इसके बाद टीम वापस किस्टारम कैंप लौट आई। मौके से एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया। इसके बाद जवान दोबारा से कैंप से पलोदी जाने के लिए निकले। इस बार जवानों ने अपने साथ एमपीवी को भी साथ रखा था, लेकिन कैंप से कुछ किमी दूर सवा बारह बजे के करीब नक्सलियों ने एमपीवी को ब्लास्ट कर उड़ा दिया।
- नक्सलियों के वायरलेस सेट को इंटरसेप्ट किया जवानों ने पता चला एक बड़ा नेता मारा गया है।
- नक्सलियों ने जवानों पर पहला हमला सुबह 7.35 बजे ही कर दिया था। यहां नक्सलियों के एंबुश को तोड़ने के बाद जब जवान वापस किस्टाराम कैंप पहुंचे तो नक्सलियों के चाइना मेड वायरलेस सेट को इंटरसेप्ट किया है। इसमें नक्सलियों की ओर से मैसेज चल रहा था कि एक बड़ा नक्सली नेता उन्होंने हमले में खो दिया है और करीब पांच अन्य घायल हुए हैं। इस इंटरसेप्ट के आधार पर माना जा रहा है कि जवानों की जवाबी कार्रवाई में नक्सलियों को भी नुकसान हुआ हैं।

फोटो : शैलेंद्र ठाकुर

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