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यहां पैदा होने से पहले ही पक्की हो जाती है शादी, साथ खेलते हैं दूल्हा-दुल्हन

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 14, 2017, 02:51 PM IST

छत्तीसगढ़ के सबरिया जनजाति में ये होता है ये सब। 6 पीढ़ियों से चली आ रही है से परंपरा।
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    बचपन में ही यूं बन जाती है जोड़ी।

    रायपुर।छत्तीसगढ़ के सबरिया जनजाति में बच्चों के जन्म से पहले ही उनकी शादी पक्की कर दी जाती है। ऐसा मान लिया जाता है कि यदि लड़की हुई तो वो किसकी दुल्हन बनेगी और लड़का हुआ तो किसका दूल्हा होगा। जन्म लेने के 1 साल के भीतर दोनों नाबालिग कपल का फलदान का लोगों को भोज दिया जाता है और रिश्ता पक्का हो जाता है। जानिए इस परंपरा की पूरी डिटेल...
    dainikbhaskar.com छत्तीसगढ़ के ट्राइब्स सीरिज के तहत आपको यहां का खान-पान, पहनावा, रीति-रिवाज बता रहा है। इसी के तहत छत्तीसगढ़ के ट्राइबल एरिया में शादी को लेकर अजब-गजब मान्यताओं के बारे में बताया जा रहा है।

    - राजधानी से 170 किलोमीटर दूर जांजगीर-चांपा जिले के सुकली गांव में एक भी बच्चा ऐसा नहीं है, जिसकी शादी तय नहीं हुई हो और फलदान न हो गया हो।
    - यहां के बच्चों को ये हक ही नहीं है कि बड़े होकर पसंद का जीवनसाथी चुन सकें। अगर किसी ने यह हिमाकत की तो उसे कड़ा दंड भोगना पड़ता है।
    - इस गांव में 16 साल से लेकर 4 साल तक के मासूम को पता है कि उसकी शादी तय हो गई। यह भी पता है कि पति कौन है और पत्नी कौन।
    - छह पीढ़ियों से चली आ रही सबरिया जनजाति की इस परंपरा को सुकली गांव के 35 परिवार आज भी शिद्दत से निभा रहे हैं।
    - इनकी कुल संख्या 130 है। इनमें 70 से ज्यादा बच्चे हैं और सभी इंगेज्ड हैं। इनकी आजीविका मुर्गी-बकरी पालकर चलती है।

    साथ खेलते हैं फियांसे-फियांसी

    -भास्कर टीम इस गांव की सबसे छोटी बच्ची चाली (परिवर्तित नाम) से मिली। उसे पता है कि वहीं के 8 साल के खोसर (परिवर्तित नाम) से उसका रिश्ता तय है और शादी भी होगी।
    - गांव में सभी बच्चे खेल रहे हैं जिनमें कई तो आपस में होने वाले पति-पत्नी हैं।

    गर्भ में तय हो जाता है रिश्ता

    -इस बारे में सबरिया जाति को मुखिया जयदेव कहते हैं कि बच्चे तो दूर, जैसे ही कोई महिला प्रेग्नेंट होती है, उसके गर्भस्थ शिशु की शादी की बात शुरू हो जाती है।
    -बच्चे का जन्म होता है, तब जेंडर के आधार पर समाज के दूसरे परिवार में उसी के उम्र से शादी तय कर लेते हैं।
    -बच्चे एक साल के हुए तो फलदान कर देते हैं। समाज वालों को भोज देते हैं और वहीं घोषणा होती है कि रिश्ता तय हो गया है। इसके बाद मिठाई-माला और टिकावन के साथ पूरा भविष्य तय हो जाता है।

    शादी तोड़ी तो जुर्माना

    -समाज के मुखिया जयदेव (50) ने दावा किया कि इस शादी तो तोड़ना संभव नहीं है। दोनों पक्षों में जो भी तोड़ना चाहे, उसे 50 हजार रुपए जुर्माना देना पड़ेगा।
    -अगर इतनी राशि देने में कोई पक्ष असमर्थ हो तो उसकी हैसियत से दंड करते हैं, जो बड़ा ही होता है। यही नहीं, ऐसे पक्ष को पूरे समाज को भोज भी कराना होता है।
    -मुखिया 10 साल से यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं और उनका दावा है कि इस दौरान सिर्फ दो रिश्ते ही टूटे हैं। वजह है बड़ा जुर्माना, जिससे लोग बचना चाहते हैं।
    -ज्यादा जुर्माना भी इसीलिए लगाते हैं ताकि बुजुर्गों के हाथों तय रिश्ता नहीं टूटे और परंपरा जीवित रहे।

    साथ खेलते दिखे कई जोड़े

    -समाज में सबसे छोटी बच्ची 4 साल की चाली ही है, जिसकी तीन साल पहले शादी तय हुई थी।
    -यहीं 13 साल की एक लड़की और 14 साल के लड़के से मुलाकात हुई, जो साथ खेल रहे थे। दोनों को पता है कि उनकी शादी तय है।
    - समाज के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति 95 साल के भुरुवा का कहना है कि उनकी शादी भी गर्भ से तय हुई थी।
    - यहां मर्जी से शादी की परंपरा ही नहीं है। ऐसा करनेवालों को समाज निकाल देगा या बड़ा दंड लगाएगा।

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    इन दोनों मासूमों की आपस में हो गई इंगेजमेंट।
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    भविष्य में होने वाले पति-पत्नी खेलते हैं साथ-साथ।
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    इनकी हो चुकी है शादी।
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    कम उम्र में ही बन जाते हैं पति-पत्नी।
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    अपनी होने वाली पत्नी को मनाता मासूम।
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    ऐसी है सबरिया जनजाति की परंपरा।
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    गर्भ में ही तय होने लगते हैं रिश्ते।
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    ऐसी है इनकी 6 पीढ़ियों की ये परंपरा।
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Web Title: All Boys And Girls Engaged With Each Other In Minor Age In Sabriya Tribes In Chhattisgarh
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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