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१० दिन के बच्चे को छोड़ चली गई थी हथिनी, दोनों को मिलाने में काम आई ये ट्रिक

१० दिन के बच्चे को छोड़ चली गई थी हथिनी, दोनों को मिलाने में काम आई ये ट्रिक

Brijesh Upadhyay | Last Modified - Nov 23, 2017, 01:50 PM IST


कोरबा।तीन दिन पहले अपनी मां से बिछड़ा 10 दिन का नवजात आखिरकार अपनी मां के साथ चला गया। वन विभाग की टीम ने इस दौरान बच्चे को उसकी मां से मिलाने की हर कोशिश की। मां से बिछड़ने के बाद हाथी को एक रेस्ट हाउस में रखा गया औऱ उसे रोज चार लीटर दूध पिलाया गया। इस रेस्क्यू के लिए वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स देहरादून से बुलाए गए थे।क्या है पूरा मामला...


- 20 नवंबर को वन परिक्षेत्र जटगा के बासीन बीट में सुबह मेढ़री पारा गांव के पास 38 हाथियों के झुंड में शामिल 10 दिन का बच्चा 7 फीट गहरे गड्ढे में गिर गया। हाथियों का झुंड कुछ देर तक गड्ढे के पास मंडराया और फिर उसे छोड़कर गिधोर पहाड़ की ओर चला गए और वहां जोरों से चिंघाड़ने लगा।
- इधर वन विभाग की टीम ने बच्चे को गड्ढे से निकाल उसका प्राथमिक उपचार किया और जंगल की छोड़ा। चूंकि हाथियों का दल पास ही खड़ा देखता रहा, लेकिन बच्चें को लेने नहीं आया।
- ऐसे में वन विभाग हैरान रह गया। हाथी के बच्चे को छूने पर वो उसे छोड़ते नहीं है। पर ये अपने आप में पहला मामला था जब हाथियों ने ऐसा किया था।
- इधर बच्चे को वापस जटगा रेस्ट हाउस लाया गया। यहां उसे नहलाकर हर रोज 4 लीटर दूध और पानी वगैरह दिया जाने लगा।

बुलाए गए वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट

- जब झुंड ने बच्चे को एक्सेप्ट नहीं किया तो वन विभाग की मुश्किलें बढ़ गईं। सभी हैरान थे क्योंकि हाथियों के मामले में ये पहला केस था जब मानवों द्वारा टच कर दिए जाने के बाद हाथियों के झुंड ने बच्चे को रिजेक्ट कर दिया।
- इसके लिए देहरादून से सीनियर वाइल्ड लाइफ बायोलॉजिस्ट लक्ष्मीनारायण, वाइल्ड साइंटिस्ट अंकित, और डॉ. चंदन को बुलाया गया।


घायल हालत में मिली बच्चे की मां


- इधर 21 नवंबर की सुबह हाथियों का झुंड ग्राम नवापारा की ओर चला गया। इसके बाद ग्रामीणों ने देखा कि एक हाथी काफी देर तक एक ही जगह पर है। जब पास पहुंचे तो अमलीकुंडा के खाड़ीपारा जंगल में वह घायल हालत में मिली।
- वन अमले ने चेक करने के लिए बच्चे को जीप में लाकर हथिनी के पास छोड़ा। घायल हथिनी सूंड से कुछ देर दुलारती रही पर दूध नहीं पिला सकी।
- चूंकि हथिनी के पेट और पैरों में चोट थी। वन विभाग की मानें तो झुंड के साथ पहाड़ी पर चढ़ते वक्त पैर फिसलने से ये हादसा हुआ लगता है। इसपर बच्चे को वापस जटगा ले आया गया।


मौके पर ही हुआ इलाज और सुरक्षा में लगे वनकर्मी


- हथिनी का मौके पर इलाज किया गया। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट की मानें तो हथिनी को भी दो दिन पहले चोट आई थी। झुंड में रहने से पता नहीं चल पाया।
- इधर उसकी सुरक्षा के लिए 6 वन कर्मियों को मौके पर ही लगाया गया था। साथ ही बच्चे की देखभाल जटगा रेस्ट हाऊस में की जा रही थी।


मां से मिलाने किया गया ये अनूठा प्रयोग


- बुधवार को जब हथिनी के स्वास्थ्य में सुधार हुआ तो वो झुंड में चली गई। हाथियों का झुंड कुछ दूरी पर ही था। चूंकि झुंड में कई बच्चे थे और हाथी बच्चों के साथ चलते हैं तो काफी लंबी दूरी तय करने से बचते हैं क्योंकि बच्चे थक जाते हैं।
- इधर देर रात जब हथिनी झुंड में गई तो वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट ने एक अनूठा प्रयोग किया। उन्होंने हथिनी के गोबर को बच्चे के शरीर में लपेट दिया और फिर उसे झुंड की ओर छोड़ दिया।
- झुंड पर देर रात तक निगरानी रखी गई। देखा गया कि हथिनी ने बच्चे को एक्सेप्ट कर लिया और उसे दूध भी पिलाया।
- इधर गुरुवार को 38 हाथियों का ये पूरा झुंड बच्चों समेत जटगा से एतमानगर की ओर गया। इस दौरान वो नवजात भी उनके साथ था।
- ये देख वन विभाग ने राहत की सांस ली। आखिरकार मां को उसका बच्चा और 10 दिन के नवजात को मां का प्यार और पूरा परिवार मिल गया।

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Web Title: 3 din se rest haaus mein rh raha thaa haathi ka ye bachchaa, fir aise le gayi hthini
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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