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छात्रा को बीमार हालत में छोड़ चलता बना स्टॉफ, भाई के पास दवा तक के पैसे नहीं

छात्रा को बीमार हालत में छोड़ चलता बना स्टॉफ, भाई के पास दवा तक के पैसे नहीं

Dainik Bhaskar

Nov 24, 2017, 05:46 PM IST
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दंतेवाड़ा। एक बीमार छात्रा को अस्पताल में भर्ती कराकर परिजनों के हवाले कर अधीक्षिका व स्टाफ चलता बना, जबकि नियमानुसार अधीक्षिका को ही सारी जिम्मेदारी उठानी थी। बीमार छात्रा व उसके भाई ने बताया कि भाई के आने के बाद हाॅस्टल का कोई भी कर्मचारी उसे देखने ही नहीं आया। तीन दिनों से अस्पताल में भर्ती है। छात्रा जावंगा की रहने वाली है, लेकिन कासोली के हाॅस्टल में रहकर ७वीं कक्षा में पढ़ रही है। दवा के लिए भटक रहा है भाई...


- मंगलवार को कासोली के हाॅस्टल की छात्रा शर्मिला की तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
- छात्रा के परिजनों को प्रबंधन ने इसकी जानकारी भी दी। छात्रा शर्मिला का भाई पांडुराम जिला अस्पताल पहुंचा। इसके बाद हाॅस्टल का स्टाॅफ वहां से चलता बना।
- तीन दिनों तक छात्रा को देखने तक अधीक्षिका नहीं पहुंचीं। जब डाॅक्टर ने दवाई लिखी व मेडिकल स्टोर्स से लाने छात्रा के भाई को कहा तो पैसे नहीं होने के कारण उसे करीब दो घंटे परेशान होना पड़ गया।
- भाई पांडू भटकता रहा, अंत में उसने अपने किसी रिश्तेदार को फोन किया, जब वह पैसे लेकर पहुंचा तो छात्रा को दवाई मिल पाई। इधर हाॅस्टल अधीक्षिका सुमित्रा की दलील है कि बच्चों की जिम्मेदारी के साथ हड़ताल में भी उसे शामिल होने जाना पड़ रहा है।
- न केवल शर्मिला बल्कि हाॅस्टल की 8 छात्राएं बीमार होकर जिला अस्पताल में भर्ती हैं। जिन बच्चों के परिजन पहुंच गए हैं, उन्हें परिजनों के भरोसे छोड़ा गया है, जबकि जिनके परिजन नहीं आए हैं, उनके पास अस्पताल में भृत्य मौजूद हैं।
- अधीक्षिका ने यह भी कहा कि परिजनों ने दवाई के लिए पैसे नहीं होने की जानकारी कर्मचारी को दी न ही मुझे।


अधीक्षिका को दी हिदायत
- मंडल संयोजक रवींद्र टीकम ने कहा कि अधीक्षका से इस संबंध में बात हुई है। उन्हें बीमार बच्चों के साथ अस्पताल में रहने व उनकी देखभाल की हिदायद दी गई है।

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