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पथरीले रास्तों पर ३ किमी तक खाट पर गई प्रसूता, ऐसा है ये दुर्गम रास्तों वाला गांव

पथरीले रास्तों पर ३ किमी तक खाट पर गई प्रसूता, ऐसा है ये दुर्गम रास्तों वाला गांव

Danik Bhaskar | Nov 25, 2017, 11:47 AM IST
यूं खाट पर लाया गया महिला को। यूं खाट पर लाया गया महिला को।


बलरामपुर। जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के दूरस्थ क्षेत्र वीरेंद्रनगर के मीठी महुआपारा में प्रसव के बाद खून की कमी से बीमार हुई 22 वर्षीय महिला अनिता पंडो को बचाने महतारी एंबुलेंस के कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। तबीयत खराब होने की सूचना पर शुक्रवार को एंबुलेंस लेकर कर्मचारी वीरेंद्रनगर तक पहुंचे, लेकिन आगे पहाड़ी के कारण रास्ता ही नहीं था। खाट पर आई प्रसूता...


- पहाड़ी के रास्ते में 3 किमी पैदल चलकर एंबुलेंस के कर्मचारी मरीज के घर पहुंचे। परिजनों के साथ प्रसूता को खाट पर लेकर वापस वापस वीरेंद्रनगर आए।
- यहां से उसे उप स्वास्थ्य केंद्र मुरकौल लाया गया। यहां डा. पीएम त्रिपाठी द्वारा प्राथमिक इलाज किया गया। डा. त्रिपाठी ने ही उसे अस्पताल लाने महतारी एंबुलेंस को सूचना दी थी।
- यहां जांच में पता चला कि अनिता के शरीर में खून की कमी है। हालत गंभीर होने से उन्होंने उसे अंबिकापुर मेडिकल कालेज रेफर कर दिया।


दो दिन पहले हुआ था डिलीवरी


- अनिता ने दो दिन पहले ही उप स्वास्थ्य केंद्र मुरकौल में सामान्य प्रसव में एक बच्चे को जन्म दिया था। तब हालत सामान्य होने से परिजन प्रसव के बाद उसे वापस घर लेकर चले गए।
- यहां आने के बाद कमजोरी के कारण उसकी तबीयत खराब हो गई। मितानिन को पता चला तो उसने इसकी जानकारी उप स्वास्थ्य केंद्र में डाक्टर को दी। इसके बाद उसके इलाज की व्यवस्था हो पाई।


पहाड़ी पर गांव होने से पैदल चलना भी है मुश्किल


- वीरेंद्रनगर का मीठी महुआपारा बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर क्षेत्र का काफी दूरस्थ गांव हैं। सुलसुली से वीरेंद्रनगर की दूरी करीब 20 किमी है।
- सुलसुली से वीरेंद्रनगर मीठी महुआपारा की दूरी करीब ३ किमी है। यह गांव पहाड़ पर स्थित है। चारों तरफ जंगल हैं।
- इसलिए यहां जाने के लिए पहाड़ियों पर पगडंडी वाले उबड़ खाबड़ रास्ते हैं। इस पर पैदल चलना भी मुश्किल भरा है।