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पोला पर्व में पहुंचे कलेक्टर ने ग्रामीणों के साथ दौड़ाई बैलगाड़ी, बैलों की पूजा के साथ हुआ शुभारंभ

रावां गांव में पहली बार मनाया गया छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्यौहार

Dainik Bhaskar

Sep 09, 2018, 05:13 PM IST
धमतरी में कलेक्टर सीआर प्रसन् धमतरी में कलेक्टर सीआर प्रसन्

धमतरी/रायपुर. छत्तीसगढ़ की ग्रामीण परंपरा में मनाए जाने वाले पोला पर्व को धमतरी के रावां गांव में में रविवार को उत्साह के साथ मनाया गया है। इस दौरान कलेक्टर सीआर प्रसन्ना ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर बैलगाड़ी दौड़ाई। रावां गांव में पहली बार इस पर्व का आयोजन किया गया है। वहीं राजधानी के रावणभाटा मैदान में भी बैलोंं की दौड़ कराई गई।

बैलोंं की पूजा की रस्मों के साथ हुई शुरुआत

पर्व के दौरान बैल दौड़ की परंपरा के साथ पारंपरिक खेलों का भी आयोजन हुआ। इस दौरान जिले के कलेक्टर डॉ सीआर प्रसन्ना भी इस पोला पर्व के रंग में रंगे दिखे और पर्व मनाने रावां के ग्रामीणों के बीच पहुंच गए। इससे पहले कलेक्टर प्रसन्ना ने गेड़ी चलाकर और बैलोंं की पूजा कर रस्में निभाई। इस पारंपरिक त्यौहार की जमकर सराहना की और इसे अपने आप में अनोखा त्यौहार बताया।

बैलोंं को लेकर प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे ग्रामीण

इस दौरान आसपास के गांवों से भी लोग अपने बैलोंं को लेकर प्रतियोगिता में हिस्सा लेने पहुंचे थे। इसके अलावा यहां ठेठरी, खुरमी, गुलगुला भजिया का लुत्फ कलेक्टर सहित ग्रामीणों ने उठाया वहीं बच्चों लिए फुगड़ी का भी आयोजन किया गया। जिसमे बच्चों से लेकर बूढ़े भी शामिल हुए। बैल मालिकों में भी गजब का उत्साह दिखाई दिया। आलम ये रहा कि एक बार बैलोंं को रस्सा से छोड़ा गया तो उनमें जोश आ गया और भागते नजर आए।

ग्रामीण संस्कृति से जुड़ा पर्व

पोला त्योहार भादो माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बैलोंं का श्रृंगार कर उनकी पूजा की जाती है। बच्चे मिट्टी के बैल चलाते हैं। इस दिन बैल दौड़ का भी आयोजन किया जाता है। इस दिन बैलों से कोई काम भी नहीं कराया जाता है और घरों में महिलाएं व्यंजन बनाती हैं। परंपरा रूपी खेल बैल दौड़, गेड़ी दौड़, कुश्ती, रस्सा-कस्सी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की खूब धूम होती है। पोला-पिठोरा मूलत: खेती-किसानी से जुड़ा त्योहार है। यह पर्व विशेषकर महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं छत्तीसगढ़ में मनाया जाता है।

मंदिरों में हुई पूजा-अर्चना
पर्व के दिन मंदिरों में भजन-कीर्तन हो रहे हैं। इस दिन भगवान शिव के वाहन बैलोंं की पूजा करने की परंपरा है। सुबह बैलोंं को नहलाकर भगवान शिव और उनके वाहन नंदी स्वरूप बैलोंं की पूजा की गई। ज्योतिषियों के अनुसार अमावस्या को सूर्योदय काल में तीर्थ स्थल, नदी, तालाब या घर में स्नान कर पितर तर्पण कर दान देने से पुण्य मिलता है। इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए।

बेटियों का मायके आने का दौर शुरू

छत्तीसगढ़ का प्रमुख पर्व तीजा पोला पर बेटियों का मायके आने का दौर शुरू हो गया है। पोला पर्व को किसान बड़े धूमधाम से मनाते हैं। लकड़ी व मिट्टी बैलोंं को रंगबिरंगे कलर से सजाया जाता है। बैलोंं की पूजा के बाद पारंपरिक व्यंजन ठठेरी, खुर्मी, बोबरा व चीला का भोग लगाया जाता है। शहर के लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान व मंगला में बैलोंं की दौड़ स्पर्धा होगी।

कंटेंट/फोटो : अजय देवागंन

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धमतरी में कलेक्टर सीआर प्रसन्धमतरी में कलेक्टर सीआर प्रसन्
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