विरंचीनारायण मंदिर की 150 साल पुरानी परंपरा यहां प्राकट्य उत्सव पर करते हैं जीवंत मंचन

Bhaskar News Network

May 17, 2019, 07:35 AM IST

Raipur News - कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर शहर का पुरानीबस्ती क्षेत्र जिसे प्राचीन धरोहरों के लिए ही जाना जाता है। इससे सटे...

Raipur News - chhattisgarh news 150 years old tradition of virchinarayanayan temple is performed on the occult festival live stage
कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

शहर का पुरानीबस्ती क्षेत्र जिसे प्राचीन धरोहरों के लिए ही जाना जाता है। इससे सटे ब्रम्ह पुरी में विरंचीनारायण मंदिर भी कई मायने में खास है। यहां भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार से जुड़े प्रसंग को प्राकट्य उत्सव के दिन भक्त जीवंत करते हैं। यह परंपरा करीब 150 साल से निभाई जा रही है। इसमें केवल नरसिंह अौर प्रहलाद के किरदार को निभाने वाले ही तय किए जाते हैं। हिरण्यकश्यप अौर सेना भक्त ही अापस में तय करके बनते हैं।

मंदिर के महंत देवदास महाराज बताते है कि इसका निर्माण 9वीं सदी में राजा भोसले द्वारा कराया गया था। जिसमें भगवान विष्णु की क्षीरसागर में शयन मुद्रा में स्थापित मूर्ति दुर्लभ मानी जाती है। इस तरह की मूर्ति छत्तीसगढ़ में कहीं भी नहीं पाई जाती है। इस मंदिर में ही भगवान के नरसिंह अवतार को जीवंत करने की 150 साल पुरानी परंपरा है। प्राकट्य दिवस को मंदिर में दिनभर उत्सव की तरह मनाया जाता है। इसमें शामिल होने के लिए विभिन्न मठ-मंदिरों के संत-महंत भी अाते हैं। उत्सव की तैयारी महीनेभर पहले शुरु हो जाती है। इसमें मंदिर के रंग-रोगन से लेकर साज-सज्जा को अाकर्षक बनाने में किसी प्रकार की कसर नहीं छोड़ी जाती है।

झांकी के साथ शोभायात्रा

महाराज ने बताया कि हर साल प्राकट्य उत्सव के अवसर शाम 5 बजे भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। इसमें बैंड-बाजे के साथ झूमते-नाचते भक्त ब्रम्हपुरी, कैलाशपुरी, पुरानीबस्ती क्षेत्र का भ्रमण करते हुए बूढ़ापारा चौक पहुंचते हैं। जहां पर कलाकारों की टोली हिरण्यकश्यप संहार प्रसंग की जीवंत प्रस्तुति देती है। इसे देखने के लिए विभिन्न क्षेत्र से श्रद्धालु हर साल पहुंचते हैं।

अाज मंदिर में गूंजेगा मंत्रोच्चार

मंदिर में शुक्रवार को नरसिंहनाथ प्राकट्य उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। महंत ने बताया कि सुबह 9 से साढ़े 11 बजे तक मंत्रोच्चार के साथ वेदी पूजा अौर दुग्धाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद पुरोहितों द्वारा हवन अौर अारती कराई जाएगी। इसमें शामिल होने के लिए शहर के बाहर से भी श्रद्धालु सपरिवार अाते हैं। दोपहर 1.30 से शाम 4 बजे तक भंडारे का अायोजन हर साल की तरह किया जाएगा।

20 साल से बन रहे नरसिंह

उन्होंने बताया कि प्राकट्य उत्सव पर हर साल परंपरागत रूप से शाम को निकलने वाली भव्य शोभायात्रा के बाद भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार से जुड़े प्रसंग को जीवंत किया जाता है। इसमें नरसिंह का रोल विगत 20 साल से संजयनगर निवासी किशन जैन निभाते हैं। ब्रम्हपुरी में ही रहने वाले 11 साल के गिरीराज सिंह विगत 6 साल से प्रहलाद का किरदार निभा रहे हैं। इनके अलावा हिरण्यकश्यप की सेना अौर होलिका का किरदार शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु ही अापस में तय करके निभाते हैं।

कई कलाकार बदले, नए संभाल रहे जिम्मेदारी

महंत ने बताया कि इनके पहले रामा पाण्डेय, गोपाल यादव, अशोक चन्द्राकर ने भक्त प्रहलाद अौर नरसिंह की भूमिका को कई सालों तक निभाया। उनका कहना है कि वे स्वयं 17 वें महंत के रूप में मंदिर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके पहले जिन महंतों ने मंदिर संचालन किया, वे भी झांकी अौर भगवान के प्राकट्य उत्सव से जुड़े पौराणिक प्रसंग को श्रद्धालुअों के माध्यम से जीवंत कराने की भूमिका निभाते रहे हैं। तब भी केवल प्रहलाद अौर नरसिंह का किरदार ही पहले से तय किया जाता रहा है।

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