--Advertisement--

दसवीं गणित में 30 फीसदी सरल सवाल, इस साल भी पेपर तैयार हैं, इसलिए अगले साल होगा और आसान

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2019, 03:11 AM IST

Raipur News - सीबीएसई ने इस साल गणित को सरल और कठिन, दो परचों में बांटा है लेकिन छत्तीसगढ़ बोर्ड पिछले साल ही ऐसा कर चुका है। फर्क...

Raipur News - chhattisgarh news 30 percent simple questions in tenth math paper ready even this year so next year will be easier
सीबीएसई ने इस साल गणित को सरल और कठिन, दो परचों में बांटा है लेकिन छत्तीसगढ़ बोर्ड पिछले साल ही ऐसा कर चुका है। फर्क इतना है कि यहां गणित के परचे में 30 फीसदी आसान सवाल अनिवार्य कर दिए गए हैं। इसके बावजूद पिछले साल लागू हुए इस पैटर्न का कोई खास फायदा नहीं हुआ और स्टेट बोर्ड के 10 वीं के लगभग आधे छात्र फिर गणित में फेल हो गए। अब सीबीएसई में बदलाव की वजह से छत्तीसगढ़ बोर्ड इस परचे को और आसान करेगा। इस साल पेपर तैयार हो गए हैं, इसलिए नया आसान पैटर्न अगले साल लागू कर दिया जाए।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने गणित का डर खत्म करने के लिए दसवीं में इसकी पढ़ाई को स्टैंडर्ड व बेसिक, दो हिस्सों में बांट दिया है। गणित को लेकर यह डर राज्य के बोर्ड भी है। सीजी बोर्ड ने पिछले साल यानी 2018 में गणित का पैटर्न बदलकर 30 फीसदी आसान सवाल पूछना अनिवार्य कर दिया था। यह इसलिए किया गया ताकि गणित में ज्यादा छात्र पास हो सकें। हालांकि इस पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली। गणित में आसन सवाल पूछने के बावजूद 53 फीसदी छात्र ही पास हो पाए। इसे देखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) एक बार फिर गणित को और आसान करने की तैयारी में है। इसके लिए सीबीएसई के नए फार्मूले की समीक्षा शुरू कर दी गई। बोर्ड अफसरों ने बताया कि इस साल के दसवीं के पेपर तैयार हो गए हैं। माशिमं के सचिव प्रो.वीके.गोयल का कहना है कि आगामी बोर्ड परीक्षा में कोई बदलाव नहीं होगा। इसलिए एक्सपर्ट की राय के साथ बदलाव अगले साल किया जाएगा।

सीबीएसई में सरल व कठिन गणित के पैटर्न पर मंथन

बदलना चाहिए कंसेप्ट

एक मार्च से दसवीं की बोर्ड परीक्षा शुरू हो रही है। गणित का पेपर पांच मार्च को होगा। इसमें 30 फीसदी सवाल आसान रहेंगे। 50 फीसदी सवाल औसत। 20 फीसदी सवाल कठिन होंगे। शिक्षाविदों का मानना है कि अभी भी आधे छात्र इस विषय में ही फेल हो रहे हैं, इसलिए सीबीएसई जैसा कंसेप्ट यहां भी लागू होना चाहिए। अर्थात जो छात्र आगे गणित नहीं पढ़ना चाहते, उनके लिए सरल सवालों की संख्या अधिक होनी चाहिए। बाद में सीबीएसई के फार्मूले पर चर्चा की जाएगी।

सीबीएसई में सरल और कठिन गणित के पैटर्न पर मंथन, क्योंकि यहां अब भी आधे छात्र सिर्फ गणित में फेल

37 फीसदी छात्र पास हुए थे गणित में

शिक्षाविदों ने बताया कि पिछले 10 साल से दसवीं में गणित का रिजल्ट कमजोर आ रहा है। वर्ष 2015 में गणित में पास होने वाले छात्रों की संख्या 37.64 फीसदी थी। यह 2016 में बढ़कर 40.10 फीसदी हुई। साल 2017 में 44.64 फीसदी छात्र पास हुए। यह बढ़कर 2018 में 53 फीसदी पर ही पहुंच सका है।

नवमी में भी आधे गणित में फेल

नवमी में फेल-पास का सिस्टम लागू होने की वजह से यह बात सामने आ रही है कि कितने फीसदी छात्र गणित, विज्ञान व अन्य विषयों में कमजोर हैं। शिक्षाविदों ने बताया कि नवमी में भी गणित व अंग्रेजी में पास करना छात्रों के लिए कठिन है, इसलिए नवमी से ही गणित को राज्य बोर्ड में कोई सिस्टम बनाने की जरूरत है।

उच्च शिक्षा में भी रिजल्ट बिगड़ा

गणित विषय उच्च शिक्षा में भी नतीजे बिगाड़ रहा है। बीसीए प्रथम वर्ष के नतीजों पर गौर करें तो पिछले कुछ बरसों में महत 30 फीसदी छात्र ही पास कर रहे हैं। कोर्स अधिक होने की वजह से छात्र 40 फीसदी अंक भी नहीं जुटा पा रहे थे। इसीलिए रविवि ने सिस्टम बदलते हुए पासिंग मार्क्स 33 फीसदी किए और कोर्स भी घटाया है।

X
Raipur News - chhattisgarh news 30 percent simple questions in tenth math paper ready even this year so next year will be easier
Astrology

Recommended

Click to listen..